मिलिए 11 साल की बिटिया Grihitha Vichare से, 33 दिनों में 16 राज्यों की सबसे ऊंची चोटी पर लहराया तिंरगा- पहले भी कर चुकी हैं ये कमाल
महाराष्ट्र के ठाणे की एक 11 साल की लाडली ने वो कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े अनुभवी पर्वतारोही भी आसानी से नहीं कर पाते. गृहिता सचिन विचारे नाम की इस नन्ही सी उम्र की योद्धा ने अपने हौसले से भारत के पर्वतारोहण इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है.
जहां एक ओर देशभर के बच्चे गर्मियों की छुट्टियों में खेल-कूद और मौज-मस्ती में व्यस्त हैं, वहीं महाराष्ट्र के ठाणे की एक 11 साल की लाडली ने वो कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े अनुभवी पर्वतारोही भी आसानी से नहीं कर पाते. गृहिता सचिन विचारे नाम की इस नन्ही सी उम्र की योद्धा ने अपने हौसले से भारत के पर्वतारोहण इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है.
कहते हैं, सपने उम्र नहीं देखते… और शायद यही बात गृहिता पर बिल्कुल सटीक बैठती है. 23 अप्रैल 2026 को जब उन्होंने “मिशन इंडिया समिट- 16 स्टेट्स, 16 पीक्स” की शुरुआत महाराष्ट्र की धरती से की, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर सिर्फ एक अभियान नहीं बल्कि एक इतिहास बन जाएगा. मात्र 33 दिनों में इस बच्ची ने भारत के 16 राज्यों की सबसे ऊंची चोटियों को फतह कर लिया.
इस सफर में सिर्फ पहाड़ों से लड़ाई नहीं थी, बल्कि समय, थकान और लगातार बदलते हालात से भी जंग थी. कभी आसमान में उड़ते हुए फ्लाइट का सफर, तो कभी लंबी सड़कें, कभी ट्रेन की थकाने वाली यात्रा और फिर घंटों की कठिन ट्रेकिंग- गृहिता ने हर चुनौती को मुस्कुराते हुए पार किया.
33 दिनों में 16 राज्यों की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा
33 दिनों के इस कठिन मिशन में उन्होंने- 15 फ्लाइट्स के जरिए लगभग 9,141 किलोमीटर का हवाई सफर तय किया 5,480 किलोमीटर सड़क मार्ग से यात्रा की 618 किलोमीटर ट्रेन से सफर किया और 130 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलकर और ट्रेकिंग कर चोटियों को छुआ. हर राज्य की अपनी अलग चुनौती थी. कहीं ऊंची चढ़ाई, कहीं मौसम की मार और कहीं कठिन रास्ते, लेकिन हर बार छोटी सी उम्र की यह बच्ची अपने हौसले से पहाड़ों को पीछे छोड़ती गई.
इस ऐतिहासिक मिशन में जिन 16 चोटियों को उसने छुआ, उनमें महाराष्ट्र की कळसुबाई, गोवा की सोंसोगोर, कर्नाटक की मुल्लायनगिरि, केरल की मेसापुलीमाला, तमिलनाडु की डोड्डाबेट्टा, तेलंगाना का पाताल टोका, ओडिशा का देओमाली, छत्तीसगढ़ का गौरलाटा, झारखंड का पारसनाथ, पश्चिम बंगाल का संडकफू, असम का तुमजंग पीक, हरियाणा का करोह पीक, पंजाब का सबसे ऊंचा बिंदु, राजस्थान का गुरु शिखर, मध्य प्रदेश का धूपगढ़ और गुजरात का गिरनार शामिल हैं.
लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
गृहिता की जिंदगी में यह पहला बड़ा कारनामा नहीं है. इससे पहले भी उसने अपनी मेहनत और जुनून से दुनिया को चौंकाया है. महज 8 साल की उम्र में उसने एवरेस्ट बेस कैंप की कठिन ट्रेकिंग पूरी की, 9 साल की उम्र में किलिमंजारो को सिर्फ 62 घंटे में फतह कर लिया, 10 साल की उम्र में रूस-अजरबैजान सीमा पर स्थित माउंट बजरदुजु पर तिरंगा फहराया और 11 साल की उम्र में हिमाचल के माउंट उनाम पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया.
आज उसके नाम 8 India Book of Records और 1 Asia Book of Records दर्ज हैं. लेकिन इन सब रिकॉर्ड्स से ऊपर एक बात है- उसकी आंखों में डर नहीं, सिर्फ सपने हैं. कहते हैं पहाड़ ऊंचे होते हैं, लेकिन हौसला उससे भी ऊंचा हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं… और गृहिता सचिन विचारे ने यह साबित कर दिया है कि उम्र चाहे 11 साल ही क्यों न हो, अगर इरादे मजबूत हों तो दुनिया




