हम छोटे कॉकरोच से लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक, एटा में नाबालिग बच्चों से PM मोदी को दिलवाई जा रही गाली! एक्शन में क्या-क्या?
एटा में बच्चों से कथित राजनीतिक वीडियो बनवाने के मामले में NHRC ने नोटिस जारी किया है. जानें वायरल वीडियो, 1100 क्लिप के दावे और जांच में क्या सामने आया.
उत्तर प्रदेश के एटा से बच्चों के कथित राजनीतिक और विवादित वीडियो सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया है. शिकायत में आरोप है कि एक कथित कोचिंग सेंटर से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट पर छोटे बच्चों से स्क्रिप्टेड वीडियो बनवाकर Instagram पर डाले जा रहे थे. इनमें तीन साल तक की उम्र के बच्चे भी शामिल बताए गए हैं. मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है.
जैसा कि आपको मालुम हो की इस वीडियो में बच्चे कह रहे हैं कि 48 घंटे के अंदर ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने वाले हैं जिसे अभिजीत दीपके ने इस सबसे पहले अल्टीमेटम दिया था यानी इस वीडियो को कथित तौर पर CJP के रूप में भी देखा जा रहा है. आइए जानते हैं इस मामले पर अब तक क्या हुआ है...
वायरल वीडियो में क्या?
वीडियो में बच्चे मैडम से शिकायत करते है कि मैम मेरी नोटबुक चोरी हो गई, मैम मेरी बोतल चोरी हो गई. मैम मेरी पेंसिल चोरी हो गई तो कोई कहता है कि मैडम मेरी किट चोरी हो गई है जिस पर स्कूल की मैडम कहती है कि अरे इतना कुछ कौन चोरी कर रहा क्लास में? तो वहीं एक बच्चा कहता है मैडम मुझे पता है, ये सब मोदी जी किया, कभी पेपर को कभी वोट. फिर बच्चे कहते हैं हां. वहीं एक बच्चा कहता है कि मेरा टाइम खराब न करो आपने हमें कॉकरोच कहा था. हम छोटे कॉकरोच हैं. वहीं वीडियो के आखिर में एक बच्चा कहता है कि अरे तुम्हें पता है ज्ञानेश कुमार को अगले 24 घंटे में इस्तीफा देना पड़ेगा.
एटा में बच्चों से किस तरह के वीडियो बनवाने का आरोप है?
शिकायत के मुताबिक, बच्चों को पढ़ाई से अलग सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने में कथित तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. “Pratibha_edu_squad” नाम के Instagram अकाउंट का भी शिकायत में उल्लेख है. शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि अकाउंट पर बच्चों से जुड़े 1,100 से अधिक वीडियो अपलोड किए गए. कुछ वीडियो में बच्चों से कथित तौर पर आपत्तिजनक या राजनीतिक नारे दोहरवाने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है. इस मामले पर एटा पुलिस ने कहा कि प्रकरण में अभियोग पंजीकृत कर थानास्तर से आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है.
NHRC ने मामले में क्या कार्रवाई की?
NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी, Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं कंट्री हेड और MeitY के सचिव को नोटिस जारी किया है. आयोग ने संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर Action Taken Report मांगी है.
पुलिस को बच्चों को लेकर क्या निर्देश मिले?
NHRC ने पुलिस को वीडियो में नजर आ रहे बच्चों की पहचान करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है. जरूरत पड़ने पर बच्चों को काउंसलिंग उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है. इसके अलावा पुलिस को यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट कौन चला रहा था और वीडियो की स्क्रिप्ट, रिकॉर्डिंग तथा अपलोडिंग में कौन-कौन से वयस्क शामिल थे.
क्या बच्चों से वीडियो बनवाने वालों पर FIR होगी?
NHRC ने कहा है कि अगर जांच में किसी संज्ञेय अपराध के सबूत मिलते हैं तो कानून के तहत कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर FIR दर्ज की जाए. यानी फिलहाल आयोग ने सीधे किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया है. जांच के बाद ही जिम्मेदारी और संभावित कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी.
बच्चों की निजता और माता-पिता की सहमति पर क्या सवाल हैं?
शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि बच्चों को वीडियो में शामिल करने से पहले उनके माता-पिता या अभिभावकों की उचित सहमति ली गई थी या नहीं. इसके साथ ही बच्चों की निजता, गरिमा और मानसिक सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है. NHRC ने जांच में इन पहलुओं को शामिल करने को कहा है.
Meta से NHRC ने क्या जवाब मांगा?
आयोग ने Meta से पूछा है कि नाबालिग बच्चों से जुड़े ये वीडियो बार-बार प्लेटफॉर्म पर कैसे अपलोड और प्रसारित होते रहे.
Meta से यह भी पूछा गया है कि-
- क्या इन वीडियो से कोई मोनिटाइजेशन हुआ?
- क्या किसी तरह का व्यावसायिक लाभ कमाया गया?
- कंटेंट को हटाने या सीमित करने के लिए क्या कार्रवाई हुई?
- मामले से जुड़े डिजिटल सबूत सुरक्षित रखे गए हैं या नहीं?
- बच्चों के सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर क्या नियम हैं?
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की ओर से बच्चों की मनोरंजन और कमर्शियल कंटेंट में भागीदारी को लेकर दिशा-निर्देश हैं. इनमें सोशल मीडिया के लिए बनाए जाने वाले कंटेंट में बच्चों की सुरक्षा, सहमति, शिक्षा और कमाई से जुड़े पहलुओं पर जोर दिया गया है. मुख्य उद्देश्य बच्चों को ऐसी परिस्थितियों से बचाना है, जिनसे उन्हें अनावश्यक मानसिक या शारीरिक परेशानी हो सकती है.
सुप्रीम कोर्ट भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर चिंता जता चुका है?
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब बच्चों और सोशल मीडिया को लेकर देश में बहस तेज है. हाल में सुप्रीम कोर्ट ने भी नाबालिगों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच के लिए वैधानिक सुरक्षा उपायों पर विचार करने को कहा था.
अब एटा मामले में आगे क्या होगा?
अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि वीडियो किसने बनाए, बच्चों को किस परिस्थिति में शामिल किया गया, अकाउंट कौन संचालित कर रहा था और क्या इसके पीछे किसी तरह का आर्थिक या अन्य उद्देश्य था. NHRC की रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कौन-सी कानूनी कार्रवाई बनती है.