योगी के सपोर्ट में नहीं जेल से बचने के चक्कर में GST डिप्टी कमिश्नर ने दिया था इस्तीफा! सगे भाई ने खोली कुंडली, आरोप में क्या-क्या?
अयोध्या में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का नाम इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक और नैतिक विवाद के केंद्र में है. आरोप है कि उन्होंने फर्जी नेत्र विकलांगता सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की. यह आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने लगाए हैं, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है.;
Prashant Kumar Singh GST
(Image Source: @Vini____007- X )अयोध्या में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का नाम इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक और नैतिक विवाद के केंद्र में है. आरोप है कि उन्होंने फर्जी नेत्र विकलांगता सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की. यह आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने लगाए हैं, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है.
इस्तीफे के नाटकीय घटनाक्रम के बाद अब इस केस में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट, जन्मतिथि में कथित हेरफेर और मेडिकल बोर्ड के सामने पेश न होने जैसे आरोपों ने GST विभाग से लेकर शासन स्तर तक हलचल मचा दी है.
डॉ. विश्वजीत सिंह का दावा है कि प्रशांत कुमार सिंह ने खुद को 40 प्रतिशत नेत्रहीन बताकर फर्जी नेत्र विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाया और इसी आधार पर सरकारी सेवा में चयन पाया. सगे भाई द्वारा लगाए गए आरोपों ने इस मामले को पारिवारिक विवाद से निकालकर सार्वजनिक और प्रशासनिक संकट में बदल दिया है. डॉ. विश्वजीत सिंह का आरोप है कि प्रशांत सिंह ने इस्तीफा देकर जांच और संभावित रिकवरी से बचने की कोशिश की है.
भाई का दावा है कि जिस आंखों की बीमारी का हवाला दिया गया है, वह 50 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति में दुनिया में कहीं दर्ज नहीं है. मामले में यह भी सामने आया है कि प्रशांत सिंह ने अपनी जन्मतिथि में कथित तौर पर हेरफेर कर अधिकारियों को गुमराह किया. सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान प्रशांत कुमार सिंह दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित नहीं हुए, जिससे संदेह और गहरा गया. अब पूरे मामले की जांच CMO मऊ के स्तर से की जा रही है, जहां मेडिकल दस्तावेजों और रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल हो रही है.
डॉ. विश्वजीत सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए. इस्तीफे में प्रशांत कुमार सिंह ने लिखा- "जिस प्रदेश का नमक खाता हूं और जहां से सैलरी मिलती है, मैं उसका पक्षधर हूं. सीएम योगी का अपमान मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता." प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा फिलहाल मंजूर नहीं हुआ है, जबकि जांच अंतिम चरण में बताई जा रही है.