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क्या खास है रवि वर्मा की 136 साल पुरानी पेंटिंग में? Cyrus S. Poonawalla ने खरीदकर तोड़ा एम.एफ. हुसैन का रिकॉर्ड

साइरस पूनावाला ने राजा रवि वर्मा की ऐतिहासिक पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ को 67.2 करोड़ में खरीदकर नया रिकॉर्ड बनाया. यह सौदा भारतीय कला और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करता है.

Yashoda Krishna Painting
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Yashoda Krishna Painting
( Image Source:  X: @CliosChronicles )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Published on: 2 April 2026 2:46 PM

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मालिक और वैक्सीन निर्माता साइरस पूनावाला (Cyrus S. Poonawalla) ने हाल ही में राजा रवि वर्मा की बहुत प्रसिद्ध पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ को 67.2 करोड़ रुपये में खरीदा है. यह कीमत किसी भी भारतीय कला के काम के लिए अब तक की सबसे ऊंची कीमत है. इस पेंटिंग की नीलामी सैफ्रनआर्ट (Saffronart) नाम की नीलामी कंपनी के जरिए हुई थी, जिसमें यह लगभग 8 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 67.2 करोड़ रुपये) में बिकी. इस रिकॉर्ड-तोड़ खरीदारी ने पूनावाला को आधुनिक भारतीय कला का सबसे महंगा कलेक्टर बना दिया है.

इससे पहले भारतीय कला की सबसे महंगी पेंटिंग एम.एफ. हुसैन की 'Untitled (Gram Yatra)' थी, जिसे पिछले साल दिल्ली की कला संग्राहक किरण नाडर ने 18 करोड़ रुपये से ज्यादा में खरीदा था. साइरस पूनावाला की यह खरीदारी उस रिकॉर्ड को भी आसानी से तोड़ गई. पूनावाला ने इस खरीद को बहुत सौभाग्य की बात और साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी भी बताया है. उन्होंने कहा कि यह पेंटिंग सिर्फ उनकी निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय खजाना है. इसलिए समय-समय पर इसे आम लोगों के लिए भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा भारतीय इस सुंदर कला को देख सकें.

राजा रवि वर्मा कौन थे?

राजा रवि वर्मा का जन्म 1848 में त्रावणकोर रियासत (आज का केरल) के एक उच्च कुलीन परिवार में हुआ था. वे भारतीय कला के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण कलाकार माने जाते हैं. उन्होंने यूरोपीय पेंटिंग की तकनीक को भारतीय भावनाओं और कहानियों के साथ खूबसूरती से जोड़ा. उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने सिर्फ अमीर लोगों के लिए महंगी पेंटिंग्स नहीं बनाईं. 1894 में उन्होंने एक लिथोग्राफिक प्रेस (छपाई की मशीन) शुरू की. इससे उनकी पेंटिंग्स की सस्ती प्रिंट्स (कॉपी) बड़े पैमाने पर बनाई जाने लगीं. इससे क्या हुआ? पहली बार हिंदू देवी-देवताओं की खूबसूरत तस्वीरें आम भारतीयों के घरों तक पहुंचीं. गरीब- अमीर हर कोई इन प्रिंट्स को खरीदकर अपने घर की दीवारों पर लगा सकता था. आज भी लाखों-करोड़ों भारतीय राम, कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा आदि देवी-देवताओं की जो छवि अपने मन में रखते हैं, वह ज्यादातर राजा रवि वर्मा की बनाई हुई तस्वीरों से ही आती है. उन्होंने देवी-देवताओं को इतना जीवंत और सुंदर रूप दिया कि वह आज भी लोगों के दिलों में बस गए हैं.

'यशोदा और कृष्ण' पेंटिंग के बारे में

यह पेंटिंग 1890 के दशक में बनाई गई थी, जब राजा रवि वर्मा अपनी आर्ट करियर के पीक पर थे. इस पेंटिंग में भगवान कृष्ण के बचपन का एक बहुत प्यारा और कोमल दृश्य दिखाया गया है. माता यशोदा अपने लाडले बाल कृष्ण को गोद में लिए हुए हैं. इस पेंटिंग के जरिए कलाकार ने मातृत्व के प्यार को बहुत गहराई और कोमलता के साथ दर्शाया है. यशोदा और कृष्ण के बीच का ममता भरा रिश्ता देखकर कोई भी मां-बेटे के प्यार को महसूस कर सकता है.

नीलामी रेट 80 से 120 करोड़

नीलामी से पहले इस पेंटिंग की अनुमानित कीमत 80 से 120 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही थी, लेकिन यह 67.2 करोड़ रुपये में ही बिक गई. साइरस पूनावाला की यह खरीदारी न सिर्फ कला की दुनिया में एक नया रिकॉर्ड है, बल्कि यह दिखाती है कि भारतीय विरासत और संस्कृति से जुड़ी कलाकृतियों को संरक्षित करने और उन्हें सम्मान देने की कितनी बड़ी जरूरत है. यह पेंटिंग अब न सिर्फ एक महंगे कला के टुकड़े की तरह है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, मातृत्व, भक्ति और कला का एक शानदार प्रतीक बन गई है.

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