जबलपुर के इस आम को क्यों मिल रही है Z+ सिक्योरिटी? कीमत इतनी की खाने के लिए लेना पड़ जाए बैंक से लोन
जबलपुर में एक बागान में उग रहे मियाजाकी आम की सुरक्षा Z+ स्तर की है, जहां गार्ड, कुत्ते और CCTV 24 घंटे निगरानी करते हैं. इस आम की कीमत 2.7 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचती है, जिससे यह दुनिया का सबसे महंगा फल बन गया है.
यह कहानी सुनकर आपको हैरानी होगी! क्या कभी आपने सोचा भी होगा कि किसी फल की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जैसी सख्त सुरक्षा व्यवस्था लगाई जा सकती है? लेकिन जी हां, यह सच है. मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक आम के बागान की सुरक्षा इतनी मजबूत की गई है कि इसे देखकर कोई भी चौंक जाएगा. यहां उगाए जा रहे मियाजाकी नाम के दुर्लभ और बेहद महंगे आमों की हिफाजत के लिए न सिर्फ हथियारबंद गार्ड तैनात हैं, बल्कि 20 खूंखार शिकारी कुत्ते और दर्जनों हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे भी 24 घंटे नजर रखते हैं. जबलपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर चरगवां रोड पर स्थित हिनौता गांव में यह अनोखा बागान है. यहां संकल्प परिहार और उनकी पत्नी रानी सिंह परिहार का श्री महाकालेश्वर हाइब्रिड फार्महाउस है. सिर्फ 4 एकड़ के इस छोटे से बागान में दुनिया की सबसे महंगी और दुर्लभ आम की किस्में उगाई जा रही हैं.
सुरक्षा का स्तर Z+ कैटेगरी जितना
इस बागान की सुरक्षा देखकर लगता है जैसे यहां कोई VIP रह रहा हो 17 जर्मन शेफर्ड (विदेशी नस्ल के) और 3 देसी खूंखार कुत्ते पूरे समय तैयार रहते हैं. पूरे बागान में 15 से ज्यादा आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं जो हर कोने पर नजर रखते हैं. दिन-रात सुरक्षा गार्ड्स की टीम पेट्रोलिंग करती रहती है. अब सवाल है कि आखिर इतनी भारी सुरक्षा क्यों? क्योंकि इन आमों की कीमत इतनी ज्यादा है कि चोरों की नजर आसानी से इन पर पड़ सकती है.
मियाजाकी आम की कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश!
इस बागान की सबसे चर्चित आम की किस्म है जापान की 'मियाजाकी'. इसे 'सूर्य का अंडा' (Egg of the Sun) भी कहते हैं. जब यह पूरी तरह पक जाता है तो इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी हो जाता है. एक किलो मियाजाकी आम की कीमत इंटरनेशनल बाजार में 2 लाख 70 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. यानी लगभग 350 ग्राम वजन का एक आम ही इतना महंगा है कि मजाक में लोग कहते हैं, 'इसे खरीदने के लिए फल की दुकान नहीं, बैंक में पर्सनल लोन लेना पड़ेगा.' यह आम बहुत मीठा होता है, इसमें शुगर की मात्रा ज्यादा होती है और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है, जो शरीर को कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद करता है.
दुनिया भर की 50 से ज्यादा किस्में
यहां सिर्फ मियाजाकी ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों की 50 से ज्यादा दुर्लभ आम की प्रजातियां उगाई जा रही हैं. कुछ खास किस्में इस प्रकार हैं:
नूरजहां (अफगानिस्तान) – एक फल का वजन 5 किलो तक हो सकता है
आइवरी (चीन) – सफेद रंग का, लंबा और अनोखा आम
ब्लैक मैंगो (अमेरिका) – पूरी तरह काला दिखने वाला आम
सेंसेशन (अमेरिका) – अपनी जबरदस्त खुशबू के लिए मशहूर
केसर बादाम (नेपाल) और जंबो ग्रीन (मलेशिया) – बड़े आकार और स्वादिष्ट
इनके अलावा भारत की लोकप्रिय किस्में जैसे मलिका, आम्रपाली, दशहरी और लंगड़ा भी यहां बड़ी शान से उगाई जा रही हैं.
सुरक्षा क्यों लगानी पड़ी?
पिछले साल इस बागान में चोरों ने रात के अंधेरे में हमला कर दिया था और लाखों रुपये के आम चुरा ले गए थे. उस दौरान संकल्प परिहार के पालतू कुत्तों ने चोरों से लड़ाई की. इसमें उनकी एक प्यारी कुत्ती जैरी बुरी तरह घायल हो गई थी. अपनी मेहनत की फसल और वफादार जानवरों को बचाने के लिए संकल्प और रानी ने यह सख्त सुरक्षा व्यवस्था कर ली. अब यहां चोरों के आने का सवाल ही नहीं उठता.
ऑर्गेनिक और देखभाल भरी खेती
संकल्प और रानी सिर्फ सुरक्षा पर ही ध्यान नहीं देते. वे आमों की सेहत का भी पूरा ख्याल रखते हैं. हर आम को कीड़ों और पक्षियों से बचाने के लिए ग्रो बैग में पैक किया जाता है.
तेज धूप और गर्मी से बचाने के लिए ग्रीन नेट का इस्तेमाल किया जाता है
बागान में बिल्कुल भी केमिकल या रासायनिक कीटनाशक नहीं इस्तेमाल होते
सिर्फ ऑर्गेनिक खाद का उपयोग किया जाता है