EXCLUSIVE: नाजुक नेपाल-खामोश बांग्लादेश पर चतुर चीन और ‘नापाक’ पाकिस्तान की नजर, संभल कर बढ़े भारत वरना....
नेपाल और बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद बनी नई सरकारों के बीच चीन और पाकिस्तान अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं, जबकि अमेरिका की नजर भी इन देशों पर बनी हुई है. बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के लिए जरूरी है कि वह सतर्क रहते हुए अपनी सीमाओं और कूटनीतिक संतुलन को मजबूती से संभाले.
बीते कई महीनों से भारत के पड़ोसी नेपाल और बांग्लादेश दोनों ही अपने अपने झंझटों की आग में बुरी तरह झुलस रहे हैं. अब कई महीनों की खूनी-अशांति के बाद दोनो पड़ोसी देशों में नई सरकारों का गठन हो चुका है. बांग्लादेश और नेपाल की नव-निर्वाचित हुकूमतें अब तक आग में झुलसे पड़े अपने देश को पटरी पर लाने की कोशिशों में जुटी हैं.
बेशक भारत को हमेशा पड़ोसी चीन और पाकिस्तान से खतरा बना रहता है. क्योंकि यह दोनो ही देश दोगले हैं. चीन भारत के कब्जे वाले अरुणाचल पर नजर गड़ाए है. तो नापाक पाकिस्तान की नजर में कश्मीर हमेशा नाकाबिल-ए-बर्दाश्त जलन मचाए रहता है. अब जब पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में ईरान-इजराइल के चलते जियोपॉलिटिक्स की नजर से जबरदस्त बदलाव सामने दिखाई दे रहे हैं, उनमें भारत यह चिंता छोड़ दे कि अमेरिका भारत की ओर कभी मैली नजर से देखने की जुर्रत करेगा.
भारत के पड़ोसियों पर अमेरिकी नजर क्यों?
जहां तक सवाल अमेरिका का है कि वह अक्सर पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल (तीनो ही भारत के पड़ोसी) को डॉलर के डेहले या कहिए कि रोटियों के टुकड़े फेंकता रहता है. इससे भारत के यह तीनो पड़ोसी देश एक इशारे पर अमेरिका की गोद में जा बैठेंगे. नहीं ऐसा कतई नहीं होगा. न आज न आइंदा ऐसा संभव होगा. क्योंकि नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश के ऊपर हमेशा चतुर चीन जोकि भारत का दोस्त कम दुश्मन ज्यादा है, की भी चोर-नजरें लगी रहती हैं.
भारत को तब क्यों कुछ नहीं करना?
भविष्य में अगर कभी जाने-अनजाने अमेरिका ने सबसे बड़ी भूल के रूप में और खुद को दुनिया का दादा बनाने की सनक में नेपाल बांग्लादेश, भूटान या पाकिस्तान में पांव रखने की कोशिश भी की. तो उस हालात से निपटने के लिए भारत को कुछ नहीं करना है. भारत तो सिर्फ अपनी हदों को मजबूत रखे. चीन पाकिस्तान बांग्लादेश भूटान नेपाल, म्यांमार से जुड़ती अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की हिफाजत भारत को हमेशा करनी है. अमेरिका से तो चीन अकेला ही रुस के साथ या फिर खुद अकेला ही निपट लेगा.”
भारत, चीन से चौकन्ना क्यों रहे?
हां, इतना जरूर है कि चीन भारत के साथ बीते कई दशक से जिस तरह के रिश्ते रख रहा है. मुंह पर कुछ और जबकि पीठ पीछे कुछ और. भारत को चीन के इस दो-मुहे रवैये पर बहुत पैनी नजर रखनी होगी. और चीन अगर भारत को सोने-चांदी से तौल देने का भी इशारा करे, तो भारत को चतुर चीन के किसी भी भ्रमजाल या मकड़जाल में नहीं फंसना है. क्योंकि चीन और पाकिस्तान की फितरत हमेशा से ही विश्वासघात और पीछे से वार करने की रही है.
दुनिया खतरनाक मुकाम पर क्यों
वैश्विक, सामरिक, सैन्य रक्षा और जियोपॉलिटिक्स की नजर से दुनिया इस वक्त बहुत खतरनाक मुकाम पर आ खड़ी हुई है. रुस बीते चार साल से यूक्रेन के संग युद्ध में जूझ रहा है. अमेरिका को जब-जब अपना डॉलर और दादागिरी दुनिया में कमजोर या बीमार होते नजर आती हैं, तब-तब वहां के डोनाल्ड ट्रंप जैसे कम-अक्ल राष्ट्रपति कभी वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उनके महल से मय पत्नी सोते हुए आधी रात को अपहरण करवा लेते हैं. या फिर वे ईरान और इजराइल जैसे पहले के दुश्मन देशों को आपस में भिड़ाकर खुद को मजबूत करने लगते हैं.
ट्रंप के एक तरफ खाई-दूसरी ओर कुंआं क्यों?
हालांकि इस बार इजराइल को ईरान से भिड़ाकर अमेरिका और उसके अजीब व खुद में बेहद उलझी हुई फितरत वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह बेवकूफी इस बार उन्हें और उनके देश अमेरिका दोनो को ही बहुत भारी पड़ रही है. चंद दिन में जिस ईरान को तबाह इजराइल के हाथों तबाह-कमजोर करवा डालने के मंसूबे पालकर ट्रंप ने इस बार इजराइल को ईरान से भिड़ाया था. उस जंग ने तो अब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मसूड़ों से ही खून ला दिया है.
ईरान ने कैसे मचाई तबाही?
जैसे ही आसमान से लेकर समुद्र तक ईरान ने इजराइल और अमेरिका को घेरा, इस जंग में शामिल अमेरिकी फौजियों को मारकर ताबूतों में उनकी लाशें भेजना शुरू किया. वैसे ही अमेरिका के कई राज्यों के अपने ही लोग विरोध में ट्रंप के ऊपर टूट पड़े. अपने घर में घिरे ट्रंप, पहले ही खुद को और इजराइल को ईरान की मार से महफूज नहीं रख पा रहे थे. इस बार चौतरफा घिरे ट्रंप आएदिन अपने आप ही जब सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर इजराइल ईरान जंग रुकने का राग अलापना शुरू कर देते.
तब-तब जवाब में ईरान रुकने के बजाए ट्रंप से कहता कि नहीं अभी जंग रुकी नहीं है. जंग जारी है. इस जंग को शुरु तुमने (अमेरिका-इजराइल) ने किया है. जंग को खत्म करने का फैसला हम करेंगे. मतलब, साफ है कि ईरान को इजराइल से भिड़ाकर कमजोर करने चले डोनाल्ड ट्रंप को तो अब अपनी ही गर्दन सुरक्षित रखने की जद्दोजहद से जूझना पड़ रहा है.
अमेरिका जल्दी क्यों नहीं भिड़ेगा?
इजराइल के साथ ईरान ने युद्ध में जिस कदर ट्रंप की मैली मंशा की जबरदस्त धुनाई की है. उससे साफ है कि अमेरिका आइंदा जल्दी कभी भी अपनी फौज अब ईरान जैसे मजबूत और दृढ़ संकल्पित किसी देश में तो भेजने की हिम्मत नहीं करेंगे. वैसे एक प्रबल आशंका यह भी है कि पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में ट्रंप के चलते मचे इस खूनी कोहराम के बाद, अक्टूबर नवंबर 2026 में अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव में ही ट्रंप को कहीं अमेरिका की जनता ‘बेदम’ न कर डाले.
चीन-पाक की नजरें किधर लगीं हैं?
दुनिया के इन बदलते हालातों के मद्देनजर फिलहाल तो भारत के परिप्रेक्ष्य में इतना ही कहना सही है कि, चीन भले ही अरुणाचल की ओर और पाकिस्तान कश्मीर की ओर कातर नजरों से क्यों न घूरता रहे. जब अमेरिका भविष्य में कभी नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान की ओर घूरघर देखने की कोशिश करेगा, तो यह चीन को कतई बर्दाश्त नहीं होगा. मतलब, अमेरिका को उल्टे पांव दौड़ाने के लिए चीन ही काफी है.
भारत को किस बात की दरकार?
भारत को तो सिर्फ जरूरत है तो चीन, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश पर पैनी नजर रखने की. नेपाल और बांग्लादेश में बदली हुई सरकारों के साथ सकारात्मक तरीके बेहद सोच-विचार के साथ आगे बढ़ने की जरूरती है भारत को. अमेरिका के लिए तो चीन अकेला ही काफी है. भारत सिर्फ खुद को चीन को टक्कर देने की नजर से तैयार रखे-करे.