जब 15 अगस्त को श्रीलंका ने भारत को दी थी करारी शिकस्त, 176 रन भी नहीं बना पाई थी टीम इंडिया; क्या इस बार गाले में बदलेगा इतिहास?

भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से गाले में शुरू होने वाले टेस्ट से पहले 2015 की वो ऐतिहासिक हार फिर चर्चा में है, जब टीम इंडिया 176 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सिर्फ 112 रन पर ढेर हो गई थी. दिलचस्प संयोग यह है कि श्रीलंका ने भारत को घरेलू मैदान पर आखिरी बार 15 अगस्त को इसी मैदान पर हराया था.

By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 8 Aug 2026 7:26 PM IST

भारतीय क्रिकेट टीम श्रीलंका दौरे पर है. 15 अगस्त से गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाएगा. यह तारीख सिर्फ भारत के स्वतंत्रता दिवस की वजह से खास नहीं है, बल्कि टीम इंडिया के लिए इसकी एक क्रिकेटिंग कहानी भी है. ठीक 15 अगस्त 2015 को भारत ने इसी मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट मैच गंवाया था. उस मुकाबले में टीम इंडिया को जीत के लिए सिर्फ 176 रन का लक्ष्य मिला था, लेकिन भारतीय बल्लेबाजी श्रीलंकाई स्पिनरों के सामने बिखर गई और पूरी टीम 112 रन पर ऑलआउट हो गई.

अब 11 साल बाद उसी तारीख पर गाले में फिर टेस्ट शुरू होने जा रहा है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम उस पुराने दर्द को पीछे छोड़कर इस बार जीत के साथ शुरुआत करेगी?

 

2015 में क्या हुआ था?

2015 के गाले टेस्ट में भारत ने शुरुआती तीन दिनों में मुकाबले पर अच्छी पकड़ बना रखी थी. पहली पारी में विराट कोहली ने 103 रन, जबकि शिखर धवन ने शतक लगाया था. रविचंद्रन अश्विन ने भी गेंद से शानदार प्रदर्शन किया...  लेकिन मैच के चौथे दिन कहानी पूरी तरह बदल गई. श्रीलंका ने भारत के सामने 176 रन का लक्ष्य रखा. भारत ने जब चौथे दिन अपनी दूसरी पारी दोबारा शुरू की, तब स्कोर सिर्फ एक विकेट पर 23 रन था. शिखर धवन और इशांत शर्मा क्रीज पर थे और लक्ष्य बहुत बड़ा नहीं था. 

हेराथ के सामने ढह गया भारत

लेकिन इसके बाद श्रीलंका के बाएं हाथ के स्पिनर रंगना हेराथ ने भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी. हेराथ ने सिर्फ 21 ओवर में 48 रन देकर 7 विकेट झटक लिए. थारिंदु कौशल ने भी तीन विकेट लेकर उनका साथ दिया. भारत की तरफ से अजिंक्य रहाणे ने सबसे ज्यादा 36 रन बनाए. शिखर धवन 28 रन पर आउट हुए, जबकि विराट कोहली सिर्फ 3 रन बना सके. रोहित शर्मा 4, साहा 2, हरभजन सिंह 1 और अश्विन 3 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. 

आखिरकार भारत की पूरी टीम 49.5 ओवर में 112 रन पर सिमट गई और श्रीलंका ने मुकाबला 63 रन से जीत लिया. यानी जिस लक्ष्य को भारत के लिए मुश्किल नहीं माना जा रहा था, वही लक्ष्य भारतीय बल्लेबाजों के लिए पहाड़ साबित हुआ. 

चांडीमल ने बचाई श्रीलंका की पारी

इस मुकाबले में श्रीलंका की जीत सिर्फ हेराथ की गेंदबाजी की वजह से नहीं आई थी. विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश चांडीमल ने नाबाद 162 रन की शानदार पारी खेलकर श्रीलंका को संकट से बाहर निकाला था. श्रीलंका एक समय पारी की हार के कगार पर था, लेकिन चांडीमल की पारी ने मैच का रुख बदल दिया. इसके बाद दूसरी पारी में हेराथ की फिरकी ने भारतीय बल्लेबाजों को कोई मौका नहीं दिया.  चांडीमल को उनकी निर्णायक पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. 

2008 के बाद भारत ने नहीं गंवाया एक भी टेस्ट 

गाले की उस हार के बावजूद भारत ने 2015 की सीरीज में शानदार वापसी की थी. अगले दो टेस्ट जीतकर टीम इंडिया ने सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली थी. इसके बाद श्रीलंका में भारत का टेस्ट रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है.  हालांकि भारत ने श्रीलंका में आखिरी बार टेस्ट सीरीज 2008 में गंवाई थी, जब अनिल कुंबले की कप्तानी वाली टीम को तीन मैचों की सीरीज में 1-2 से हार मिली थी. 2008 के बाद से श्रीलंका में टेस्ट सीरीज खेलने वाली भारतीय टीम हर बार सीरीज जीतकर वापस लौटी है।

2001 में भी श्रीलंका ने दी थी मात

श्रीलंका की धरती पर भारत की पिछली बड़ी टेस्ट नाकामियों में 2001 की सीरीज भी शामिल है. सौरव गांगुली की कप्तानी में खेली गई तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में श्रीलंका ने भारत को 2-1 से हराया था. श्रीलंका ने पहला टेस्ट 10 विकेट से जीता, भारत ने दूसरा मुकाबला 7 विकेट से अपने नाम कर वापसी की, लेकिन तीसरे टेस्ट में श्रीलंका ने पारी से जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम कर ली.  उस सीरीज में श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया था. 

 

अब गिल के सामने इतिहास बदलने का मौका

अब 2026 में कहानी कुछ अलग है.  भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी शुभमन गिल के हाथों में है और गाले में पहला टेस्ट 15 अगस्त से शुरू होगा. यह मुकाबला भारत के लिए सिर्फ सीरीज का पहला मैच नहीं है, बल्कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. भारत फिलहाल WTC अंक तालिका में ऐसी स्थिति में है जहां हर टेस्ट जीत काफी मायने रखती है. श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में खराब प्रदर्शन भारत की फाइनल की राह को और मुश्किल कर सकता है. 

गिल को बल्ले और कप्तानी, दोनों में दिखाना होगा दम

शुभमन गिल के सामने दोहरी चुनौती होगी. एक तरफ उन्हें बतौर बल्लेबाज रन बनाने होंगे, वहीं दूसरी तरफ कप्तान के तौर पर श्रीलंकाई परिस्थितियों में सही रणनीति बनानी होगी. गाले की पिच पर स्पिनरों की भूमिका अहम हो सकती है और 2015 में भारत को इसी विभाग ने सबसे ज्यादा परेशान किया था. इसलिए इस बार भारतीय टीम को सिर्फ बल्लेबाजी नहीं, बल्कि परिस्थितियों को पढ़ने और सही संयोजन चुनने पर भी ध्यान देना होगा. 

15 अगस्त 2015 की वही तारीख, वही गाले और सामने फिर श्रीलंका...  फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार भारतीय टीम की कमान शुभमन गिल के हाथों में है.  11 साल पुरानी कहानी का नया अध्याय क्या होगा, इसका जवाब टेस्ट शुरू होने के बाद ही मिलेगा. 

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