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इंस्टाग्राम पर फोटो नहीं डाले तो रिश्ता नहीं है क्या... नाना पाटेकर के बेटे मल्हार ने बताया मां-पिता का रिश्ता, याद किया Nana का आखिरी समय

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने परिवार से जुड़ी कई अहम बातें साझा की हैं. उन्होंने माता-पिता के रिश्ते, उनके आखिरी पलों और मुश्किल समय में खुद को संभालने के बारे में बताया. मल्हार के मुताबिक, माता-पिता से मिले धैर्य और परिवार के प्यार ने उन्हें मजबूत बनाया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही बातों को भी गलत बताया.

इंस्टाग्राम पर फोटो नहीं डाले तो रिश्ता नहीं है क्या... नाना पाटेकर के बेटे मल्हार ने बताया मां-पिता का रिश्ता, याद किया Nana का आखिरी समय
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( Image Source:  Facebook: Malhar Patekar )

दिगग्ज एक्टर नाना पाटेकर का गोवा में 8 अक्तूबर को हार्ट अटैक आने के कारण निधन हो गया था. इस दुखद घटना से उबरने के बारे में बात करते हुए नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने उनके आखिरी पलों सो जुड़ी यादें शेयर की हैं. मल्हार कहते हैं कि उनके माता-पिता के धैर्य ने उन्हें इस कठिन दौर में मजबूत बने रहने में मदद की है.

'हिन्दुस्तान टाइम्स' से बात करते हुए उन्होंने बताया कि बचपन में उन्होंने अपने माता-पिता से सहनशीलता सीखी थी. उन्होंने यह भी बताया कि लोगों को बाहर जो भी दिक्कत है उससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता. एक परिवार के रूप में सभी लोग इमोशनली जुड़े हुए थे. उन्हें सबका प्यार मिला और यही उनके लिए मायने भी रखता है.

'जो वायरल हो रहा है वो गलत है'

मल्हार कहते हैं कि इतना सब कुछ जो वायरल हो रहा है वो गलत है. अगर हम इंस्टाग्राम पर फोटोज शेयर नहीं करते इसका मतलब ये नहीं है कि उनका रिश्ता खत्म हो गया है. अलग रहने के बाद भी उनके माता-पिता के बीच अच्छे संबंध थे. 38-39 साल का रिश्ता था. चीजे कभी वैसी नहीं होती जैसी दिखती हैं.

मल्हार कहते हैं उन्होंने जो पढ़ा, उसका जवाब ये है कि वो अकेले नहीं थे, कभी बीमार नहीं थे, परिवार के सभी लोग उनका साथ नहीं छोड़ते थे. कोई न कोई हमेशा उनके साथ रहता था. वो बहुत सक्रिय थे, जिम में ढाई घंटे एक्सरसाइज करते थे जो शायद एक युवा भी न कर सके. यंग लोग उन्हें देखकर हैरान होते थे उनका फिटनेस लेवेल ऐसा था.

किसी को परेशान नहीं करते थे नाना

मल्हार को अपने पिता नाना पाटेकर के निधन का दिन याद है और उन्होंने कहा, "नाना जी गोवा में थे, और मेरे चचेरे भाई प्रसाद, जो उनकी एंटरटेंटमेंट से जुड़ी सभी मीटिंग्स का ध्यान रखते थे, उन्हें उन्होंने मुंबई भेज दिया क्योंकि उन्हें एक ही दिन में माधुरी जी (दीक्षित) के साथ केबीसी मराठी की शूटिंग करनी थी; साथ ही, उनके दूसरे भाई, अमाय, उन्हें घर में ऊपर वाले कमरे में ठहराने के बाद ही निकले. नानाजी ऐसे व्यक्ति थे जो कभी किसी को परेशान नहीं करते थे.

उन्होंने नाना के अंतिम पलों को याद करते हुए कहा कि जब उन्हें बेचैनी महसूस हुई, तो उन्होंने सिर्फ उन्हें मैसेज किया और कुछ समय बाद ही उन्हें फोन किया. वे तुरंत पहुंच गए, लेकिन काफी देर हो चुकी थी. मुझे सुबह करीब 5 बजे पुणे में मेरी मां का फोन आया, उसके बाद क्या हुआ, कुछ याद ही नहीं, मुझे लगा जैसे मेरे आस-पास की दुनिया रूक गई हो.

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