Raghav Chadha ने भारत की संसद में एक अहम मुद्दा उठाया है, जो मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ा है। यह ऐसा विषय है जो हर साल देश की 12 करोड़ से अधिक किशोरियों को प्रभावित करता है. उचित सुविधाओं, सैनिटरी उत्पादों और जागरूकता की कमी के कारण लाखों लड़कियां स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं, काम से अनुपस्थित रहती हैं और कई तरह के गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करती हैं.