एक्सपीरियंस+ यूथ का कॉकटेल DK सरकार! कांग्रेस के एक तीर से 3 निशाने, 2028 पर फोकस
डीके शिवकुमार सरकार में 3 डिप्टी CM फॉर्मूले पर मंथन तेज है. कांग्रेस दलित, OBC, महिला और अल्पसंख्यक संतुलन से 2028 चुनाव साधना चाहती है.
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के साथ ही कांग्रेस अब नई राजनीतिक सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले पर काम करती दिख रही है. डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की तैयारी के बीच पार्टी 3 से 4 डिप्टी CM वाला मॉडल बना सकती है. ताकि दलित, OBC, लिंगायत, अल्पसंख्यक और महिला प्रतिनिधित्व का संतुलन साधा जा सके. कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार गुटों के बीच शक्ति संतुलन बना रहे और 2028 विधानसभा चुनाव तक सरकार स्थिर दिखाई दे. यही वजह है कि नई कैबिनेट को सिर्फ सरकार गठन नहीं, बल्कि अगले चुनाव की रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि डीके सरकार में आखिर कितने शक्ति केंद्र नजर आएंगे.
सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस आलाकमान ने डीके शिवकुमार को कर्नाटक का सीएम बनाने का मन बना लिया है. लंबे समय से संगठन और सरकार के बीच सबसे मजबूत रणनीतिकार माने जाने वाले डीके अब मुख्यमंत्री पद संभाल सकते हैं. वोक्कालिगा समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ और संगठनात्मक क्षमता को कांग्रेस 2028 के चुनावी चेहरे के तौर पर भी देख रही है.
क्या है कांग्रेस का ‘कोर टीम फॉर्मूला’?
कांग्रेस इस बार ‘वन मैन शो’ की बजाय ‘कोर टीम मॉडल’ पर काम कर रही है. इसके तहत मुख्यमंत्री के साथ कई बड़े नेताओं को सत्ता में हिस्सेदारी देकर गुटबाजी रोकने की कोशिश होगी. माना जा रहा है कि सरकार में 3 से 4 डिप्टी CM बनाए जा सकते हैं, ताकि हर बड़े सामाजिक समीकरण को साधा जा सके.
डिप्टी CM की रेस में कौन-कौन?
दलित कोटे से डॉ. जी परमेश्वर या प्रियांक खड़गे का नाम चर्चा में है. दलित नेतृत्व को मजबूत संदेश देने के लिए कांग्रेस इन दोनों चेहरों में से किसी एक को बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. जी परमेश्वर संगठन और प्रशासन दोनों का अनुभव रखते हैं. जबकि प्रियांक खड़गे युवा और आक्रामक राजनीति का चेहरा माने जाते हैं.
OBC कोटे से एमबी पाटिल, ईश्वर खंड्रे और सिद्धा रमैया में से किसी को डिप्टी सीएम बनने का मौका मिलेगा. OBC समीकरण कांग्रेस के लिए बेहद अहम है. सिद्धारमैया के AHINDA वोटबैंक को बनाए रखने के लिए उनके खेमे को सत्ता में मजबूत हिस्सेदारी मिलने की संभावना है.
जबकि अल्पसंख्यक कोटे से केजे जॉर्ज, यूटी खादर और जमीर अहमद खान का नाम सुर्खियों में है. कांग्रेस मुस्लिम वोटबैंक को भी मजबूत संदेश देना चाहती है. यही वजह है कि अल्पसंख्यक समुदाय से भी एक बड़े चेहरे को डिप्टी CM या अहम मंत्रालय दिया जा सकता है.
महिला डिप्टी CM पर भी मंथन
कांग्रेस महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी बड़ा संदेश देना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी महिला कोटे से भी एक डिप्टी CM बना सकती है. महिलाओं से संभावित नामों में पंचमसाली लिंगायत समुदाय की मजबूत नेता लक्ष्मी हेब्बलकर, शहरी और युवा चेहरा सौम्या रेड्डी, मुस्लिम महिला प्रतिनिधित्व का बड़ा चेहरा कनीज फातिमा और दलित युवा नेतृत्व में नायना मोटम्मा का नाम चर्चा में है. महिला डिप्टी CM का फैसला जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर लिया जा सकता है.
किस समुदाय को सबसे ज्यादा तवज्जो?
नई सरकार में कांग्रेस का पूरा फोकस सोशल बैलेंस पर रहेगा. पार्टी नई सरकार में जिन समुदायों को खास प्रतिनिधित्व देना चाहती है, उनमें वोक्कालिगा AHINDA, दलित, लिंगायत, मुस्लिम और महिला प्रतिनिधित्व को.
सिद्धारमैया गुट को पूरी तरह किनारे करना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा. माना जा रहा है कि सरकार में डीके गुट को शीर्ष नियंत्रण मिलेगा. अहम मंत्रालयों में सिद्धारमैया समर्थकों को जगह दी जाएगी. संगठन और सरकार में अलग-अलग शक्ति केंद्र बनाए जाएंगे. दिल्ली हाईकमान सीधे मॉनिटरिंग की भूमिका में रहेगा. यानी नई सरकार में “एक CM, कई पावर सेंटर” वाला मॉडल दिखाई दे सकता है.
2028 चुनाव की तैयारी क्यों मानी जा रही नई कैबिनेट?
कांग्रेस जानती है कि अगर गुटबाजी बढ़ी तो 2028 से पहले सरकार कमजोर हो सकती है. इसलिए नई कैबिनेट को सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक मैनेजमेंट का मिश्रण बनाया जा रहा है. दक्षिण कर्नाटक, मुंबई-कर्नाटक और हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्रों के नेताओं को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है.
कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया को एक साथ साधने की है. पार्टी नहीं चाहती कि किसी एक गुट को पूरी तरह ताकत मिले. इसलिए डिप्टी CM फॉर्मूला और कोर टीम मॉडल को राजनीतिक संतुलन का सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है.




