ट्रंप की इस गलती से शुरु हो जाएगा युद्ध! ईरान और अमेरिका जंग के कितने करीब, अब तक कितना पहुंचा मौत का आंकड़ा?
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर दमन में अब तक 3,117 मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वास्तविक संख्या 5,000 से अधिक हो सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा “आर्माडा” भेजने की चेतावनी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है, जिससे संभावित सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है.;
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह कहे जाने के ठीक एक दिन बाद कि अमेरिका की एक “बड़ी सैन्य ताकत” युद्धपोतों के साथ मध्य पूर्व की ओर बढ़ रही है, तेहरान ने खुली चेतावनी दे दी है.
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिका ने तेहरान पर किसी भी तरह का हमला किया- चाहे वह सीमित हो या सर्जिकल- तो ईरान उसे सीधे तौर पर “हमारे खिलाफ पूरी जंग” मानेगा और उसका सबसे कठोर जवाब देगा.
'किसी भी हमले को ऑल-आउट वॉर माना जाएगा'
रॉयटर्स से बातचीत में ईरानी अधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि 'इस बार किसी भी तरह के हमले- चाहे वह सीमित हो, असीमित हो, सर्जिकल हो या काइनेटिक को हम अपने खिलाफ पूरी जंग मानेंगे और इसका सबसे कठोर जवाब देंगे.' उन्होंने साफ किया कि अमेरिका की ओर से लगातार सैन्य दबाव और धमकियों के बीच ईरान अपने पास मौजूद हर संसाधन का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है.
ट्रंप का एलान और अमेरिकी ‘आर्माडा’
यह सख्त बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों का एक “आर्माडा” ईरान की ओर भेजा जा रहा है. यह बयान उस वक्त आया, जब कुछ दिन पहले ही ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकियों से पीछे हटते नजर आए थे. ईरान में नए साल की शुरुआत से ही सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक होते गए हैं. एक्टिविस्ट्स के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक 5,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
अमेरिकी युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन, टॉमहॉक मिसाइलों से लैस तीन डिस्ट्रॉयर और अमेरिकी वायुसेना के एक दर्जन F-15E लड़ाकू विमान मध्य पूर्व की ओर भेजे जा चुके हैं, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं.
ईरान हाई अलर्ट पर
ईरानी अधिकारी ने बताया कि पूरा देश हाई अलर्ट पर है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि संभावित जवाबी कार्रवाई किस तरह की हो सकती है. उन्होंने कहा कि 'इस सैन्य जमावड़े को लेकर हमें उम्मीद है कि इसका मकसद वास्तविक टकराव नहीं होगा। लेकिन हमारी सेना सबसे खराब हालात के लिए पूरी तरह तैयार है। यही वजह है कि ईरान में हर स्तर पर हाई अलर्ट है.'
'हर संसाधन का इस्तेमाल करेंगे'
ईरानी अधिकारी ने आगे कहा कि 'अमेरिका से लगातार सैन्य खतरे का सामना कर रहे किसी भी देश के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं होता कि वह अपने पास मौजूद हर संसाधन का इस्तेमाल करे, ताकि ईरान पर हमला करने की हिम्मत करने वाले किसी भी पक्ष को करारा जवाब देकर संतुलन बहाल किया जा सके.' उनका कहना था कि अमेरिका की लगातार सैन्य धमकियों के चलते ईरान को हर स्तर पर तैयार रहना पड़ रहा है.
कुछ दिन पहले घटा था तनाव
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कुछ कम होता नजर आया था. ट्रंप ने तब सैन्य धमकियों से पीछे हटते हुए कहा था कि तेहरान की ओर से यह भरोसा मिलने के बाद कदम उठाया गया कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं दी जाएगी. ट्रंप ने दावा किया था कि उनकी चेतावनियों के चलते ईरान ने 800 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को फांसी देने से रोक दिया.
IRGC और सेना की कड़ी चेतावनी
हालिया बयानबाजी में ईरान भी पीछे नहीं है. ईरानी सशस्त्र बलों के एक प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि अगर सर्वोच्च नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो वे “दुनिया को आग में झोंक देंगे”. वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर ने अमेरिका और इजरायल को चेताते हुए कहा कि उनकी सेना की “उंगली ट्रिगर पर है”. ट्रंप की दावोस यात्रा के बाद हालात शांत होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अब एक बार फिर सैन्य तैनाती और तीखे बयानों ने संकेत दे दिया है कि मध्य पूर्व एक नए बड़े टकराव की ओर बढ़ सकता है.
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 3,117 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 2,427 नागरिक और सुरक्षा बल शामिल हैं, जबकि 690 को “आतंकवादी” बताया गया है. यह आंकड़ा ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को जारी किया. हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि वास्तविक मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है. एक्टिविस्ट्स के अनुसार, पूरे देश में विरोध प्रदर्शन पर दमन के कारण कम से कम 5,002 लोग मारे जा चुके हैं. इंटरनेट ब्लैकआउट और मीडिया पर नियंत्रण के कारण जानकारी का प्रवाह सीमित है. इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्य पूर्व भेजे जा रहे युद्धपोत समूह को “आर्माडा” कहा गया, जिससे सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है.