LPG सिलेंडर संकट पहुंची फिल्म इंडस्ट्री तक, 18 फिल्मों की शूटिंग रुकने का खतरा; प्रोड्यूसर्स को 5 करोड़ का नुकसान
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर अब भारत में दिखने लगा है. LPG सिलेंडर की कमी के कारण केरल में चल रही करीब 18 फिल्मों की शूटिंग रुकने का खतरा पैदा हो गया है.
वैश्विक स्तर पर जब तनाव बढ़ता है, तो उसका असर तुरंत नहीं दिखता. लेकिन धीरे-धीरे यह रोज़मर्रा की ज़िंदगी को ऐसे-ऐसे तरीकों से प्रभावित करने लगता है, जिनके बारे में लोग सोच भी नहीं पाते. अभी मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष जिसमें अमेरिका, इज़राइल और ईरान जैसे बड़े देश शामिल हैं. अब भारत तक अपनी छाया डाल रहा है. ईरान ने कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता) को रोक दिया है. इस वजह से दुनिया भर में ईंधन की आपूर्ति में दिक्कत आने लगी है.
भारत में भी एलपीजी के सिलेंडर की भारी कमी हो गई है. पहले यह समस्या रेस्तरां, ढाबों और कैंटीनों तक सीमित थी, जहां खाना बनाना बंद होने लगा था. लेकिन अब यह समस्या फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंच गई है, खासकर केरल की मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में. केरल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (KFPA) ने हाल ही में चेतावनी दी है कि एलपीजी सिलेंडर न मिलने की वजह से राज्य में चल रही लगभग 18 फिल्मों की शूटिंग रुक सकती है. एसोसिएशन के अध्यक्ष बी. राकेश ने कहा है कि फिल्म सेट पर सैकड़ों लोगों के लिए रोज़ खाना बनाना पड़ता है, और इसके लिए लगातार गैस की ज़रूरत होती है.
किस तरह की आ रही है परेशानियां?
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उन्होंने बताया- हमारे पास अभी सिर्फ दो दिन का स्टॉक बचा है. अगर यह कमी और बढ़ी, तो शूटिंग जारी रखना बहुत मुश्किल हो जाएगा. अगर शूटिंग बीच में रुक गई, तो निर्माताओं को भारी नुकसान होगा. एसोसिएशन का अनुमान है कि इन 18 फिल्मों के प्रोड्यूसर्स को कुल मिलाकर करीब 5 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. शूटिंग रोकना आसान नहीं होता. एक्टर, तकनीशियन, कैमरा क्रू, लाइटिंग वाले और दूसरे स्टाफ सबको एक साथ रखना पड़ता है. अगर बीच में ब्रेक पड़ जाए, तो बाद में शेड्यूल दोबारा बनाना, लोकेशन बुक करना, उपकरण इकट्ठा करना ये सब बहुत मुश्किल और महंगा हो जाता है.
सेट पर कितने एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल होता है?
फिल्म सेट पर खाना बनाना एक बहुत बड़ी ज़रूरत है. एक सामान्य फिल्म लोकेशन पर रोज़ाना 5 तक एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं, क्योंकि सुबह जल्दी से लेकर शाम तक क्रू के लिए नाश्ता, लंच, स्नैक्स और डिनर सब बनाना पड़ता है. प्रोडक्शन कंट्रोलर सिद्धू पनाक्कल ने बताया कि केरल फिल्म क्रू के लिए एक स्टैंडर्ड टाइम टेबल होता है. खाना बनाना सुबह 3 बजे के आसपास शुरू हो जाता है, ताकि नाश्ता सुबह 7:30 बजे तक तैयार हो जाए. बिना गैस के यह सब संभव नहीं होता. कुछ प्रोडक्शन टीमों ने अब वैकल्पिक तरीके ढूंढने शुरू कर दिए हैं. जैसे लकड़ी पर खाना बनाना या इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव का इस्तेमाल करना. लेकिन ये विकल्प हमेशा आसान या सस्ते नहीं होते.
अन्य इंडस्ट्री भी आएगी चपेट में
थोडुपुझा और कोच्चि में फिल्म सेटों पर खान-पान का काम करने वाले मोहन ने बताया कि यह समस्या सिर्फ मलयालम फिल्मों तक नहीं रुकी है. यहां शूट हो रही एक हिंदी फिल्म और एडाकोच्चि में चल रही एक तमिल फिल्म की यूनिट को भी गैस सिलेंडर मिलने में बड़ी मुश्किल हो रही है. अगर यह संकट लंबा चला, तो असर सिर्फ केरल और दक्षिण भारत तक नहीं रहेगा. भारत में हर साल 2000 से ज्यादा फिल्में बनती हैं. अगर एलपीजी की कमी बनी रही, तो पूरे फिल्म इंडस्ट्री में शूटिंग शेड्यूल बिगड़ सकते हैं, लागत बढ़ सकती है और कई प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं.
क्या खाते है क्रू
फिल्म सेट पर भोजन का बहुत महत्व होता है. क्रू को अच्छा और समय पर खाना मिलना ज़रूरी है, ताकि वे थकान महसूस न करें और काम अच्छे से कर सकें. पिछले साल एक रिपोर्ट में फिल्म 'बियॉन्ड द क्लाउड्स' के कैटरर रोहित यादव ने बताया था कि सेट पर आमतौर पर क्या-क्या परोसा जाता है सादा चावल, खिचड़ी, दही, आलू गोभी, बटर चिकन, फ्रूट कस्टर्ड, सलाद, चपाती, पापड़ आदि. यह सब बनाना आसान नहीं होता, और इसके लिए गैस बहुत ज़रूरी है.




