कौन है पांडवास बैंड? CM धामी से क्यों लगाई गुहार, 20 महीने से पेमेंट अटकने का लगाया आरोप
उत्तराखंड के चर्चित म्यूजिक बैंड पांडवास ने 38वें राष्ट्रीय खेलों से जुड़े अपने काम की फीस नहीं मिलने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद मांगी है. 20 महीनों से बैंड की पेमेंट रूकी हुई है.
उत्तराखंड का पांडवास बैंड एक बार फिर चर्चा में है. बैंड ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद की गुहार लगाई है. दरअसल पांडवास का दावा है कि नेशनल गेम्स से जुड़े काम के बदले उनकी पेमेंट करीब 20 महीने से अटकी हुई है. बैंड ने नेशनल गेम्स के लिए थीम सॉन्ग तैयार करने से लेकर कई इवेंट में परफॉर्म किया था.
वह अलग-अलग तरीके से अपनी शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कोई हल नहीं निकला है. इसलिए अब वह सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात सामने रख रहे हैं और मुख्यमंत्री से इस मामले में मदद की अपील की है.
क्या है मामला?
उत्तराखंड में 38वें राष्ट्रीय खेल जनवरी-फरवरी 2025 में हुए थे. पांडवास के अनुसार, इन खेलों के लिए बैंड ने थीम सॉन्ग तैयार किया था. इसके साथ ही मशाल यात्रा के कई इवेंट में परफॉर्म भी किया और खेलों के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लिया. बैंड का कहना है कि उसने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी मेहनत से निभाईं और अपने कार्यक्रमों के जरिए उत्तराखंड की लोक संस्कृति को देशभर तक पहुंचाने की कोशिश की. लेकिन काम पूरा होने के बाद भी भुगतान के लिए इंतजार खत्म नहीं हुआ और यह मामला लगातार लंबा खिंचता चला गया.
20 महीने में कई बार की शिकायत
पांडवास के मुताबिक, बकाया पैसे के लिए उन्होंने कई सरकारी जगहों पर कॉन्टैक्ट किया. सबसे पहले बैंड ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उसका दावा है कि पहली शिकायत बिना समस्या हल किए ही बंद कर दी गई. इसके बाद दोबारा शिकायत की गई, जो अभी भी लंबित बताई जा रही है. बैंड ने खेल विभाग, खेल मंत्री, संबंधित अधिकारियों और मुख्यमंत्री आवास के हेल्पडेस्क से भी संपर्क किया. पांडवास के मुताबिक, कई जगह अपनी बात रखने के बाद भी अब तक पेमेंट को लेकर कोई पक्का समाधान नहीं निकला है.
विभाग ने क्या कहा?
शुरुआत में विभाग ने बजट नहीं होने की बात कही थी और बैंड से कुछ समय सहयोग करने को कहा गया था. बैंड का कहना है कि उसने हालात को समझते हुए अपना काम पूरा किया, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी उसे भुगतान नहीं मिला है. पांडवास ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर आयोजन से जुड़े दूसरे कलाकारों और वेंडर्स को उनका पैसा मिल चुका है, तो उसका बिल अब तक क्यों अटका हुआ है.
मुख्यमंत्री से क्या चाहता है बैंड?
पांडवास ने मुख्यमंत्री से इस मामले को देखने और संबंधित विभाग को जरूरी निर्देश देने की अपील की है. बैंड का कहना है कि वह किसी खास सर्विस या अलग से मदद की मांग नहीं कर रहा है. उनकी सिर्फ यही मांग है कि किए गए काम का तय पैसा उसे मिल जाए. पांडवास के मुताबिक, अधिकारियों से कई बार संपर्क करने की कोशिश के बाद सोशल मीडिया पर अपनी बात रखना उसकी मजबूरी बन गई. अब बैंड को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के दखल से लंबे समय से रुका हुआ भुगतान मिलने का रास्ता साफ हो सकता है.
कब शुरू हुआ था पांडवास?
पांडवास बैंड की शुरुआत साल 2008 में ईशान, कुणाल और सलिल डोभाल ने की थी. यह बैंड उत्तराखंड के लोक संगीत और पहाड़ी संस्कृति को अलग अंदाज में लोगों तक पहुंचाने के लिए जाना जाता है. इसके गानों में गढ़वाली और कुमाऊंनी लोक धुनों के साथ आधुनिक संगीत का भी मेल सुनने को मिलता है. पांडवास ने खास तौर पर युवाओं को उत्तराखंड की पारंपरिक धुनों और संस्कृति से जोड़ने की कोशिश की है. संगीत के साथ-साथ पहाड़ की लोक विरासत और उत्तराखंड की पहचान को आगे बढ़ाना भी बैंड के काम का अहम हिस्सा रहा है.