क्रिएटिविटी या पशु शोषण? जयपुर के मंदिर में पिंक हाथी पर हाफ नेकड मॉडल के फोटोशूट से बवाल; जानें मामला

जयपुर में एक विदेशी फोटोग्राफर द्वारा गुलाबी रंग से रंगे हाथी के साथ फोटोशूट कराने पर विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया पर पशु शोषण के आरोपों के बीच अब वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है.

जयपुर में गुलाबी हाथी पर फोटोशूट से बवाल(Image Source:  Instagram: julia.buruleva )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 30 March 2026 1:36 PM IST

जयपुर में एक फोटोशूट के दौरान एक हाथी को गुलाबी रंग से रंग दिया गया था. इस फोटोशूट की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो गए. इन तस्वीरों में एक मॉडल को गुलाबी रंग से रंगे हुए हाथी पर बैठकर अलग-अलग पोज देते हुए दिखाया गया है. इस घटना के बाद रूसी कला फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा को सोशल मीडिया पर काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. लोगों ने उन पर पशु शोषण का आरोप लगाया है.

यह पूरा फोटोशूट जयपुर के एक सुनसान मंदिर में किया गया था, जो भगवान गणेश को समर्पित है. फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने कहा कि भगवान गणेश का सिर हाथी जैसा होता है, इसलिए उन्होंने इस मंदिर को फोटोशूट के लिए बिल्कुल सही जगह माना. इंस्टाग्राम पर बिहाइंड-द-सीन वीडियो और फोटो शेयर करते हुए जूलिया ने बताया कि वे जयपुर में कई हफ्तों तक रुकी रहीं. उसी दौरान उन्हें यह आइडिया आया कि अपनी कला में एक हाथी को शामिल किया जाए. उन्होंने लिखा, 'राजस्थान में हाथी हर जगह मौजूद हैं सड़कों पर, गहनों में, पुरानी बिल्डिंग पर. हाथी राजस्थान का एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक प्रतीक है. इसलिए मैं अपने काम में हाथी को शामिल किए बिना नहीं रह सकती थी.'

हाथी पर नेकेड फोटोशूट 

जूलिया ने यह भी बताया कि फोटोशूट की तैयारी में उन्होंने बहुत मेहनत की थी. उन्होंने कई जगहों का सेलेक्ट किया, जरूरी परमिशन लीं और हाथियों को रखने वाली कई सुविधाओं का दौरा करके सहयोग मांगा. फोटोशूट के दौरान मॉडल हाफ नेकेड थी और उसका शरीर भी गुलाबी रंग से रंगा हुआ था. वह उसी रंग में रंगे हुए हाथी की पीठ पर बैठकर पोज दे रही थी. जूलिया बुरुलेवा ने दावा किया कि उन्होंने केवल ऑर्गेनिक और नेचुरल कलर का इस्तेमाल किया था. उन्होंने जोर देकर कहा कि हाथी को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया गया. उन्होंने लिखा, 'जिन लोगों को हाथी की चिंता है, उनके लिए मैं बता दूं कि हमने वही ऑर्गेनिक पेंट इस्तेमाल किया है जो स्थानीय लोग त्योहारों के समय हाथियों और अन्य जानवरों पर लगाते हैं. यह पेंट पूरी तरह सेफ है और हाथी के लिए हानिकारक नहीं है.'

क्या रही फोटोटग्राफर जूलिया की सफाई? 

हालांकि, जूलिया के सफाई देने के बावजूद सोशल मीडिया पर विवाद बहुत बढ़ गया. हजारों लोग इन तस्वीरों पर अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोगों ने फोटोग्राफर की क्रिएटिविटी की तारीफ की और इसे बोल्ड आर्टिस्टिक प्रयास बताया. लेकिन ज्यादातर रिएक्शन निगेटिव थीं. बहुत से लोग, खासकर वाइल्डलाइफ लवर इस फोटोशूट की कड़ी आलोचना कर रहे हैं. उन्होंने इसे पशुओं के साथ दुर्व्यवहार और शोषण बताया. कई यूजर्स का कहना है कि सौंदर्य या कला के नाम पर किसी जीवित जानवर को इतनी लंबी और थकाने वाली प्रक्रिया से गुजारना बिल्कुल गलत है. उन्होंने सुझाव दिया कि फोटोग्राफर को इस तरह का लुक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना चाहिए था, न कि असली हाथी का.

क्या रहा यूजर्स का रिएक्शन?

एक यूजर ने लिखा, 'क्रिएटिविटी फ्रीडम का मतलब यह नहीं होता कि आप जानवरों के साथ गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करें. यह आपका बहुत गलत फैसला है. हाथी को सिर्फ दिखावे के लिए गुलाबी रंग की वस्तु बना देना नैतिक रूप से भी गलत है और सांस्कृतिक रूप से भी अपमानजनक है. चाहे जानबूझकर हो या अनजाने में, ऐसी तस्वीरें जानवरों को सिर्फ सजावट की चीज बना देती हैं. इससे दूसरे लोग भी ध्यान पाने के लिए ऐसी ही हरकतें करने लगेंगे. आपने भगवान गणेश का नाम लिया, लेकिन आपने हमारी संस्कृति को गलत तरीके से समझा है.  जयपुर जैसा सुंदर शहर इस तरह के बनावटी और सनसनीखेज कामों की जरूरत नहीं रखता.' एक ने कहा, 'क्या आपके अपने देश में आपको ऐसा करने दिया जाएगा? क्या आपने अपने देश में भारतीयों को कला के नाम पर मनमानी करते देखा है? मैं क्रिएटिविटी का पूरा समर्थन करती हूं, लेकिन यह ठीक नहीं है.' 

पहले भारत में जानवरों स्थिति पता करें 

एक ने लंबा नोट लिखते हुए कहा, 'मुझे आपका काम पसंद था, लेकिन अब नहीं. जानवरों के साथ कोई भी प्रोजेक्ट करने से पहले आपको यह पता लगाना चाहिए कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है. भारत में, और खासकर राजस्थान में, जहां आप गए थे, हाथियों की हालत बहुत खराब है. उन्हें रोज़ पानी और चारा चाहिए, मिट्टी डालनी चाहिए, लेकिन उन्हें ये सब आसानी से नहीं मिलता. वे पर्यटकों के साथ घंटों काम करते हैं और दिन भर का काम खत्म होने पर उन्हें जंजीरों में बांध दिया जाता है. जब आप इस तरह का प्रोजेक्ट करते हैं और हाथियों जैसे जानवरों का इस्तेमाल करके अपनी कला से पैसा कमाते हैं, तो आप इस धंधे को रोकने में मदद नहीं कर रहे हैं, बल्कि उल्टा कर रहे हैं. कुछ भी करते समय सिर्फ कला या उससे मिलने वाले आर्थिक लाभ के बारे में न सोचें. कम से कम अब जब तस्वीरें बन गई हैं, तो हाथियों की देखभाल करने वाली किसी संस्था को दान करें ताकि उनकी स्थिति में सुधार हो सके. 

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