देश की राजनीति जब हिंदू-मुसलमान की ध्रुवीकरण वाली बहसों में उलझी हुई है, ऐसे समय में स्टेट मिरर हिंदी का यह पॉडकास्ट एक ज़रूरी और सुकून देने वाला सवाल उठाता है- क्या आस्था की असली पहचान धर्म है या इंसानियत? इस खास कड़ी में मोहम्मद फैज अली खान की कहानी सामने आती है, जो खुद को किसी एक धार्मिक खांचे में सीमित नहीं मानते. उनके लिए अल्लाह और महादेव अलग नहीं, बल्कि एक ही सत्य के दो नाम हैं. गौ-रक्षा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाने वाले फैज अली खान गीता और रामायण के श्लोक उतनी ही सहजता से पढ़ते हैं, जितनी कुरान की आयतें. उनकी सोच इतनी व्यापक है कि मक्का में उन्हें शिव दिखाई देते हैं और शिवालय में काबा. यही समन्वय और आध्यात्मिक दृष्टि उन्हें हिंदू-मुसलमान के बीच एक मजबूत ‘पुल’ बनाती है. स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर क्राइम इनवेस्टिगेशन संजीव चौहान के द्वारा लिए दए इस पॉडकास्ट में न सिर्फ धार्मिक सहिष्णुता, बल्कि भाईचारे, करुणा और साझा मानव मूल्यों की सच्ची तस्वीर उभरकर सामने आती है। यह कड़ी नफरत और विभाजन के दौर में मोहब्बत, विश्वास और इंसानियत की आवाज़ बनकर सामने आती है.