पीरियड आते ही क्यों बदल जाती है बॉडी की स्मेल? Body Odour से जुड़ा ये साइंस नहीं जानते होंगे आप
कई महिलाएं यह महसूस करती हैं कि पीरियड्स आते ही उनकी बॉडी ओडर में बदलाव आता है. यह आपके शरीर का बिल्कुल नेचुरल रिएक्शन है, जो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के कारण होता है.
पीरियड आते ही क्यों बदल जाता है Body Odour
(Image Source: AI SORA )पीरियड शुरू होते ही शरीर की स्मेल में बदलाव कई महिलाओं को महसूस होता है, लेकिन इसके पीछे की असली वजह कम ही लोग जानते हैं. यह बदलाव किसी हाइजीन की कमी नहीं, बल्कि शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव का नतीजा होता है. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन पीरियड्स के दौरान शरीर के तापमान, पसीने और पीएच लेवल को प्रभावित करते हैं, जिससे बदबू में फर्क आना बिल्कुल नॉर्मल है.
दरअसल, पीरियड के समय ब्लड फ्लो, बैक्टीरिया और पसीने का कॉम्बिनेशन बॉडी ओडर को थोड़ा अलग बना देता है. यही कारण है कि कभी यह स्मेल मेटैलिक तो कभी हल्की मस्की महसूस होती है.
पीरियड में स्मेल बदलने की असली वजह क्या है?
पीरियड्स के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन ऊपर-नीचे होते रहते हैं. ये हार्मोन सिर्फ पीरियड्स को ही नहीं, बल्कि शरीर के कई फंक्शन्स को प्रभावित करते हैं, जैसे पसीना आना, बॉडी टेम्परेचर और त्वचा की एक्टिविटी. पीरियड के समय जब ब्लड बाहर आता है, तो उससे वेजाइना का पीएच थोड़ा बदल जाता है. इस बदलाव की वजह से स्मेल थोड़ी अलग महसूस हो सकती है. कई महिलाओं को यह स्मेल हल्की मेटैलिक (लोहे जैसी) या मिट्टी जैसी लगती है, जो पूरी तरह सामान्य है.
पसीना और बैक्टीरिया कैसे बढ़ाते हैं स्मेल?
हमारे शरीर में कुछ खास स्वेट ग्लैंड्स होते हैं, खासकर अंडरआर्म्स और प्राइवेट एरिया में. पीरियड्स के दौरान ये ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं. जब पसीना त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया से मिलता है, तो स्मेल तेज हो सकती है. इसका मतलब यह नहीं कि आपकी हाइजीन खराब है. बल्कि यह शरीर का एक नॉर्मल प्रोसेस है, जिसे समझना ज्यादा जरूरी है.
पीरियड से पहले स्मेल क्यों ज्यादा लगती है?
पीरियड शुरू होने से पहले का समय (जिसे ल्यूटल फेज कहते हैं) में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाता है. इससे शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ता है, और शरीर ज्यादा पसीना छोड़ता है. साथ ही, इस दौरान आपकी सूंघने की क्षमता भी तेज हो जाती है. यानी जो ओडर पहले हल्की लगती थी, वही अब ज्यादा महसूस हो सकती है. इसलिए कई बार ऐसा लगता है कि स्मेल बहुत बढ़ गई है, जबकि असल में आपकी सेंसिटिविटी बढ़ी होती है.
ओव्यूलेशन के समय क्या होता है?
मेंस्ट्रुअल साइकिल के बीच में यानी ओव्यूलेशन के दौरान बॉडी ओडर थोड़ी अलग और हल्की मीठी या मस्की हो सकती है. रिसर्च बताती है कि इस समय शरीर की खुशबू एक तरह का नेचुरल सिग्नल भी होती है, जो फर्टिलिटी से जुड़ा होता है. यानी शरीर हर फेज में अलग तरीके से काम करता है, और गंध उसी का हिस्सा है.
नॉर्मल पीरियड स्मेल कैसी होती है?
- हल्की मेटैलिक (लोहे जैसी)
- मिट्टी जैसी
- हल्की मस्की
- ये सभी गंध सामान्य हैं और हर महिला में थोड़ी अलग हो सकती हैं.
- लेकिन अगर बदबू बहुत तेज, मछली जैसी या बदबूदार लगे, और साथ में खुजली, जलन या अजीब डिस्चार्ज हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
पीरियड में स्मेल को कैसे मैनेज करें?
- एक ही पैड लंबे समय तक पहनने से नमी और बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जिससे स्मेल तेज हो जाती है. हर 4-6 घंटे में बदलाव करना बेहतर है.
- कॉटन कपड़ा हवा पास होने देता है और नमी को कम करता है. टाइट और सिंथेटिक कपड़े गंध को बढ़ा सकते हैं.
- इंटिमेट एरिया को साफ करने के लिए सिर्फ गुनगुना पानी काफी है. ज्यादा साबुन या फ्रेग्रेंस प्रोडक्ट पीएच बिगाड़ सकते हैं और ओडर बढ़ा सकते हैं.
- पीरियड्स के दौरान अंडरआर्म्स में भी पसीना बढ़ता है. ऐसे में हल्के और स्किन-फ्रेंडली डियोड्रेंट का इस्तेमाल करें.
- हाइड्रेशन शरीर को बैलेंस रखता है और पसीने की गंध को कंट्रोल करने में मदद करता है.
- लहसुन, प्याज और बहुत मसालेदार चीजें पसीने की स्मेल को बढ़ा सकती हैं. हल्का और बैलेंस्ड डाइट बेहतर रहता है.
क्या पूरी तरह ओडर खत्म करना जरूरी है?
शरीर की एक नेचुरल स्मेल होती है, जो हर फेज में बदलती रहती है. इसे पूरी तरह खत्म करना जरूरी नहीं है. जरूरी यह है कि आप खुद को साफ, कंफर्टेबल और हेल्दी महसूस करें. पीरियड्स के दौरान सेल्फ-केयर का मतलब शरीर को समझना और सपोर्ट करना है, न कि उसे बदलना.
कब सावधान होने की जरूरत है?
अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से जरूर मिलें:
- बहुत तेज या बदबूदार गंध
- मछली जैसी स्मेल
- खुजली, जलन या दर्द
- असामान्य डिस्चार्ज
- ये किसी इंफेक्शन के साइन हो सकते हैं.
पीरियड्स के दौरान बॉडी ओडर में बदलाव पूरी तरह नॉर्मल है. यह आपके शरीर के हार्मोन, पीएच लेवल और नैचुरल प्रोसेस का हिस्सा है. इसे समझना जरूरी है, ताकि बेवजह चिंता करने की बजाय आप अपने शरीर के साथ बेहतर तालमेल बना सकें.