आर्मी चीफ तो कभी खुद की सरकार का उड़ाया मजाक, कौन हैं पाक स्पीकर अयाज सादिक? हैंडशेक को लेकर बोले- जयशंकर खुद आए

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 31 दिसंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक की मुलाकात और हैंडशेक ने नई बहस छेड़ दी है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह भारत–पाकिस्तान के बड़े नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात थी. पाकिस्तानी स्पीकर के दावों, उनके पुराने विवादित बयानों और भारत सरकार की चुप्पी के बीच सोशल मीडिया पर ‘दोहरे मापदंड’ को लेकर सवाल उठ रहे हैं. खासकर क्रिकेटरों और नेताओं के व्यवहार की तुलना को लेकर.;

( Image Source:  X/ChiefAdviserGoB )
Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On :

31 दिसंबर को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी. विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक की हैंडशेक करती तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई, जब दोनों देशों के रिश्ते ऑपरेशन सिंदूर के बाद बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं.

अब इस मुलाकात को लेकर अयाज सादिक का बयान सामने आया है. एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि जयशंकर खुद चलकर उनके पास आए, मुस्कुराते हुए नमस्ते कहा और हाथ मिलाया. सादिक के मुताबिक, जब वह अपना परिचय देने वाले थे, तो जयशंकर ने कहा, “मैं जानता हूं कि आप कौन हैं, परिचय की जरूरत नहीं.”

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वह जानते थे क्या कर रहे हैं

अयाज सादिक ने इस मुलाकात को पूरी तरह सोचा-समझा कूटनीतिक कदम बताया. उनके अनुसार, जयशंकर उस कमरे में पहले नेपाल, भूटान और मालदीव के प्रतिनिधियों से मिले और उसके बाद सीधे उनके पास आए. सादिक का कहना था कि जयशंकर के चेहरे पर मुस्कान थी और वह पूरी तरह जानते थे कि वह क्या कर रहे हैं और किससे मिल रहे हैं.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार मुलाकात

यह मुलाकात बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम विदाई कार्यक्रम के दौरान हुई. मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला मौका था, जब भारत और पाकिस्तान के इतने बड़े नेता सार्वजनिक रूप से आमने-सामने आए और हाथ मिलाया. भारत सरकार ने हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.

कौन हैं अयाज सादिक?

अयाज सादिक पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी PML-N के वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर हैं. वे इससे पहले कई बार सांसद रह चुके हैं और नवाज़ शरीफ के करीबी माने जाते हैं. भारत में उनकी पहचान खासतौर पर उस वक्त बनी, जब उन्होंने भारतीय वायुसेना के पायलट कैप्टन अभिनंदन की रिहाई से जुड़े घटनाक्रम पर संसद में बेहद विवादास्पद बयान दिया था.

कब-कब दिए बयान?

  • कैप्टन अभिनंदन केस: संसद में दावा किया कि भारत के हमले के डर से पाकिस्तान की लीडरशिप घबराई हुई थी
  • जनरल बाजवा पर टिप्पणी: कहा कि तत्कालीन आर्मी चीफ के “पैर कांप रहे थे और माथे पर पसीना था”
  • ‘रात 9 बजे हमला’ बयान: दावा किया कि भारत ने समय तय कर दिया था, जिससे पाकिस्तान में हड़कंप मच गया
  • बाद में सफाई: विवाद बढ़ने पर कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया

इन बयानों को पाकिस्तान में सेना और राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया था.

भारत के लिए तस्वीर क्यों संवेदनशील बनी?

भारत में इस मुलाकात को इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि बीते महीनों में कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधि आमने-सामने आए, लेकिन उन्होंने न बातचीत की और न ही औपचारिक शिष्टाचार निभाया. ऐसे में जयशंकर–सादिक हैंडशेक को एक “कूटनीतिक संकेत” के तौर पर देखा जा रहा है, भले ही यह अनौपचारिक मुलाकात ही क्यों न हो.

दोहरा मापदंड क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है? एक तरफ क्रिकेट मैचों में भारतीय खिलाड़ियों को पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने तक से रोका जाता है, दूसरी तरफ नेता खुद “दुश्मन देश” के प्रतिनिधियों से मुस्कुराकर हाथ मिलाते नजर आते हैं. सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि अगर राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है, तो यह नियम खिलाड़ियों पर ही क्यों लागू होते हैं? या फिर कूटनीति के नाम पर नेताओं के लिए अलग मानक तय हैं?

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