बीजेपी सांसद और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने इस बातचीत में अपने बचपन, गांव अतरवलिया, काशी और संघर्ष भरे दिनों की यादें साझा कीं. उन्होंने बताया कि कैसे बिना बिजली वाले गांव से निकलकर बनारस पहुंचे, पढ़ाई के साथ छोटे-मोटे काम किए और संगीत से जुड़ते गए. पिता से मिली सरगम और संस्कारों को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताया. मनोज तिवारी ने कहा कि गांव की मिट्टी की खुशबू आज भी उन्हें खींच लाती है और वही जड़ें उन्हें जमीन से जोड़े रखती हैं. यह बातचीत उनके संघर्ष, संवेदना और सफलता की पूरी कहानी बयान करती है.