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Dimagi Naxal मतलब क्या? PM मोदी के बयान के बाद क्यों मचा बवाल, FAQ में जानें हर सवाल का जवाब

‘दिमागी नक्सल’ कोई अलग कानूनी श्रेणी नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. इस FAQ में जानें इसका मतलब, BJP की व्याख्या, ‘अर्बन नक्सल’ से अंतर और क्या सिर्फ सरकार का विरोध करने वाला व्यक्ति दिमागी नक्सल कहलाता है.

Dimagi Naxal मतलब क्या? PM मोदी के बयान के बाद क्यों मचा बवाल, FAQ में जानें हर सवाल का जवाब
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी1 Mins Read

Updated on: 16 Aug 2026 8:56 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में 'दिमागी नक्सल' (Dimagi Naxal) शब्द के इस्तेमाल के बाद इस पर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है. सवाल उठ रहा है कि आखिर 'दिमागी नक्सल' किसे कहा जा रहा है और क्या यह कोई कानूनी शब्द है? दरअसल, 'दिमागी नक्सल' भारतीय कानून में परिभाषित कोई आधिकारिक श्रेणी नहीं है, बल्कि राजनीतिक बहस में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. ऐसे में इसे सीधे किसी पत्रकार, एक्टिविस्ट, छात्र, विपक्षी नेता या सरकार के आलोचक का पर्याय मानना सही नहीं होगा. किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई उसके वास्तविक कृत्य और लागू कानून के आधार पर ही हो सकती है. आइए इस स्टोरी में दिमागी नक्सल को लेकर सभी सवालों के जवाब जानते हैं...

'दिमागी नक्सल' कोई आधिकारिक कानूनी परिभाषा नहीं है. यह राजनीतिक भाषा में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, जिसका संबंध कथित तौर पर माओवादी या नक्सली विचारधारा के समर्थन से जोड़ा जाता है. हालांकि, इसका कोई तय कानूनी अर्थ नहीं है.

नहीं. भारतीय कानून में ‘दिमागी नक्सल’ नाम की कोई अलग कानूनी श्रेणी नहीं है. किसी व्यक्ति पर कार्रवाई उसके किसी विशिष्ट अपराध या प्रतिबंधित संगठन से संबंध के प्रमाण के आधार पर होती है. सिर्फ यह लेबल लग जाना अपराध नहीं है. अपराध तभी बनता है जब किसी व्यक्ति का कोई कृत्य संबंधित कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता हो.

सिर्फ सरकार की आलोचना करने के कारण नहीं. पत्रकार की रिपोर्टिंग या विचारों को ‘दिमागी नक्सल’ कहना अपने आप में कोई कानूनी निष्कर्ष नहीं है.

नहीं. लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना और नक्सली गतिविधियों का समर्थन करना अलग-अलग बातें हैं.

दोनों औपचारिक कानूनी श्रेणियां नहीं हैं. ‘अर्बन नक्सल’ शब्द पहले से राजनीतिक और सार्वजनिक बहस में इस्तेमाल होता रहा है, जबकि ‘दिमागी नक्सल’ उसी तरह के वैचारिक आरोप को व्यक्त करने वाला नया/प्रचलित राजनीतिक प्रयोग है.

क्योंकि यह शब्द काफी व्यापक तरीके से समझा जा सकता है. आलोचकों को आशंका है कि अस्पष्ट राजनीतिक लेबल का इस्तेमाल असहमति को बदनाम करने के लिए किया जा सकता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह उन लोगों के लिए है जो माओवादी विचारधारा या हिंसक आंदोलन का वैचारिक समर्थन करते हैं.

यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है. यदि इसे हिंसक माओवादी गतिविधियों के वैचारिक समर्थन के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाए तो बहस अलग है. लेकिन यदि हर आलोचक या असहमत व्यक्ति पर यह लेबल लगाया जाए, तो इससे लोकतांत्रिक असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठ सकते हैं.

यह शब्द अलग-अलग राजनीतिक बहसों में अलग संदर्भों में इस्तेमाल होता रहा है. इसलिए इसे किसी एक व्यक्ति या एक ही घटना से जोड़कर इसकी निश्चित शुरुआत बताना उचित नहीं होगा.

जरूरी नहीं. किसी व्यक्ति को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने मात्र से उसका CPI (Maoist) से संबंध साबित नहीं होता. संगठन से संबंध का दावा अलग प्रमाण मांगता है.

भाजपा के मुताबिक ‘दिमागी नक्सल’ उन लोगों या विचारों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो हिंसा, अराजकता और देश-विरोधी विचारधारा का समर्थन करते हैं, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर या बदनाम करते हैं और देश की एकता-अखंडता व सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।

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