500 साल पहले ऐसे बनता था समोसा! शाही रसोई से निकलकर स्ट्रीट फूड बनने तक की हैरान कर देने वाली कहानी
आज जो समोसा हर गली में मिलता है, वह कभी राजमहलों की शाही डिश हुआ करता था. 500 साल पुरानी रेसिपी में आलू नहीं, बल्कि मटन और बैंगन का इस्तेमाल होता था.
भारत समेत पूरी दुनिया में समोसा अपने अनोखे स्वाद और बनावट के लिए बहुत मशहूर है. भारत के हर शहर, हर कस्बे और हर गली में सुबह-सुबह आपको समोसे की दुकानों पर यह गरम-गरम और कुरकुरा नाश्ता आसानी से मिल जाता है. लोग चाय के साथ इसे बड़े चाव से खाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आज जो कुछ रुपयों में मिलने वाला यह आम स्ट्रीट फूड है, वह अपने शुरुआती दिनों में कैसे बनाया जाता था? यह आज का सस्ता और सरल समोसा कभी राजमहलों की शाही रसोई में बनने वाला एक खास और महंगा व्यंजन हुआ करता था.
समय के साथ यह शाही खाने से निकलकर आम लोगों की थाली तक पहुंचा और आज हर भारतीय का सबसे पसंदीदा नाश्ता बन गया है. सोशल मीडिया पर हाल ही में एक पोस्ट बहुत वायरल हो रहा है. इस पोस्ट के अनुसार, हमारे प्यारे समोसे की जड़ें लगभग 500 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं. एक प्राचीन फारसी किताब 'नि, मतनामा' नाम के पांडुलिपि में समोसे की शुरुआती रेसिपी का जिक्र मिलता है. इस पुरानी किताब में विस्तार से बताया गया है कि आज जो हम जल्दी-जल्दी आलू भरकर समोसा बनाते हैं, वह समोसा कभी एक राजसी और शानदार पकवान हुआ करता था.
500 साल पुरानी समोसे की रेसिपी
एक्स हैंडल पर शेयर किए गए इस पोस्ट में 500 साल पुरानी समोसे की रेसिपी बताई गई है. यह रेसिपी मुगल बादशाह अकबर और टीपू सुल्तान के समय में भी काफी लोकप्रिय थी. इस पुरानी रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आज के समोसे से काफी अलग थी। उस समय समोसे में हम आज जो आलू की भराई इस्तेमाल करते हैं, उसकी जगह इस्तेमाल होता था भुने हुए बैंगन का गूदा, सूखी अदरक, प्याज, लहसुन और पके हुए मटन का मसाला. इन सब चीजों को अच्छी तरह मिलाकर समोसे के आटे में भर दिया जाता था. फिर इसे शुद्ध घी में डीप फ्राई किया जाता था. उस समय की रेसिपी में मिर्च और आलू का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता था. कारण यह था कि उस दौर में मिर्च और आलू भारत में आए ही नहीं थे. ये बाद में पुर्तगालियों के जरिए भारत पहुंचें.
कैसे समय के साथ बदल गया समोसा?
उस जमाने का समोसा आज के साधारण समोसे से कहीं ज्यादा अच्छा, स्वादिष्ट और परतदार होता था. यह कोई सस्ता स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि राजाओं-बादशाहों के लिए बनाया जाने वाला शाही व्यंजन था. इसके आटे में कई परतें होती थीं, जो इसे बहुत क्रिस्पी और लजीज बनाती थीं. जैसे-जैसे समय बीता, समोसा शाही रसोई से बाहर आया. सामान्य लोगों तक पहुंचते-पहुंचते इसमें कई बदलाव हुए. महंगी सामग्री जैसे मटन की जगह सस्ती और आसानी से मिलने वाली चीजें इस्तेमाल होने लगीं. धीरे-धीरे आलू की भराई लोकप्रिय हो गई और समोसा आज के रूप में बदल गया एक सस्ता, सरल और हर किसी की जेब के हिसाब का स्ट्रीट फूड.
आखिर किसका है समोसा?
सोशल मीडिया पर इस पुरानी कहानी के वायरल होने के बाद लोगों में समोसे को लेकर काफी एक्साइटमेंट बढ़ गई है. कई लोग भारत के खाने के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से इसके गहरे संबंध को देखकर हैरान हैं. एक यूजर ने लिखा भी है, 'आज जो हमें एक मामूली नाश्ता लगता है, वह दरअसल समोसे की सैकड़ों सालों की लंबी और रोचक यात्रा का नतीजा है.' एक यूजर का कहना है, नि, मतनामा' सिर्फ रेसेपी से ही भरा नहीं है. इसमें दवाइयां, पान के पत्ते तैयार करने के तरीके, शिकार के सुझाव और यहां तक कि युद्धक्षेत्र के लिए भी डिलीशियस डिशेस शामिल हैं.' वहीं एक ने कहा, 'यह सरासर बकवास है समोसा भारत का आविष्कार है, अरब लोग इसे 7वीं शताब्दी में भारत पर आक्रमण करने के बाद भारत से अपने साथ ले गए थे. इस झूठे फ़ूड प्रोपेगंडा को फैलाना बंद करें.'