Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि पर अष्टमी-नवमी पर क्यों है कन्या पूजन का महत्व?

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में कन्या पूजन का क्या महत्व है? जानें 1 से 9 कन्याओं की पूजा से मिलने वाले फल और किस उम्र की कन्या का क्या महत्व होता है.

( Image Source:  Sora_ AI )
By :  State Mirror Astro
Updated On : 22 March 2026 12:00 PM IST

इस समय चैत्र नवरात्रि का पवित्र पर्व जारी है, जो 27 मार्च तक चलेगा. हर दिन माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा-आराधना का खास महत्व होता है. नवरात्रि के अष्टमी-नवमी तिथि कन्या पूजन का विशेष स्थान माना गया है.

वैसे तो पूरे नवरात्रि में किसी भी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है, लेकिन अष्टमी और नवमी के दिन इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इन तिथियों पर मां दुर्गा के भक्त अपने घरों में छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन कर उन्हें देवी स्वरूप मानकर उनका आशीर्वाद लेते हैं. आइए जानते हैं नवरात्रि पर कन्या पूजन का महत्व.

नवरात्रि पर कन्या पूजन क्यों है जरूरी?

हिंदू धर्म में कन्या को सृजन और शक्ति का प्रतीक माना गया है. शास्त्रों के अनुसार कन्याएं मां दुर्गा का ही रूप होती हैं. नवरात्रि में उपवास, पूजा-पाठ और हवन करने के बाद भी यदि कन्या पूजन न किया जाए, तो साधना अधूरी मानी जाती है. मान्यता है कि कन्या पूजन से देवी मां जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को विशेष कृपा प्रदान करती हैं.

कितनी कन्याओं की पूजा से क्या मिलता है फल ?

धार्मिक मान्यता के अनुसार अलग-अलग संख्या में कन्याओं की पूजा करने से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं.

  • -एक कन्या की पूजा से धन और ऐश्वर्य मिलता है.
  • -दो कन्याओं से सुख-सुविधाएं बढ़ती हैं.
  • -तीन कन्याओं से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
  • -चार और पांच कन्याओं की पूजा से बुद्धि और विद्या मिलती है.
  • -छह कन्याओं से कार्यों में सफलता मिलती है.
  • -सात कन्याओं से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है.
  • -आठ कन्याओं से अष्टलक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है.
  • -नौ कन्याओं की पूजा से हर प्रकार का सुख और समृद्धि प्राप्त होती है.

किस उम्र की कन्या का क्या महत्व है ?

शास्त्रों में 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को पूजन के योग्य बताया गया है और हर आयु का अपना विशेष महत्व होता है.

2 वर्ष की कन्या (कुमारी रूप): इस आयु की कन्या पूजन करने से दुख और गरीबी दूर होती है.

3 वर्ष की कन्या (त्रिमूर्ति रूप): 3 वर्ष की आयु की कन्या पूजन नवरात्रि पर करने से धन और वैभव की प्राप्ति होती है.

4 वर्ष की कन्या (कल्याणी रूप): नवरात्रि पर इस आयु की कन्या पूजन करने से जीवन में उन्नति और सफलता मिलती है.

5 वर्ष की कन्या (रोहिणी रूप): इस आयु की कन्या पूजन करने से व्यक्ति के रोग और कष्ट समाप्त होते हैं

6 वर्ष की कन्या (कालिका रूप): इस आयु की कन्या पूजन करने से ज्ञान और यश मिलता है.

7 वर्ष की कन्या (चंडिका रूप): इस आयु की तक की कन्या पूजन करने पर भक्तों का धन और वैभव बढ़ता है.

8 वर्ष की कन्या (शाम्भवी रूप): 8 वर्ष की कन्या पूजन करने से न्याय और संघर्षों में जीत मिलती है.

9 वर्ष की कन्या (दुर्गा रूप): 9 वर्ष की कन्या पूजन करने पर जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता मिलती है.

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