यौन शोषण मामले में शंकराचार्य और उनके शिष्य पर FIR दर्ज करने के आदेश, POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई- क्या है पूरा विवाद?
प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ नाबालिगों के कथित यौन शोषण मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया.
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के आदेश ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में बड़ा भूचाल ला दिया है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं. मामला नाबालिग बच्चों के कथित यौन शोषण से जुड़ा बताया जा रहा है.
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस रिपोर्ट, पीड़ितों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों को संज्ञान में लेते हुए झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू करने का आदेश दिया है. अदालत के इस फैसले को मामले में अहम मोड़ माना जा रहा है.
क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद माघ मेला 2026 के दौरान सामने आया. शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष और शाकुंभरी पीठाधीश्वर) ने 28 जनवरी 2026 को प्रयागराज जिला कोर्ट में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 173(4) के तहत अर्जी दाखिल की. अर्जी में आरोप लगाया गया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम/शिविर में दो नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण हुआ.
कब-कब सुनवाई हुई और क्या हुआ?
8 फरवरी 2026 को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद दायर किया गया और दो नाबालिग पीड़ितों को अदालत में पेश किया गया. कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया. 10 फरवरी को स्वामी पक्ष ने जवाब दाखिल कर आरोपों को झूठा और साजिश बताया. 13 फरवरी की सुनवाई के दौरान दोनों नाबालिगों के बयान बंद कोर्ट रूम में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए. इसके बाद फैसला सुरक्षित रखा गया. 20 फरवरी को फिर सुनवाई हुई, जिसमें स्वामी पक्ष के वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा सहित 25 अधिवक्ता पेश हुए. मुकुंदानंद गिरी की ओर से भी अर्जी देकर झूठे पॉक्सो केस का आरोप लगाया गया. 21 फरवरी 2026 के आसपास अदालत ने एफआईआर दर्ज कर विवेचना का आदेश जारी कर दिया.
अदालत ने क्या कहा और क्या आदेश दिया?
विशेष जज विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस की रिपोर्ट और दर्ज बयानों को देखते हुए झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए. अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गहन जांच आवश्यक है और पुलिस विधिवत विवेचना कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी.
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
सुनवाई के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि 'हम दर-दर भटक रहे थे. पुलिस के पास जा रहे थे. हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी. इसलिए न्याय के मंदिर में आए. आज लगा कि न्याय अभी जिंदा है. न्यायलय ने हमे आज न्याय दिया है. मैं अब साफ-साफ कहना चाहता हूं कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किया गया. इसकी पुष्टि न्यायालय ने कर दी है.'
उन्होंने आगे कहा कि 'अब मैं कहना चाहता हूं अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम को, जो चिल्ला रहे थे. अब मैं कह रहा हूं कि मेरे साथ पैदल यात्रा में चलिए. विद्यामठ बनारस जा रहा हूं. जहां पर रंग रलिया मनाते हैं. पंचम तल पर दिखाना चाहता हूं. जहां पर इनका शीश महल है. वहां पर सखियां इनकी रहती है. जिसका नाम भी पता है. आज से पैदल यात्रा मेरी चलेगी.'
उन्होंने यह भी कहा कि 'हम न्याय के लिए दर दर लोगों के बीच में जाएंगे. सनातन को जिताने के लिए सनातन की बात ऐसे भ्रष्ट, लोगों को ऐसे पद पर नहीं बैठना चाहिए. ये लोग आज जेल के अंदर होने चाहिए. इसलिए हम लोग आज से यात्रा शुरु कर रहे है. न्यायलय ने सीधा- सीधा पुलिस को आदेश दिया है कि FIR दर्ज हो.' 13 फरवरी की सुनवाई में स्वामी पक्ष के वकील ने अदालत में कहा कि यह केवल आरोप हैं और बचाव के लिए समय दिया जाए.
शिकायतकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि 'मेरी कार को बम से उड़ाकर मुझे मारने की धमकी दी जा रही. मेरी हत्या हो सकती है. आपको यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों के बयान सुनने चाहिए.' इसके बाद कोर्ट रूम खाली कराया गया और केवल दोनों पक्षों के वकीलों की मौजूदगी में बच्चों के बयान दर्ज किए गए.
वकील एस.के. मानस ने बताया कि 'POCSO न्यायाधीश, प्रयागराज ने ये निर्णय दिया है. निर्णय में आशुतोष पांडे(शिकायतकर्ता) ने एक प्रार्थना पत्र दिया था कि अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा गोपनीय ढंग से यौन शोषण की एक परंपरा चलाई जा रही है. इस प्रार्थना पत्र को न्यायालय में उनके खिलाफ FIR दर्ज करवाने के लिए प्रस्तुत किया गया था.
महत्वपूर्ण बिंदु ये है कि अदालत ने केवल सीधा आदेश नहीं दिया बल्कि उन्होंने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज द्वारा आरोपित तथ्यों की जांच भी करवाई. अविमुक्तेश्वरानंद और उनके टीम के लोग जो गोपनीय ढंग से इस घृणित अपराध की परंपरा को चला रहे थे, उसका न्यायालय ने संज्ञान लिया है. अविमुक्तेश्वरानंद और उनके 4-5 शिष्यों के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी.'
कोर्ट के FIR वाले आदेश पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद?
वाराणसी में शंकराचार्य पद से जुड़े विवाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अदालत में दर्ज शिकायत पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अदालत ने अपनी प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज की है और अब जांच आगे बढ़ेगी. Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने कहा, “कोर्ट की अपनी प्रक्रिया होती है. कोर्ट ने शिकायत दर्ज की है और दर्ज करने के बाद वह जांच करेगी. हमने अदालत को सूचित किया है कि यह मामला गढ़ा हुआ है.”
उन्होंने शिकायतकर्ता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अशुतोष नामक व्यक्ति उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला थाने में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज है. उनके मुताबिक, “कई लोग स्वयं पीड़ित हैं और कहते हैं कि उसने (आशुतोष पांडे) उनके खिलाफ भी झूठे मुकदमे दर्ज किए हैं.' स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा, 'हमारे खिलाफ आरोप ऐसे व्यक्ति के शिष्य ने लगाए हैं, जो स्वयं को जगद्गुरु कहता है. इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि सनातन धर्म को किसी बाहरी से खतरा नहीं है, बल्कि भीतर के ही लोग हिंदू धर्म और शंकराचार्य नाम की संस्था को नष्ट करना चाहते हैं.”