झारखंड की युवा आदिवासी नेता निशा भगत ने फेसबुक लाइव सेशन के बाद आत्महत्या कर ली. आदिवासी समाज के हक की लड़ाई में मुखर आवाज रहीं निशा भगत ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो भी बनाया था. इस वीडियो में उन्होंने अपनी मौत के लिए हेमंत सरकार और उससे जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार का भंडाफोड़ करना और सच्चाई उजागर करना भारी पड़ रहा है.

वीडियो में निशा भगत कहती सुनाई दे रही हैं, "आज मेरी जीवन की लीला समाप्त करने की बारी आ गई है. दुखद यह है कि अजय तिर्की जैसे लोग हैं, जो कहते हैं कि निशा भगत बहुत स्ट्रॉन्ग है, संघर्ष की मिसाल है. लेकिन सच्चाई उजागर करना और सरकार का भंडाफोड़ करना गलत है, तो मेरी मौत ही सही."

उन्होंने आगे कहा, "मुझे बहुत पहले समझ जाना चाहिए था कि हेमंत सरकार और उनके शागिर्द, जितने भी जमीन दलाल हैं, उनके खिलाफ आवाज उठाने का मुझे क्या अंजाम भुगतना पड़ सकता है. मुझे नहीं पता था कि मुझे अपनी मौत को आमंत्रण देना होगा."

निशा ने वीडियो में कहा कि लोग इसे बीजेपी या कांग्रेस से जोड़कर देख सकते हैं, लेकिन उनके माता-पिता को उनकी मौत से बहुत दुख होगा. उन्होंने बताया कि प्रशासन से भी उन्होंने काफी लड़ने की कोशिश की और अपनी सुरक्षा के लिए भी गुहार लगाई, लेकिन आखिरकार उन्हें मौत को गले लगाना पड़ रहा है.

कौन थी निशा भगत क्या करती थी? 

निशा भगत झारखंड की युवा आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता और नेता थीं. वह आदिवासी समाज के अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाती थीं. सोशल मीडिया के जरिए भी वह अपनी बात रखती थीं और आदिवासी समाज से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाती थीं. उनकी पहचान एक मुखर युवा आवाज के रूप में बनी थी.

निशा भगत सरकार की नीतियों और जमीन से जुड़े कथित मामलों को लेकर भी सवाल उठाती थीं. वह आदिवासी समाज के हितों की बात करते हुए प्रशासन और सरकार के सामने अपनी मांगें रखती थीं.