'सोना नहीं तो शादी नहीं?' प्रसिद्ध अर्धशास्त्री शरद कोहली के इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक बहस छेड़ दी है. शरद ने कहा कि शादी का आधार सिर्फ सोना, गहने या आर्थिक लेन-देन नहीं होना चाहिए. उन्होंने रिश्तों को भरोसे, समझ और सम्मान पर टिके बंधन के रूप में देखा और कहा कि शादी को 'सोने की शर्त' से जोड़ना सामाजिक सोच की समस्या है.इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं. एक वर्ग इसे दहेज प्रथा और दिखावे की संस्कृति पर सीधा प्रहार मान रहा है, तो दूसरा वर्ग इसे परंपराओं पर टिप्पणी के रूप में देख रहा है.