छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल इलाके में 28 अक्टूबर की शाम आसमान का रंग बदलने की तस्वीरों और वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आसमान गहरे लाल और नारंगी रंग का दिखाई दे रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे पूरे इलाके पर लाल रंग की चादर बिछ गई हो. सड़कें, पेड़ और पहाड़ियां भी लाल रोशनी में नहाई नजर आ रही हैं. इस अनोखे नजारे को देखकर कुछ लोग हैरान हैं तो कुछ इसे अनहोनी का इसारे बताने लगे.

इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि यह सब चक्रवात 'अर्नब' के असर से हुआ है. दरअसल, 28 अक्टूबर को चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दी थी. इसके बाद इसका कमजोर होता सिस्टम छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ा और राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या चक्रवात की वजह से ही किरंदुल का आसमान लाल दिखाई दिया? क्या तूफानी हवाएं जमीन से लाल मिट्टी उठाकर आसमान तक पहुंचा सकती हैं? और अब छत्तीसगढ़ में मौसम का हाल कैसा है? आइए पूरी कहानी समझते हैं.

दंतेवाड़ा और किरंदुल में क्या हुआ था?

28 अक्टूबर की शाम दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल और आसपास के इलाकों में आसमान का रंग सामान्य से अलग दिखाई दिया. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में आसमान में लालिमा छाई नजर आई. कुछ वीडियो में बादलों के आसपास गहरा लाल और नारंगी रंग दिखाई दे रहा है. इस रोशनी का असर आसपास के पेड़-पौधों, सड़कों और पहाड़ियों पर भी नजर आया.

इस नजारे की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर तेजी से शेयर होने लगे. कई लोगों ने इसे 'खूनी आसमान' का नाम दिया तो कुछ ने इसकी तुलना किसी दूसरी दुनिया के दृश्य से कर दी. देखते ही देखते यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर आसमान का रंग अचानक इतना लाल कैसे हो गया? हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझनी होगी. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहे रंग और घटना की वैज्ञानिक पुष्टि एक ही बात नहीं हैं. मौसम विभाग ने इन वीडियो की वास्तविकता और आसमान के कथित खूनी लाल रंग की पुष्टि नहीं की है.

क्या चक्रवात अर्नब की वजह से लाल हुआ आसमान?

इस घटना को चक्रवात अर्नब से जोड़कर देखा जा रहा है. इसकी वजह यह है कि जिस समय किरंदुल में आसमान का रंग बदला, उसी दौरान चक्रवात अर्नब का असर मध्य और पूर्वी भारत के मौसम पर पड़ रहा था. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के मुताबिक, चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यनम के तट से टकराया था. इसके बाद यह कमजोर होकर आगे बढ़ा. 29 अक्टूबर को इसका बचा हुआ सिस्टम दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर सक्रिय था. बाद में यह कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया.

चक्रवात के साथ तेज हवाएं, बादल और बारिश जैसी स्थितियां बन सकती हैं. तेज हवाएं अपने साथ धूल, रेत और मिट्टी के बारीक कणों को हवा में ऊपर उठा सकती हैं. अगर मिट्टी में आयरन ऑक्साइड यानी लोहे के ऑक्साइड की मात्रा ज्यादा हो, तो उसके लाल रंग के कण वातावरण में मौजूद धूल को लालिमा दे सकते हैं. ऐसी परिस्थितियों में सूर्य की रोशनी इन कणों से गुजरते हुए आसमान को लाल या नारंगी दिखा सकती है. हालांकि, किरंदुल में यही प्रक्रिया हुई थी, इसकी स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि चक्रवात अर्नब ने ही आसमान को लाल कर दिया.

मौसम विभाग ने लाल आसमान पर क्या कहा?

इस घटना को लेकर मौसम विभाग की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ मौसम विभाग की अधिकारी गायत्री वाणी ने कहा कि विभाग फिलहाल वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं कर सकता. वहीं, मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि सूर्यास्त के समय आसमान में ऊंचाई पर मौजूद बादलों पर सूर्य की रोशनी पड़ने से नारंगी रंग दिखाई दे सकता है. सूर्य क्षितिज के नीचे चला जाता है, लेकिन उसकी रोशनी ऊंचाई पर मौजूद बादलों तक पहुंचती रहती है. इससे आसमान में अलग-अलग रंगों की लालिमा और नारंगी चमक दिखाई दे सकती है.

भोपाल मौसम विज्ञान केंद्र के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक शैलेंद्र नायक के मुताबिक, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान में लालिमा दिखना सामान्य है, लेकिन बहुत गहरा लाल या खूनी रंग दिखाई देना असामान्य है. यानी वायरल वीडियो में दिख रहे रंग को लेकर अभी कोई अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है. मौसम विभाग ने यह भी आशंका जताई कि सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो की सत्यता की जांच जरूरी है और उनके एआई से तैयार होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

विज्ञान के मुताबिक आसमान लाल क्यों दिखाई देता है?

आसमान का रंग बदलने के पीछे सबसे अहम भूमिका सूर्य की रोशनी और वायुमंडल में मौजूद कणों की होती है. सूर्य से आने वाली रोशनी हमें सफेद दिखाई देती है, लेकिन वास्तव में इसमें कई रंग शामिल होते हैं. इनमें नीला, बैंगनी, पीला, नारंगी और लाल रंग भी होते हैं. जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती है तो हवा के अणु और धूल के कण प्रकाश को अलग-अलग दिशाओं में बिखेरते हैं. इस प्रक्रिया को प्रकाश का प्रकीर्णन यानी Scattering कहा जाता है.

दिन के समय सूर्य हमारे सिर के ऊपर होता है. उसकी रोशनी को वायुमंडल में अपेक्षाकृत कम दूरी तय करनी पड़ती है. इस दौरान नीली रोशनी ज्यादा बिखरती है और आसमान नीला दिखाई देता है. लेकिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य क्षितिज के पास होता है. तब उसकी रोशनी को वायुमंडल में ज्यादा लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. इस दौरान नीली और बैंगनी रोशनी का बड़ा हिस्सा रास्ते में ही बिखर जाता है. लाल और नारंगी रंग की लंबी तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी अपेक्षाकृत ज्यादा आगे तक पहुंचती है. यही वजह है कि सुबह और शाम के समय आसमान लालिमा लिए दिखाई देता है.

क्या है Rayleigh Scattering?

वायुमंडल में मौजूद हवा के बेहद छोटे अणुओं के कारण प्रकाश के बिखरने की प्रक्रिया को Rayleigh Scattering कहा जाता है. इस प्रक्रिया में कम तरंगदैर्ध्य वाली नीली और बैंगनी रोशनी ज्यादा बिखरती है, जबकि लाल रंग की रोशनी अपेक्षाकृत कम बिखरती है. इसी वजह से दिन में आसमान नीला और सूर्यास्त के समय लाल या नारंगी दिखाई दे सकता है. हालांकि, जब वातावरण में धूल, धुआं, धुंध और पानी की बड़ी बूंदें मौजूद हों तो प्रकाश के बिखरने का तरीका भी बदल जाता है. ऐसे में Mie Scattering जैसी दूसरी प्रक्रियाएं भी रंग और रोशनी की तीव्रता को प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए किसी खास जगह पर आसमान का रंग इतना गहरा क्यों दिखाई दिया, यह समझने के लिए उस समय की धूल, बादलों, नमी, हवा की दिशा और सूर्य की स्थिति से जुड़े आंकड़ों की जरूरत होती है.

क्या तूफान की हवाएं लाल मिट्टी को आसमान तक पहुंचा सकती हैं?

हां, तेज हवाएं जमीन से धूल और मिट्टी के कणों को उठाकर वायुमंडल में काफी ऊंचाई तक पहुंचा सकती हैं. अगर उस इलाके की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की मात्रा अधिक है तो उसके कण लाल रंग के हो सकते हैं. हवा में बड़ी मात्रा में ऐसे कण मौजूद होने पर सूर्य की रोशनी के साथ मिलकर आसमान में लाल या नारंगी रंग की चमक दिखाई दे सकती है. दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी चक्रवात से पहले या उसके दौरान लाल रंग के आसमान की घटनाएं सामने आई हैं.

NDTV की रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि चक्रवात की तेज हवाएं धूल, रेत और आयरन से भरपूर लाल मिट्टी को ऊपर उठा सकती हैं. इससे आसमान का रंग असामान्य रूप से लाल दिख सकता है. लेकिन दंतेवाड़ा और किरंदुल में यही वजह थी, यह अभी साबित नहीं हुआ है. इसके लिए स्थानीय स्तर पर हवा में मौजूद कणों और उस समय की मौसम संबंधी परिस्थितियों का वैज्ञानिक विश्लेषण जरूरी होगा.

 

अब छत्तीसगढ़ में कैसा है मौसम?

30 अक्टूबर को जारी IMD के मौसम बुलेटिन के मुताबिक, चक्रवात अर्नब का बचा हुआ सिस्टम कमजोर होकर उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे सटे पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया था. इसका असर राज्य के मौसम पर अब भी दिखाई दे रहा है. मौसम विभाग ने 30 और 31 अक्टूबर के दौरान छत्तीसगढ़ में कई जगहों पर बारिश की संभावना जताई है. 30 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच कुछ इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका भी है. वहीं, 2 नवंबर को राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है.

IMD के मुताबिक, 30 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई थी. यानी चक्रवात का कमजोर होता असर भी राज्य में बारिश के रूप में बना हुआ है. फिलहाल आसमान के लाल दिखने की घटना को लेकर सबसे अहम बात यही है कि इसका चक्रवात से सीधा संबंध प्रमाणित नहीं हुआ है. सूर्यास्त की रोशनी, बादलों की स्थिति और वातावरण में मौजूद धूल जैसे कारक ऐसी लालिमा पैदा कर सकते हैं. वायरल वीडियो ने भले ही लोगों को चौंका दिया हो, लेकिन इस नजारे की सटीक वजह जानने के लिए स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़ों और वैज्ञानिक जांच की जरूरत है.