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RBI के फैसले के बाद जानिए आपकी EMI पर कितना पड़ेगा असर, क्या बोले शक्तिकांत दास?

6 दिसंबर 2024 को, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 6.50% पर बरकरार रखने का फैसला किया. इसका मतलब है कि घर के लोन की ईएमआई या रियल एस्टेट बाजार में कोई तत्काल बदलाव नहीं होगा.

RBI के फैसले के बाद जानिए आपकी EMI पर कितना पड़ेगा असर, क्या बोले शक्तिकांत दास?
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महंगाई से जूझ रहे लोगों के लिए शुक्रवार, यानी आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शशिकांत दास, जो मॉनिटरी कमेटी के चेयरमैन भी हैं, आज रेपो रेट की घोषणा की है. यह लगातार 11वीं बार है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट 6.50 प्रतिशत पर ही कायम है.

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने 9 अक्टूबर को अपनी बैठक के आखिरी दिन इस फैसले की जानकारी दी. यह मीटिंग 4 दिसंबर को शुरू हुई थी और आज इसका आखिरी दिन था. RBI की 6 सदस्यों वाली कमेटी में 4-2 के अनुपात में यह निर्णय लिया गया कि रेपो रेट को 6.50 प्रतिशत पर बनाए रखा जाए. इसका मतलब है कि 6 में से 4 सदस्यों ने इस दर को अपरिवर्तित रखने का समर्थन किया.

फिलहाल आपकी EMI अभी के लिए स्थिर रहेगी. रेपो रेट, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा तय किया जाता है, देशभर में घरों के लोन की ब्याज दरों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है.

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि, 'इस साल की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी में 5.4% की वृद्धि अनुमान से काफी कम रही. विकास में यह गिरावट पहली तिमाही में 7.4% से औद्योगिक विकास में काफी गिरावट के कारण हुई." विनिर्माण कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन, खनन गतिविधि में संकुचन और कम बिजली की मांग के कारण दूसरी तिमाही में यह 2.1% हो गई, हालांकि, विनिर्माण क्षेत्र में कमजोरियां व्यापक नहीं थीं बल्कि पेट्रोलियम जैसे विशिष्ट क्षेत्रों तक ही सीमित थीं आगे बढ़ते हुए,

अब तक उपलब्ध उच्च-आवृत्ति संकेतक बताते हैं कि घरेलू आर्थिक गतिविधि में मंदी इस वर्ष की दूसरी तिमाही में समाप्त हो गई है और तब से मजबूत त्योहारी मांग और ग्रामीण गतिविधियों में तेजी के कारण इसमें सुधार हुआ है. कृषि विकास को स्वस्थ ख़रीफ़ फसल उत्पादन, उच्च जलाशय स्तर और बेहतर रूबी बुआई द्वारा समर्थित किया गया है, औद्योगिक गतिविधि सामान्य होने और पिछली तिमाही के निचले स्तर से उबरने की उम्मीद है."

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