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कभी शराब और जुए ने बर्बाद कर दिया था यह गांव, फिर शतरंज ने ऐसे बदली पूरी तस्वीर, बना चुके हैं एशियाई रिकॉर्ड

केरल का मारोट्टिचल गांव कभी शराब और जुए की वजह से बदहाल था, लेकिन समय के साथ यहां ऐसा बदलाव आया कि आज यह अपनी बुरी आदतों के लिए नहीं, बल्कि शतरंज के कल्चक के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है.

कभी शराब और जुए ने बर्बाद कर दिया था यह गांव, फिर शतरंज ने ऐसे बदली पूरी तस्वीर, बना चुके हैं एशियाई रिकॉर्ड
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कहां है भारत का चेस विलेज

( Image Source:  instagram-@universe.one )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 13 July 2026 2:08 PM IST

सोचिए, एक ऐसा गांव जहां कभी शाम ढलते ही शराब की महफिलें सजती थीं, जुए की बाजियां लगती थीं और कई परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गए थे. लोगों की जिंदगी निराशा, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी में उलझ चुकी थी. किसी को उम्मीद नहीं थी कि एक दिन यही गांव अपनी इस पहचान को पूरी तरह बदल देगा.

फिर एक शतरंज की बिसात बिछी और धीरे-धीरे पूरी कहानी बदलने लगी. लोगों ने शराब और जुए की जगह शतरंज को अपना साथी बना लिया. देखते ही देखते यह खेल गांव की नई पहचान बन गया. आज केरल का मारोट्टिचल न सिर्फ 'चेस विलेज' के नाम से मशहूर है, बल्कि 1,000 से ज्यादा लोगों के एक साथ शतरंज खेलने का एशियाई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुका है. यह कहानी बताती है कि कभी-कभी एक छोटा-सा सकारात्मक कदम पूरे समाज की तकदीर बदल सकता है.

कहां है मारोट्टिचल गांव?

मारोट्टिचल गांव केरल के त्रिशूर जिले में स्थित है. यह इलाका अपनी हरियाली, शांत वातावरण और आसपास मौजूद खूबसूरत झरनों के लिए भी जाना जाता है. कई टूरिस्ट यहां प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने पहुंचते हैं, लेकिन जो लोग गांव की असली कहानी जानते हैं, वे यहां के सामाजिक बदलाव को करीब से देखने भी आते हैं.

कभी शराब और जुए की वजह से बदनाम था गांव

करीब 60 साल पहले मारोट्टिचल की पहचान आज जैसी नहीं थी.यहां शाम ढलते ही लोग शराब के नशे में चूर रहते थे और जुआ खेलते थे. धीरे-धीरे यह बुरी लत इतनी गहरी हो गई कि कई परिवार टूटने लगे, घरों की आर्थिक हालत बिगड़ गई और बेरोजगारी ने लोगों की जिंदगी को जकड़ लिया. हर दिन के साथ उम्मीद कम होती जा रही थी और पूरे गांव पर निराशा का साया छा गया था. किसी ने शायद ही सोचा होगा कि एक दिन यही गांव अपनी इस पहचान को पूरी तरह बदलकर देश-दुनिया के लिए मिसाल बन जाएगा.

एक चायवाले ने कैसे बदली गांव की किस्मत

गांव की किस्मत बदलने की शुरुआत किसी बड़े अभियान या सरकारी योजना से नहीं, बल्कि एक छोटी-सी चाय की दुकान से हुई. इस दुकान को चलाने वाले उन्नीकृष्णन, जिन्हें गांव वाले प्यार से 'मामा' कहते हैं, शतरंज के बेहद शौकीन थे. उन्होंने लोगों को शराब छोड़ने के लिए न भाषण दिए और न ही कोई आंदोलन शुरू किया. इसके बजाय उन्होंने अपनी दुकान पर एक शतरंज की बिसात बिछा दी और लोगों को खेल के जरिए जोड़ना शुरू किया.

शुरुआत में कुछ ही लोग उनके साथ बैठकर चालें सीखने लगे. फिर जिन्होंने खेल सीखा, वे आगे दूसरे लोगों को सिखाने लगे. देखते ही देखते यह शौक पूरे गांव की पहचान बन गया. जहां कभी लोग शाम होते ही शराब और जुए की ओर खिंचे चले जाते थे, वहीं अब वे शतरंज की बिसात के आसपास जुटने लगे. एक साधारण-सा खेल लोगों के लिए नई उम्मीद, नई दोस्ती और नई शुरुआत का जरिया बन गया, जिसने धीरे-धीरे पूरे मारोट्टिचल की तस्वीर ही बदल दी.

क्या बनाया इस गांव ने रिकॉर्ड?

धीरे-धीरे शतरंज केवल एक खेल नहीं रहा, बल्कि मारोट्टिचल के लोगों की नई जीवनशैली बन गया. जहां कभी शाम ढलते ही शराब की दुकानों पर भीड़ लगती थी, वहीं अब गांव के चौराहों, चाय की दुकानों और घरों के बाहर शतरंज खेलने लगे. हर चाल के साथ लोगों का ध्यान बुरी आदतों से हटकर कुछ रचनात्मक करने में लगने लगा. समय के साथ यह बदलाव इतना बड़ा बन गया कि मारोट्टिचल की पहचान पूरे देश में बदल गई. जिस गांव को कभी शराब और जुए की वजह से जाना जाता था, वही आज 'चेस विलेज' के नाम से मशहूर है. इस अनोखी पहल ने इतिहास भी रच दिया, जब 1,000 से अधिक लोगों ने एक साथ शतरंज खेलकर एशियाई रिकॉर्ड बनाया.

क्यों जाना चाहिए मारोट्टिचल?

अगर आप सिर्फ खूबसूरत जगहों की तस्वीरें लेने के बजाय उन कहानियों को जानना पसंद करते हैं जो समाज को बदलने की ताकत रखती हैं, तो मारोट्टिचल आपके लिए खास जगह हो सकती है. यहां आपको गांव की अनोखी शतरंज संस्कृति देखने का मौका मिलेगा, स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनके एक्सपीरियंस सुन सकेंगे और समझ पाएंगे कि कैसे एक छोटी-सी पहल पूरे समाज की दिशा बदल सकती है.

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