Drishyam के इंस्पेक्टर गायतोंडे Kamlesh Sawant कौन, अमिताभ बच्चन की इस फिल्म से किया था डेब्यू, फिल्म के बाद आए थे ऐसे कॉल
दृश्यम’ फ्रेंचाइजी में लक्ष्मीकांत गायतोंडे का किरदार निभाकर कमलेश सावंत ने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई है. थिएटर से अभिनय की शुरुआत करने वाले कमलेश ने हिंदी और मराठी फिल्मों में कई यादगार भूमिकाएं निभाई हैं. ‘खाकी’ से बॉलीवुड में कदम रखने के बाद उन्होंने ‘दृश्यम’ में पुलिस अफसर की भूमिका से खूब सुर्खियां बटोरीं. अब वह ‘Drishyam: The Conclusion’ में नजर आएंगे.
Drishyam में इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत गायतोंडे तो आपको याद होंगे. यह रोल एक्टर कमलेश सावंत ने किया है. कमलेश का जन्म 12 जून 1974 को मुंबई में हुआ.कमलेश का बचपन मुंबई के लालबाग-काळाचौकी इलाके में बीता. चॉल में रहने के दौरान होने वाले पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वह मिमिक्री और कोली डांस किया करते थे. धीरे-धीरे दूसरे चॉल और बस्तियों में होने वाले कार्यक्रमों में भी परफॉर्म करने लगे. इन्हीं मंचों ने उनके अंदर लोगों के सामने एक्टिंग करने का कॉन्फीडेंस पैदा किया.
कमलेश के पिता तुकाराम सावंत रेलवे में नौकरी करते थे और सामाजिक कामों से भी जुड़े रहे. उन्होंने बेटे की अभिनय में दिलचस्पी को समझा और उन्हें थिएटर के गुरु विजय खानविलकर से मिलवाया. कमलेश ने 10वीं कक्षा के बाद विजय खानविलकर के मार्गदर्शन में थिएटर करना शुरू किया. साल 1989 में उन्होंने ‘हनम्याची मारी आई’ नाटक में काम किया. यह नाटक स्टेट लेवल कंपीटीशन मेंपहले स्थान पर रहा और राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली.
कमलेश 10वीं के बाद अपने गुरु के साथ थिएटर से जुड़ गए थे. इसलिए उनके करियर की असली ट्रेनिंग थिएटर और मंच से हुई. अभिनय के साथ-साथ उन्होंने अपने गुरु से यह भी सीखा कि कलाकार को अपनी क्षमता और सीमाओं को समझकर सही किरदार चुनना चाहिए.
‘खाकी’ से बॉलीवुड एंट्री, ‘दृश्यम’ से घर-घर पहचान
कमलेश सावंत ने हिंदी फिल्मों में साल 2004 की ‘खाकी’ से कदम रखा. फिल्म में उन्हें पुलिसकर्मी की भूमिका मिली और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने ‘दीवार’, ‘फैमिली’, ‘मुंबई मेरी जान’, ‘जेल’, ‘राइट या रॉन्ग’, ‘फोर्स’ और ‘भूतनाथ रिटर्न्स’ जैसी फिल्मों में काम किया. मराठी सिनेमा में भी वह लगातार सक्रिय रहे.
कमलेश को सबसे बड़ी पहचान 2015 की फिल्म ‘दृश्यम’ से मिली. इसमें उन्होंने सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत गायतोंडे का किरदार निभाया. निर्देशक निशिकांत कामत चाहते थे कि यह भूमिका कमलेश ही निभाएं. उस समय कमलेश टीवी शो ‘लक्ष्य’ में पुलिस अधिकारी का किरदार कर रहे थे, इसलिए फिल्म को लेकर कुछ दिक्कत थी. बाद में उन्होंने ऑडिशन दिया और उन्हें गायतोंडे की भूमिका मिल गई.
‘दृश्यम’ में उनका किरदार विजय सालगांवकर और उसके परिवार के पीछे सच्चाई पता करने में लगा रहता है. भूमिका इतनी असरदार रही कि दर्शक कई बार कमलेश को ही गायतोंडे समझने लगे. यहां तक कि उन्हें लोगों से फोन पर गालियां भी सुननी पड़ीं, क्योंकि दर्शक उनके किरदार से नाराज हो गए थे. कमलेश ने इसे अपने अभिनय के असर के तौर पर लिया.
इसके बाद वह ‘दृश्यम 2’ में भी गायतोंडे के किरदार में लौटे. अब ‘Drishyam: The Conclusion’ में भी वह इसी भूमिका को आगे बढ़ा रहे हैं. उनकी फिल्मोग्राफी में हिंदी और मराठी फिल्मों के साथ वेब सीरीज का काम भी शामिल है.
पत्नी बनीं पहली क्रिटिक, डांस और मिमिक्री का रहा शौक
कमलेश सावंत की निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी पत्नी का नाम सपना सावंत है. कमलेश ने इंटरव्यू में बताया है कि उनकी पत्नी उनके काम की पहली क्रिटिक हैं. ‘दृश्यम’ देखने के बाद भी उन्होंने सबसे पहले अपनी पत्नी से ही पूछा था कि उन्हें उनका काम कैसा लगा. उनकी बेटी भी है, जो ‘दृश्यम’ की शूटिंग के समय काफी छोटी थी.
कमलेश के शौक की बात करें तो बचपन से ही उन्हें मिमिक्री, डांस और स्टेज पर परफॉर्म करना पसंद था. खास तौर पर कोली डांस और सांस्कृतिक कार्यक्रम उनके शुरुआती अनुभवों का हिस्सा रहे. यही रुचि आगे चलकर उनके अभिनय करियर की नींव बनी. थिएटर से जुड़ने के बाद उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार किए, लेकिन पुलिस अधिकारी की भूमिकाएं उनके लुक और बॉडी लैंग्वेज के कारण बार-बार उनके पास आती रहीं.
कमलेश का मानना है कि कलाकार को खुद को लेकर बहुत ज्यादा घमंड नहीं करना चाहिए. उनके गुरु ने उन्हें सिखाया था कि मनोरंजन की दुनिया में आज काम है तो कल नहीं भी हो सकता, इसलिए हर काम ईमानदारी से करना चाहिए. यही सोच उनके लंबे करियर का अहम हिस्सा रही है. ‘खाकी’ के एक पुलिसकर्मी से लेकर ‘दृश्यम’ के गायतोंडे तक कमलेश सावंत ने साबित किया है कि मजबूत कैरेक्टर रोल भी अभिनेता को दर्शकों के बीच अलग पहचान दिला सकते हैं.




