कन्याकुमारी से लेकर असम तक, भारत के इन मंदिरों में नहीं कर सकते पुरुष दर्शन, जानें कारण

भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जहां परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के चलते पुरुषों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है. कन्याकुमारी से लेकर असम तक फैले ये मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए जाने जाते हैं, जहां खास मौकों पर केवल महिलाओं को ही पूजा-अर्चना की अनुमति होती है.

इन मंदिरों में है पुरुषों की एंट्री बैन

(Image Source:  ANI )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 10 April 2026 4:28 PM IST

भारत आस्था और परंपराओं का देश है, जहां हर मंदिर अपनी अलग पहचान, मान्यता और नियमों के लिए जाना जाता है. यहां पूजा-पद्धति से लेकर मंदिरों में प्रवेश के नियम तक, हर चीज के पीछे कोई न कोई धार्मिक या सांस्कृतिक कारण जुड़ा होता है. आमतौर पर मंदिरों में सभी भक्तों के लिए प्रवेश खुला रहता है, लेकिन देश में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जहां विशेष अवसरों या परंपराओं के चलते पुरुषों के प्रवेश पर रोक लगाई जाती है.

इन नियमों के पीछे अलग-अलग धार्मिक कारण और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं, जैसे देवी की तपस्या, स्त्री शक्ति का सम्मान या विशेष पूजा-पद्धति. इन मंदिरों की परंपराएं न सिर्फ आस्था को दिखाती हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति की विविधता और गहराई को भी उजागर करती हैं.

कामाख्या मंदिर, असम

असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर शक्ति पीठों में से एक प्रमुख मंदिर है. यहां हर साल ‘अंबुबाची’ पर्व मनाया जाता है, जो देवी के वार्षिक मासिक धर्म से जुड़ा होता है. इस दौरान मंदिर कुछ दिनों के लिए बंद रहता है और इस समय पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित होता है. केवल महिला पुजारियां ही मंदिर की सेवा करती हैं. यह परंपरा स्त्री शक्ति और प्रकृति के चक्र को सम्मान देने का प्रतीक है.

ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर

राजस्थान के पुष्कर में स्थित ब्रह्मा मंदिर भारत का एकमात्र प्रमुख मंदिर है जो भगवान ब्रह्मा को समर्पित है. इस मंदिर से जुड़ी मान्यता बेहद रोचक है. कहा जाता है कि विवाहित पुरुष यदि इस मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते हैं, तो उनके वैवाहिक जीवन में बाधाएं आ सकती हैं. इसी कारण शादीशुदा पुरुषों को मंदिर के अंदर जाने से रोका जाता है. यह परंपरा आज भी श्रद्धालुओं द्वारा मानी जाती है.

अट्टुकल भगवती मंदिर, केरल

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित अट्टुकल भगवती मंदिर दुनिया भर में अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यहां हर साल ‘अट्टुकल पोंगाला’ नाम का एक भव्य उत्सव आयोजित होता है, जिसमें लाखों महिलाएं एक साथ देवी को प्रसाद चढ़ाती हैं. इस आयोजन ने ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में भी जगह बनाई है, क्योंकि यह महिलाओं की सबसे बड़ी धार्मिक सभा मानी जाती है. इस खास दिन मंदिर परिसर में पुरुषों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक होती है. यह परंपरा महिलाओं की शक्ति और उनकी आस्था को सम्मान देने के लिए निभाई जाती है.

चक्कुलाथुकावु मंदिर, केरल

केरल का चक्कुलाथुकावु मंदिर देवी भगवती को समर्पित है और यहां हर साल ‘नारी पूजा’ का आयोजन किया जाता है. इस विशेष अवसर पर महिलाएं 10 दिनों का व्रत रखती हैं और फिर मंदिर में विशेष पूजा करती हैं. इस दिन एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें पुरुष पुजारी महिलाओं के पैर धोते हैं. यह महिलाओं के सम्मान और उनके त्याग को दर्शाने का प्रतीक है. ‘नारी पूजा’ के दौरान मंदिर में पुरुषों का प्रवेश वर्जित होता है और पूरा परिसर केवल महिलाओं के लिए आरक्षित रहता है.

भगवती अम्मन मंदिर, कन्याकुमारी

तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित भगवती अम्मन मंदिर देवी कुमारी को समर्पित है, जिन्हें तपस्विनी देवी माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. इसी वजह से इस मंदिर में विवाहित पुरुषों के प्रवेश पर रोक है, जबकि अविवाहित पुरुष केवल मंदिर के प्रवेश द्वार तक ही जा सकते हैं. यह परंपरा देवी की तपस्या और उनके संन्यास स्वरूप का सम्मान करने के लिए निभाई जाती है.

कोट्टनकुलंगारा श्री देवी मंदिर, केरल

केरल का कोट्टनकुलंगारा श्री देवी मंदिर अपनी अनोखी परंपरा ‘चमयाविलक्कु’ के लिए प्रसिद्ध है. इस परंपरा में पुरुष महिलाएं बनकर यानी साड़ी पहनकर और श्रृंगार करके देवी की पूजा करते हैं. यह परंपरा समाज में लिंग भेद को खत्म करने और देवी के सामने सभी को समान मानने का संदेश देती है. यहां छोटे लड़के भी इस परंपरा में हिस्सा लेते हैं और देवी से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

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