कॉलोनी के लोगों ने फेर लिया था मुंह, सलाम तक का नहीं देते थे जवाब, Farhana Bhatt ने खोले कौन-कौन से राज, ऐसी रही है स्ट्रगल
मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा तो फरहाना भट्ट को अपनी ही कॉलोनी में लोगों की बेरुखी झेलनी पड़ी. हालात ऐसे थे कि लोग उनके सलाम का जवाब तक नहीं देते थे. बिग बॉस और खतरों के खिलाड़ी से पहचान बनाने वाली फरहाना ने हालिया इंटरव्यू में बचपन की बंदिशों, परिवार की आर्थिक तंगी और अपने संघर्षों से जुड़े कई खुलासे किए.
बिग बॉस और खतरों के खिलाड़ी जैसे रियलिटी शो में अपनी पहचान बना चुकीं एक्ट्रेस फरहाना भट्ट ने अपनी जिंदगी के कई अनसुने किस्से साझा किए हैं. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने मॉडलिंग और दूसरी चीजें शुरू कीं तो उनकी पूरी कॉलोनी उनसे नफरत करने लगी थी. लोग उनके सलाम का जवाब तक नहीं देते थे. यह दौर करीब 4-5 साल पहले का था. हालांकि, फरहाना ने लोगों के इस व्यवहार से हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने की राह पर आगे बढ़ती रहीं.
फरहाना भट्ट ने हाल ही में हॉटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में अपने बचपन, परिवार और संघर्षों के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि उन्हें हमेशा से अपने आत्मविश्वास पर भरोसा रहा है. उनके मुताबिक, उनके कॉन्फिडेंस से सिर्फ उन्हीं लोगों को परेशानी होती है, जो खुद अंदर से आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को यह बात पसंद नहीं आती कि कोई लड़की उनके सामने अपनी बात कैसे रख सकती है.
बचपन से ही परिवार और समाज की बंदिशें देखीं
फरहाना ने बताया कि वह बचपन से ही ऐसी रही हैं. उन्होंने प्यार की कमी और कई तरह के विवादों का सामना किया. एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें अपना ध्यान खुद रखना पड़ता था. बचपन से ही उन्हें सिखाया जाता था कि कैसे बैठना है, किससे कैसे बात करनी है और कब चुप रहना है. फरहाना का सवाल है कि क्या कभी लड़कों को भी इस तरह की बातें सिखाई जाती हैं?
उन्होंने बताया कि उनकी दो सौतेली बहनें हैं, जो उनके पिता की पहली पत्नी से हैं. लंबे समय तक वह अपनी बहनों को जानती तक नहीं थीं. उनके आसपास का माहौल भी ऐसा था, जहां लोगों की सोच थी कि लड़कियों को मौके और हालात के हिसाब से व्यवहार करना चाहिए.
मॉडलिंग शुरू की तो लोगों ने कर लिया था किनारा
फरहाना के मुताबिक, जब उन्होंने मॉडलिंग और अपने करियर की शुरुआत की तो कॉलोनी के लोगों ने उनसे दूरी बना ली. लोग उनके सलाम का जवाब तक नहीं देते थे. हालांकि, फरहाना को इन बातों से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. उन्हें हमेशा विश्वास था कि एक दिन वह अपनी पहचान बनाएंगी और लोगों की सोच को बदलकर दिखाएंगी.
उन्होंने कहा कि आज उन्हें अपने काम के जरिए जवाब मिल गया है. फरहाना के मुताबिक, लोग अक्सर कहते हैं कि चढ़ते सूरज को हर कोई सलाम करता है. उनके करियर में लैला मजनू और नोटबुक जैसी फिल्मों का भी अहम योगदान रहा.
मां के साथ परिवार ने भी देखे मुश्किल दिन
फरहाना ने अपनी जिंदगी के आर्थिक संघर्षों के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब उनकी मां अकेले उनकी परवरिश कर रही थीं और काफी समय से कमाई नहीं हो रही थी. ऐसे में उनके नाना-नानी के खर्च और घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक रिश्तेदार आर्थिक मदद करता था. फरहाना और उनकी मां इसी मदद के सहारे अपना जीवन चला रहे थे.
उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार में एविएशन इंडस्ट्री में काम करने वाले कजिन्स को भी काम करने की इजाजत नहीं दी गई थी. फरहाना ने जिंदगी में कई तरह की बंदिशें और मुश्किलें देखीं, लेकिन उन्हें हमेशा भरोसा था कि एक दिन वह इस दायरे से बाहर निकलेंगी. उन्हें यह नहीं पता था कि ऐसा कब होगा, लेकिन वह जानती थीं कि उन्हें अपनी पहचान खुद बनानी है.




