India में कैसे हो गई सिलेंडर की किल्लत? सरकार के प्लान ऑफ एक्शन पर क्या बोले Economist Dr Sharad Kohli?

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यह पूरा मामला सिर्फ युद्ध का असर नहीं, बल्कि अफवाह, जमाखोरी और कालाबाजारी से पैदा हुई “मैनमेड क्राइसिस” का उदाहरण बन गया है. मिडिल ईस्ट में तनाव और होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर खबरों ने भारत में एलपीजी सप्लाई को लेकर डर पैदा किया, जिसका फायदा उठाकर कुछ लोगों ने सिलेंडर की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग शुरू कर दी. कमर्शियल इस्तेमाल के लिए घरेलू सिलेंडर खरीदे जाने लगे और छोटे सिलेंडरों में गैस भरकर महंगे दामों पर बेची गई, जिससे आम जनता के लिए शॉर्टेज की स्थिति बन गई. इस पूरी स्थिति में जहां एक तरफ सरकार का दावा है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, वहीं ग्राउंड पर लंबी लाइनें, भगदड़ और लोगों की परेशानी एक अलग ही कहानी बयां कर रही है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह संकट सप्लाई की कमी से ज्यादा अफवाह, बढ़ती डिमांड और सिस्टम की निगरानी में कमी की वजह से खड़ा हुआ है. अगर समय रहते सख्ती और मॉनिटरिंग की जाती, तो हालात इतने खराब नहीं होते.


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