पिता ड्राइवर, मां हाउसवाइफ, कहानी नोएडा के प्रिंस कश्यप के गोल्ड मेडल लाने की, किसे दिया जीत का क्रेडिट? अब नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी
नोएडा के 19 वर्षीय प्रिंस कश्यप ने 90+ किलो वर्ग में बॉक्सिंग का गोल्ड जीता. पिता ड्राइवर, मां गृहिणी हैं. अब पटना नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी.
नोएडा के बसई गांव के रहने वाले 19 वर्षीय प्रिंस कश्यप ने अपनी मेहनत और अनुशासन के दम पर शहर का नाम रोशन किया है. झांसी के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 1 से 4 अक्टूबर तक आयोजित राज्य स्तरीय सीनियर पुरुष मुक्केबाजी प्रतियोगिता में प्रिंस ने 90 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया. पूरे उत्तर प्रदेश से करीब 170 मुक्केबाजों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में पढ़ाई कर रहे प्रिंस सेक्टर-21ए स्थित शहीद भगत सिंह बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण लेते हैं. अब उनकी नजर नेशनल चैंपियनशिप पर है.
बात करें प्रिंस कश्यप के परिवार की तो उनके पिता ड्राइवर हैं और माता घर संभालती हैं. प्रिंस दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीए ऑनर्स प्रथम वर्ष के छात्र हैं. वह सेक्टर-21ए स्थित शहीद भगत सिंह बॉक्सिंग अकादमी में कोच प्रीतम और साहिल के मार्गदर्शन में बॉक्सिंग की तैयारी करते हैं. इसी के साथ प्रिंस कश्यप ने स्टेट मिरर हिंदी से खास बातचीत की है और अपने सफलता के पीछे की कहानी बताई है तो आइए जानते हैं...
कितने साल से प्रिंस कर रहे गोल्ड के लिए प्रैक्टिस?
प्रिंस ने बताया कि उन्हें बचपन से ही बॉक्सिंग करने का शौक था. वह अपने पिता से अक्सर कहते थे कि उन्हें बॉक्सिंग सीखनी है. परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया. उन्होंने 10वीं कक्षा से बॉक्सिंग की प्रैक्टिस शुरू की और वर्ष 2023 से नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रहे हैं. इसके बाद से वह लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहे हैं और पदक जीत रहे हैं. प्रिंस ने बताया कि झांसी में आयोजित प्रतियोगिता के लिए वह 29 सितंबर को ही पहुंच गए थे, जबकि रिपोर्टिंग 30 सितंबर को थी. 1 अक्टूबर से उनकी फाइट शुरू हुई. उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में पूरे उत्तर प्रदेश से करीब 170 बॉक्सर पहुंचे थे और कड़े मुकाबलों के बीच उन्होंने 90 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता.
प्रिंस ने जीत का क्रेडिट किसे दिया?
उन्होंने कहा कि मैं 90 प्लस वेट कैटेगरी में खेलता हूं. जब मैंने गोल्ड जीता तो सबसे पहले अपने पापा और कोच को बताया. मेरे कोच ने मुझे हमेशा समझाया कि ठंडे दिमाग से खेलना है. जीत हो या हार, अपना फोकस नहीं खोना है. उन्होंने मेरा पूरा सपोर्ट किया. प्रिंस के मुताबिक प्रतियोगिता से पहले उनके कोच भी झांसी पहुंच गए थे. मुकाबले से पहले कोच उन्हें समझाते थे कि किस तरह खेलना है, कब अटैक करना है और कब डिफेंस करना है. इससे उन्हें मुकाबले के दौरान रणनीति बनाने में मदद मिली. उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता तक पहुंचने के लिए पहले जिला स्तर, फिर मंडल स्तर की प्रतियोगिताएं होती हैं. इसके बाद मंडल की टीम बनती है. प्रिंस ने मेरठ मंडल की ओर से इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था.
प्रिंस ने कहा कि उनकी इस सफलता में परिवार और कोच का सबसे बड़ा योगदान है. उन्होंने बताया कि परिवार के लोग लगातार फोन करके उनके मैच और टूर्नामेंट के बारे में पूछते रहते थे. उन्होंने कहा, मेरे परिवार वाले मुझसे ज्यादा खुश हैं. जब मैंने परिवार से कहा था कि मुझे बॉक्सिंग करनी है तो उन्होंने कहा था कि समय आने दो, फिर बॉक्सिंग सीख लेना. समय आने पर उन्होंने मेरी बॉक्सिंग की कोचिंग लगवा दी. परिवार ने मुझे किसी तरह की कमी महसूस नहीं होने दी.
अब प्रिंस का क्या है अलग प्लान?
प्रिंस का कहना है कि बॉक्सिंग में अनुशासन सबसे ज्यादा जरूरी है. वह नियमित रूप से प्रैक्टिस करते हैं और कोच जो बताते हैं, उसे पूरी तरह फॉलो करने की कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा कि लगातार अनुशासन के साथ अभ्यास करने की वजह से वह इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं. अब प्रिंस की नजर नेशनल चैंपियनशिप पर है. उन्होंने बताया कि 20 दिसंबर से पटना में नेशनल चैंपियनशिप होने जा रही है. फिलहाल वह यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पर ध्यान देंगे और इसके बाद नियमित प्रैक्टिस शुरू करेंगे. प्रिंस ने कहा कि, नेशनल में अपना 100 प्रतिशत देंगे. जीतेंगे तो जीतेंगे, हारेंगे तो हारेंगे, लेकिन अगर हार भी हुई तो दोबारा शुरू से शुरुआत करेंगे.
अब तक कितने मेडल जीत चुके हैं प्रिंस?
प्रिंस ने यह भी बताया कि उन्हें केंद्र सरकार की ओर से कुछ पुरस्कार और अनुदान मिले हैं, लेकिन उन्हें ओपन स्तर पर खास पुरस्कार या आर्थिक मदद नहीं मिली है. इस संबंध में उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की वास्तविक स्थिति उनके साथ रहकर और उनकी परिस्थितियों को देखकर ही समझी जा सकती है. उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अपना मैच खेलने पर ध्यान देते हैं और आगे मिलने वाले सहयोग की उम्मीद रखते हैं.