साल 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई मायनों में अहम रहा. देश में सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी ने निवेश के पारंपरिक विकल्पों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. क्या 2026 में भी कीमती धातुओं की यह चकाचौंध जारी रहेगी और क्या इसकी वजह से बैंक एफडी व शेयर बाजार की चमक फीकी पड़ जाएगी? वहीं 50 फीसदी टैरिफ के बावजूद भारत की आर्थिक रफ्तार को रोकने में नाकाम रहे अमेरिका की वैश्विक स्थिति 2026 में कैसी होगी? इन्हीं मुद्दों पर स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान ने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली से विशेष बातचीत की.