हर साल 1 जुलाई को भारत अपने उन डॉक्टरों को सम्मान देता है, जो दिन-रात लोगों की जान बचाने में लगे रहते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस दिन को National Doctors’ Day बनाने के पीछे एक ऐसे इंसान की कहानी छिपी है, जिसे दुनिया ने बार-बार ठुकराया - लेकिन भारत ने सिर पर बिठाया. डॉ. बिधान चंद्र रॉय सिर्फ एक महान डॉक्टर ही नहीं थे, बल्कि महात्मा गांधी के निजी चिकित्सक, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित नेता भी थे. कहा जाता है कि उन्होंने इंग्लैंड में मेडिकल की पढ़ाई के लिए 30 बार आवेदन किया और हर बार रिजेक्ट हुए, लेकिन हार नहीं मानी. उनकी जिंदगी बताती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की पहली सीढ़ी होती है. यही वजह है कि 1 जुलाई सिर्फ डॉक्टरों का दिन नहीं, बल्कि संघर्ष से महान बनने की मिसाल भी है.