दुनिया के कई हिस्सों में आज भी ऐसी प्रथाएं मौजूद हैं, जिन पर सवाल उठना जरूरी है. उन्हीं में से एक है महिलाओं का खतना, जिसे फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM) या ‘खफ्स’ भी कहा जाता है. इस प्रक्रिया में लड़कियों के जननांग के बाहरी हिस्से को आंशिक या पूरी तरह काट दिया जाता है. संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं बल्कि गहरी मानसिक और भावनात्मक पीड़ा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह प्रक्रिया अक्सर 6-7 साल की छोटी बच्चियों के साथ की जाती है. बिना किसी एनेस्थीसिया के, ब्लेड या चाकू से यह प्रक्रिया की जाती है, जिससे बच्ची को असहनीय दर्द झेलना पड़ता है. बाद में साधारण तरीकों से घाव भरने की कोशिश की जाती है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक रूप से बना रहता है.