माघ पूर्णिमा पर रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग, जानिए इस पर्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
माघ पूर्णिमा इस बार बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. मान्यता है कि ऐसे शुभ योग में स्नान, दान और पूजा करने से कई गुना अधिक पुण्य फल मिलता है.;
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(Image Source: AI SORA )रविवार, 01 फरवरी को माघी पूर्णिमा है. हिंदू धर्म में माघी पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. माघी पूर्णिमा के साथ माघ का पवित्र महीन खत्म हो जाएगा और फाल्गुन का महीना शुरू होगा. इस वर्ष माघी पूर्णिमा पर रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है. ऐसे में माघी पूर्णिमा का महत्व काफी बढ़ गया है.
रविवार और माघी पूर्णिमा के योग में गंगा स्नान, दान और पूजा-पाठ का महत्व काफी बढ़ गया है. माघी पूर्णिमा के साथ ही तीर्थराज प्रयाग में चल रहे माघ मेले में कल्पवास खत्म होगा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा पर दान-स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है. आइए जानते हैं माघी पूर्णिमा तिथि, महत्व और दान-स्नान का महत्व.
माघी पूर्णिमा तिथि 2026
पंचांग के अनुसार, माघ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 01 फरवरी को सुबह 5 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी जिसका समापन 2 फरवरी को सुबह 3 बजकर 38 मिनट पर होगा. ऐसे में माघी पूर्णिमा रविवार, 01 फरवरी को मनाई जाएगी.
शुभ योग
इस वर्ष माघ पूर्णिमा पर कई तरह के शुभ योगों का निर्माण हो रहा है. माघ पूर्णिमा के दिन रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग और आयुष्मान योग बन रहा है. वहीं इसके अलावा चतुर्ग्रही योग भी रहेगा. ऐसे में माघी पूर्णिमा पर दान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होगा.
स्नान और दान का मुहूर्त
माघी पूर्णिमा पर स्नान और दान का खास महत्व होता है. माघी पूर्णिमा पर स्नान करने का सबसे अच्छा मुहूर्त ब्रह्रा मुहूर्त होता है, जिसमें स्नान करना बहुत लाभकारी साबित होता है. ऐसे में स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा.
क्या करें दान
माघी पूर्णिमा के साथ ही माघ का महीना खत्म हो जाता है और फाल्गुन शुरू हो जाता है. ऐसे में में माघ पूर्णिमा पर दान करने का खास महत्व होता है. माघ पूर्णिमा के दिन तिल, गुड़ कपड़े, घी, अनाज और फल का दान करना बहुत ही पुण्य और लाभकारी रहेगा.
माघ पूर्णिमा पूजा विधि
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है. माघ के महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस तिथि पर स्नान और दान करने का बहुत ही खास महत्व होता है. इस दिन गंगा स्नान करना बहुत ही पुण्यकारी होता है. विशेष रूप से तीर्थराज प्रयागराज में एक माह तक चलने वाले माघ मेले पर स्नान करने का महत्व होता है. लेकिन अगर किसी कारण से पवित्र नदी में स्नान करना संभव ना हो तो स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर स्नान करना बहुत ही लाभकारी साबित होगा. स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, अक्षत, रौली, सिंदूर, और लाल पुष्प के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें और ऊं सूर्याय नम: मंत्र का जाप करना अच्छा रहता है.