IND vs WI 2nd T20I: 5 रन पर 2 विकेट से 250 रन की ऐतिहासिक चेज तक, वेस्टइंडीज ने भारत को कैसे चौंकाया? 10 Points में जानें
भारत ने 250 रन का विशाल लक्ष्य रखा, लेकिन शाई होप और शेरफेन रदरफोर्ड की विस्फोटक बल्लेबाजी ने वेस्टइंडीज को ऐतिहासिक जीत दिला दी. इस मुकाबले में 501 रन बने और 79 बाउंड्री लगीं, जबकि शाई होप ने 45 गेंदों में शतक जड़कर भारत के खिलाफ संयुक्त रूप से सबसे तेज T20I शतक का रिकॉर्ड बनाया.
IND vs WI 2nd T20I Highlights: भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया दूसरा T20I मुकाबला सिर्फ बड़े स्कोर और छक्कों के लिए याद नहीं रखा जाएगा. यह मैच इस बात की मिसाल भी बना कि क्रिकेट में शुरुआती झटकों के बाद भी मुकाबला कैसे पलटा जा सकता है. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 250 रन का विशाल लक्ष्य दिया. जवाब में वेस्टइंडीज की शुरुआत इतनी खराब रही कि जीत दूर की बात, मैच में वापसी करना भी मुश्किल दिखाई दे रहा था.
टीम ने महज 5 रन पर 2 विकेट गंवा दिए थे... लेकिन इसके बाद शाई होप और शेरफेन रदरफोर्ड ने ऐसा खेल दिखाया कि भारतीय गेंदबाजों के पास उनकी रफ्तार रोकने का कोई आसान रास्ता नहीं बचा. वेस्टइंडीज ने 9 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया. इस जीत के साथ उसने पुरुष T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रन चेज दर्ज किया. मैच में कुल 501 रन बने और बल्लेबाजों ने 79 बाउंड्री लगाईं. मुकाबले का रुख कई बार बदला, लेकिन आखिर में वेस्टइंडीज की साझेदारियां, आक्रामक बल्लेबाजी और दबाव में शांत रहने की क्षमता भारत पर भारी पड़ी.
IND vs WI 2nd T20I की 10 बड़ी बातें
1. भारत के 250 रन भी क्यों नहीं पड़े भारी?
250 रन का लक्ष्य किसी भी T20 मैच में बड़ा स्कोर माना जाता है. ऐसे लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम पर शुरुआत से ही रन गति बनाए रखने का दबाव रहता है. शुरुआती विकेट गिरने पर यह दबाव और बढ़ जाता है, क्योंकि नए बल्लेबाजों को पारी संभालने के साथ बड़े शॉट भी खेलने पड़ते हैं... लेकिन इस मुकाबले में भारत के सामने चुनौती सिर्फ वेस्टइंडीज के बल्लेबाज नहीं थे.
दूसरी पारी में ओस ने भी गेंदबाजी को मुश्किल बनाया. भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने मैच के बाद कहा कि ओस आने पर यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि कितना स्कोर पर्याप्त होगा. उनके मुताबिक, इस पिच पर गलती की गुंजाइश बहुत कम थी. अय्यर ने वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप और शेरफेन रदरफोर्ड की तारीफ की और माना कि उनकी साझेदारी के बाद मैच का मोमेंटम विपक्षी टीम की ओर चला गया. यानी भारत ने बड़ा स्कोर जरूर बनाया, लेकिन लक्ष्य का बचाव करने के लिए उसे गेंदबाजी में लगातार सटीक रहना था. वेस्टइंडीज ने यही दबाव भारतीय टीम पर वापस डाल दिया.
2. 5 रन पर 2 विकेट: क्या यहीं खत्म हो गई थी वेस्टइंडीज की उम्मीद?
वेस्टइंडीज की पारी की शुरुआत भारत के लिए सपने जैसी रही. मयंक यादव ने शुरुआती झटके देकर मेहमान टीम को 5 रन पर 2 विकेट की स्थिति में पहुंचा दिया. वह हैट्रिक के करीब भी पहुंच गए थे. इतनी बड़ी चेज में शुरुआती विकेट गिरने का मतलब होता है कि बचे हुए बल्लेबाजों को सिर्फ तेजी से रन नहीं बनाने, बल्कि विकेट भी बचाकर रखने होते हैं.
ऐसी परिस्थिति में बल्लेबाजी करने वाली टीम के सामने दो रास्ते होते हैं-या तो विकेट बचाने के लिए रन गति कम कर दे, या जोखिम लेकर मैच में बने रहने की कोशिश करे. वेस्टइंडीज ने इन दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की. रोवमैन पॉवेल और शाई होप ने शुरुआती संकट से निकलने के लिए साझेदारी की. इससे टीम को फिर से लक्ष्य की ओर देखने का मौका मिला.
होप ने मैच के बाद माना कि 5 रन पर 2 विकेट गिरने के बाद चेज मुश्किल लग रही थी, लेकिन जब उनकी और पॉवेल की साझेदारी बनी, तो टीम को भरोसा लौटने लगा. उनके मुताबिक, बड़े लक्ष्य का पीछा करने में साझेदारियां बेहद जरूरी हैं. वेस्टइंडीज की वापसी की शुरुआत इसी भरोसे से हुई.
3. शेरफेन रदरफोर्ड ने कैसे बदल दिया मैच का रुख?
- इस मुकाबले का सबसे विस्फोटक मोड़ शेरफेन रदरफोर्ड की बल्लेबाजी से आया. पांचवें नंबर पर उतरे रदरफोर्ड ने भारतीय गेंदबाजों को खुलकर निशाना बनाया.उनका उद्देश्य सिर्फ क्रीज पर टिके रहना नहीं था, बल्कि तेजी से रन बनाकर जरूरी रन गति को नियंत्रण में रखना था.
- रदरफोर्ड ने मैच के बाद बताया कि जब वह शाई होप के साथ बल्लेबाजी करने आए तो उनकी बातचीत का मुख्य मुद्दा ज्यादा से ज्यादा गेंदें खेलने और साझेदारी को आगे बढ़ाने का था. उन्होंने अपनी स्वाभाविक आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी, जबकि होप दूसरे छोर पर टिककर पारी को संभालते रहे.
- रदरफोर्ड की बल्लेबाजी की खासियत यह थी कि उनका आक्रामक रवैया बिना सोचे-समझे शॉट खेलने जैसा नहीं था. उन्होंने कहा कि सकारात्मक इरादे का मतलब लापरवाही नहीं है. बल्लेबाज को सही स्थिति में रहकर खराब गेंदों का फायदा उठाना चाहिए. उनकी इसी रणनीति ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया.
- एक तरफ रदरफोर्ड बड़े शॉट लगा रहे थे, दूसरी तरफ होप ने दूसरे छोर पर पारी को स्थिरता दी. रदरफोर्ड ने माना कि होप के क्रीज पर रहने से उन्हें खुलकर खेलने की आजादी मिलती है, क्योंकि उन्हें भरोसा था कि होप पारी को अंत तक ले जाने की क्षमता रखते हैं. यह साझेदारी केवल रन बनाने की साझेदारी नहीं थी; इसने वेस्टइंडीज को विश्वास दिलाया कि 250 रन का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
4. शाई होप का शतक: आक्रामकता के साथ धैर्य का मेल
- शाई होप की पारी की अहमियत सिर्फ उनके शतक में नहीं थी. उन्होंने उस पारी में टीम की जरूरत के हिसाब से बल्लेबाजी की.
- जब रदरफोर्ड तेजी से रन बना रहे थे, तब होप ने दूसरे छोर पर पारी को संभालने की भूमिका निभाई. जरूरत पड़ने पर उन्होंने भी रफ्तार बढ़ाई और अंत तक लक्ष्य के करीब पहुंचने की जिम्मेदारी निभाई.
- होप ने 45 गेंदों में शतक पूरा किया. यह वेस्टइंडीज की ओर से पुरुष T20I में दूसरा सबसे तेज शतक है. इस पारी के साथ वह भारत के खिलाफ T20I में सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में संयुक्त रूप से शीर्ष पर पहुंच गए.
- जैकब बेथेल ने भी 2026 T20 विश्व कप के दौरान वानखेड़े स्टेडियम में भारत के खिलाफ 45 गेंदों में शतक बनाया था.
- होप ने अपनी पारी का अंत छक्के से किया. अक्षर पटेल की गेंद पर लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से लगाया गया उनका शॉट सिर्फ मैच खत्म करने वाला शॉट नहीं था, बल्कि ऐतिहासिक रन चेज पर मुहर भी था.
- इसके बाद होप ने जोश के साथ जश्न मनाया और अपने साथी के साथ जीत की खुशी साझा की.
- यह उनका दूसरा T20I शतक भी था. वेस्टइंडीज के लिए T20I में दो-दो शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में अब क्रिस गेल, एविन लुईस और शाई होप शामिल हैं.
5. रदरफोर्ड के आउट होने के बाद भी भारत वापसी क्यों नहीं कर पाया?
रदरफोर्ड का विकेट भारत के लिए राहत का मौका था, लेकिन मैच पूरी तरह उसकी पकड़ में वापस नहीं आया. इसके बाद रोमारियो शेफर्ड बल्लेबाजी करने उतरे. गेंदबाजी के दौरान चोट या परेशानी के कारण मैदान छोड़ने वाले शेफर्ड ने बल्लेबाजी में भी आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने रन गति बनाए रखने के लिए बड़े शॉट खेले. इससे भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बना रहा और वेस्टइंडीज को अंतिम चरण में लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद मिली.
भारतीय गेंदबाजी के लिए मुश्किल यह थी कि अब केवल एक बल्लेबाज को रोकना पर्याप्त नहीं था. हर नए बल्लेबाज को तेजी से रन बनाने का भरोसा था. ओस ने भी गेंद को नियंत्रित करने और सही लाइन-लेंथ पर गेंदबाजी करने की चुनौती बढ़ा दी. बड़े लक्ष्य का पीछा कर रही टीम के पास जब लगातार बाउंड्री लगाने वाले बल्लेबाज हों, तो गेंदबाजों के लिए छोटी-सी चूक भी महंगी पड़ सकती है. इस मैच में भारत को इसी स्थिति का सामना करना पड़ा.
6. 500 से ज्यादा रन और 79 बाउंड्री: कितने रिकॉर्ड बने?
- यह मुकाबला व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ-साथ आंकड़ों के लिहाज से भी खास रहा. दोनों टीमों ने मिलकर 501 रन बनाए. पुरुष T20I में इससे ज्यादा कुल रन वाले मुकाबले बहुत कम हुए हैं.
- इस सूची में दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के बीच 2009 में सेंचुरियन में खेला गया मैच 517 रन के साथ शीर्ष पर है.
- इस मैच में कुल 79 बाउंड्री लगीं- 46 चौके और 33 छक्के. पुरुष T20I में बाउंड्री की संख्या के लिहाज से यह सबसे बड़े मुकाबलों में शामिल हो गया.
- दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के 2023 के सेंचुरियन मैच में 81 बाउंड्री लगी थीं, जबकि बुल्गारिया और जिब्राल्टर के 2025 के मैच में 80 बाउंड्री दर्ज हुई थीं.
- एक और बड़ा रिकॉर्ड सफल रन चेज का रहा. वेस्टइंडीज ने 250 रन का लक्ष्य हासिल करके पुरुष T20I में अपना सबसे बड़ा सफल पीछा दर्ज किया.
- हालांकि, पुरुष T20I का सर्वाधिक सफल रन चेज अब भी दक्षिण अफ्रीका के नाम है, जिसने 2023 में सेंचुरियन में वेस्टइंडीज के खिलाफ 259 रन का लक्ष्य हासिल किया था.
7. रोस्टन चेज की गेंदबाजी: बड़े स्कोर वाले मैच में सबसे अलग प्रदर्शन
जब दोनों टीमों के बल्लेबाज मिलकर 500 से ज्यादा रन बना रहे हों, तब गेंदबाज के लिए रन रोकना बेहद मुश्किल होता है. ऐसे मुकाबले में रोस्टन चेज का प्रदर्शन खास रहा. उन्होंने चार ओवर में सिर्फ 24 रन देकर तीन बड़े विकेट लिए.
यह आंकड़ा इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि मैच में ओस का असर था और गेंदबाजों के लिए पकड़ बनाना मुश्किल हो सकता था. चेज ने इसके बावजूद रन गति पर नियंत्रण रखने और अहम विकेट निकालने में सफलता हासिल की. बल्लेबाजों के दबदबे वाले मैच में उनका प्रदर्शन वेस्टइंडीज के लिए महत्वपूर्ण रहा.
हालांकि, वेस्टइंडीज की जीत की कहानी सिर्फ एक गेंदबाज या दो बल्लेबाजों तक सीमित नहीं थी. चेज ने गेंद से योगदान दिया, जबकि होप और रदरफोर्ड ने लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया. यही क्रिकेट की खूबसूरती है—एक ही मैच में अलग-अलग खिलाड़ियों का योगदान नतीजे को बदल सकता है.
8. रदरफोर्ड का लक्ष्य: T20 का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनना
मैच के बाद रदरफोर्ड ने बताया कि उन्होंने खुद से वादा किया है कि वह T20 क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे की मेहनत अब मैदान पर दिखाई देने लगी है. उनके मुताबिक, इस साल का प्रदर्शन खुद उनके लिए भी सुखद रहा है.
रदरफोर्ड ने शाई होप की भी जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि होप लगातार जिस स्थिरता से बल्लेबाजी करते हैं, उससे उन्हें प्रेरणा मिलती है. वह नेट्स में भी होप को ध्यान से देखते हैं और उनसे सीखने की कोशिश करते हैं. रदरफोर्ड के अनुसार, होप को उनके प्रदर्शन के लिए पर्याप्त श्रेय नहीं मिलता, जबकि वह वेस्टइंडीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं. .
9. इस मैच से भारत को क्या सबक मिला?
भारत के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि T20 क्रिकेट में बड़ा स्कोर बनाने के बाद भी जीत की गारंटी नहीं होती. पिच, ओस, बल्लेबाजों की शैली और साझेदारियां लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को मैच में बनाए रख सकती हैं. 250 रन का लक्ष्य बड़ा जरूर था, लेकिन वेस्टइंडीज ने दिखाया कि सही रणनीति और लगातार आक्रामकता से इसे हासिल किया जा सकता है.
भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी स्वीकार किया कि इस पिच पर गलती की गुंजाइश बहुत कम थी. ऐसे हालात में गेंदबाजों को सिर्फ विकेट लेने की कोशिश नहीं करनी होती, बल्कि रन गति पर नियंत्रण और परिस्थितियों के अनुसार योजना में बदलाव भी करना होता है.
वेस्टइंडीज के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली रही. शुरुआती दो विकेट जल्दी गंवाने के बाद भी टीम ने घबराने के बजाय साझेदारियों पर भरोसा किया. होप ने पारी को संभाला, रदरफोर्ड ने रन गति बढ़ाई और शेफर्ड ने अंतिम चरण में आक्रामकता बनाए रखी.
10- संजू सैमसन की तूफानी पारी पर फिरा पानी
भारत की ओर से संजू सैमसन ने 82, ईशान किशन ने 43 और श्रेयस अय्यर ने 40 रन बनाए. वहीं, तिलक वर्मा 44 और नमन धीर 4 रन बनाकर नाबाद रहे. सैमसन ने 41 गेंद की अपनी पारी में 4 छक्के और 9 चौके लगाए. वहीं, तिलक ने 18 की पारी में 3 छक्के और 3 चौके जड़े.
मैच तब तक खत्म नहीं होता, जब तक आखिरी रन नहीं बन जाता
5 रन पर 2 विकेट से शुरू हुई वेस्टइंडीज की पारी आखिरकार 250 रन के ऐतिहासिक सफल रन चेज में बदल गई. शाई होप का 45 गेंदों में शतक, शेरफेन रदरफोर्ड की विस्फोटक बल्लेबाजी और रोस्टन चेज की किफायती गेंदबाजी इस जीत के सबसे अहम पहलू रहे. 501 रन और 79 बाउंड्री वाले इस मुकाबले ने एक बार फिर दिखाया कि T20 क्रिकेट में मैच तब तक खत्म नहीं होता, जब तक आखिरी रन नहीं बन जाता.