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80 एकड़ जमीन, भर्ती में गड़बड़ी और बेटी के सेलेक्शन के लिए ‘तिगड़म’, KPSC के पूर्व चेयरमैन साहूकार पर क्या-क्या आरोप, ED ने किया अरेस्ट

KPSC के पूर्व चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार पर ईडी की गाज गिरी है. एग्जाम में गड़बड़ी से लेकर बेटी के फर्जी दस्तावे बनवाने तक उन पर कई इल्जाम हैं. जानें पूरा मामला

80 एकड़ जमीन, भर्ती में गड़बड़ी और बेटी के सेलेक्शन के लिए ‘तिगड़म’, KPSC के पूर्व चेयरमैन साहूकार पर क्या-क्या आरोप, ED ने किया अरेस्ट
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बेंगलुरु में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पूर्व चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया. यह कार्रवाई 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में गड़बड़ियों की जांच के सिलसिले में हुई. ED ने मंगलवार को साहूकार के घर पर दूसरी बार छापेमारी की थी. इसी मामले में KPSC सदस्य बीवी गीता के यहां भी छापेमारी की गई और उन्हें भी गिरफ्तार किया गया है.

सूत्रों के मुताबिक, साहूकार और गीता की गिरफ्तारी की प्रक्रिया मंगलवार को पूरी कर ली गई. दोनों को मंगलवार रात एक जज के सामने पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें एक दिन के लिए ED की हिरासत में भेज दिया गया. दोनों को बुधवार यानी आज दोपहर 3 बजे फिर से बेंगलुरु की अदालत में पेश किया जाएगा. ED इस दौरान दोनों की अधिकतम हिरासत मांग सकती है.

क्या है मामला?

ED की जांच 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों (Veterinary Officer) की भर्ती में गड़बड़ी से जुड़ी है. जांच में KPSC के अधिकारियों और दूसरे आरोपियों के बीच प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका साझा किए जाने की बात सामने आई थी. पिछले हफ्ते ED ने निलंबित IAS अधिकारी और KPSC के पूर्व परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार से पूछताछ पूरी की थी. उन्हें एजेंसी ने हिरासत में लेकर पूछताछ की थी. इस मामले में एक अन्य आरोपी और खुद को राजनीतिक कार्यकर्ता बताने वाले बसवराज कन्नाले से भी ED ने पूछताछ की थी. गंगवार और कन्नाले फिलहाल बेंगलुरु सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं. अदालतों ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं.

जांच में क्या आया सामने?

जांच में यह भी सामने आया है कि साहूकार ने 7 जनवरी की रात गंगवार को कथित तौर पर दो बार फोन किया था. यह परीक्षा से एक दिन पहले की बात है. गंगवार पर आरोप है कि उन्होंने प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका सुगुरेश के साथ साझा की थी. आरोप है कि बाद में सुगुरेश ने ये जानकारी गीता के साथ साझा की.

कौन हैं शिवशंकरप्पा एस. साहूकार?

शिवशंकरप्पा साहूकार रायचूर जिले के देवदुर्ग तालुक के हेमनाला गांव के रहने वाले हैं. उनके पास कृषि इंजीनियरिंग में डिग्री है. उन्होंने पहले कृषि सलाहकार के तौर पर भी काम किया है. साहूकार को सितंबर 2019 में KPSC का सदस्य नियुक्त किया गया था. इसके बाद अप्रैल 2021 में तत्कालीन राज्य सरकार की सिफारिश पर तत्कालीन राज्यपाल वजुभाई वाला ने उन्हें KPSC का चेयरमैन नियुक्त किया था. उन्होंने शदाक्षरी स्वामी की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी.

बेंगलुरु के पॉश इलाके में घर

साहूकार का बेंगलुरु के पॉश डॉलर्स कॉलोनी इलाके में एक प्रमुख आवासीय घर है. केंद्रीय जांच एजेंसियां यहां कई दिनों तक तलाशी अभियान चला चुकी हैं. उनकी और उनके परिवार की जमीन-जायदाद को लेकर भी आरोप सामने आए हैं. KPSC से जुड़े विवादों के दौरान सामने आए सार्वजनिक आरोपों और संपत्ति रिकॉर्ड के अनुसार, साहूकार से जुड़ी करीब 80 एकड़ जमीन होने की बात कही गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका Kalaburagi इलके में भी एक घर है.

27 एकड़ जमीन को लेकर भी शिकायत

सितंबर 2026 में एक पुलिस शिकायत में साहूकार पर 27 एकड़ जमीन कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल करने का आरोप लगाया गया था. यह जमीन यादवगीर जिले के शाहापुर तालुक के अनाबी गांव में बताई गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर परिवार के रिश्तों के जरिए इन जमीनों को अपने नाम दर्ज कराया गया. जानकारी के मुताबिक उनके पास कुल 80 एकड़ प्रोपर्टी है.

बेटी के आय प्रमाण पत्र को लेकर भी विवाद

साहूकार को एक अलग मामले में भी जांच का सामना करना पड़ा है. इस मामले में आरोप है कि उनकी बेटी ने सरकारी नौकरी में कैटेगरी 3B के तहत आरक्षण का लाभ लेने के लिए परिवार की सालाना आय 40,000 रुपये दिखाने वाला कथित फर्जी आय प्रमाण पत्र जमा किया था.

बेटियों के सेलेक्शन को लेकर भी लगे आरोप?

साहूकार के खिलाफ कार्रवाई का एक और कारण KPSC में उनके पद के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है. राज्यपाल सचिवालय के अनुसार, शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि साहूकार ने KPSC में अपने पद का इस्तेमाल अपनी दो बेटियों के औद्योगिक विस्तार अधिकारी के पद पर चयन में मदद करने के लिए किया.

सचिवालय के मुताबिक, साहूकार की दोनों बेटियां भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवार थीं. इसके बावजूद उन्होंने खुद को उस भर्ती प्रक्रिया से अलग नहीं किया. उन पर यह भी आरोप लगाया गया कि KPSC में नियुक्तियों की जिम्मेदारी संभालते समय उन्होंने संभावित हितों के टकराव यानी Conflict of Interest की जानकारी आयोग के सामने नहीं रखी.

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