क्या है Nuclear Triad, इसमें कौन-कौन से देश शामिल, INS Aridaman से इसमें और बढ़ी भारत की ताकत

भारत ने अपनी समुद्री ताकत को बड़ा बढ़ावा देते हुए स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को नौसेना में शामिल कर लिया है. इसके साथ ही देश का न्यूक्लियर ट्रायड और मजबूत हो गया है, जो रणनीतिक सुरक्षा के लिए अहम माना जाता है.

Edited By :  समी सिद्दीकी
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What is Nuclear Triad: भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने शुक्रवार को स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridaman को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया है. इसके सेना में शामिल होने के बाद भारत ने Nuclear Triad देशों की कैटेगरी में अपनी धाक जमा ली है.

आईएनएस अरिदमन, अरिहंत कैटेगरी की परमाणु पनडुब्बियों का तीसरा जहाज है, जिसे विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट एटीवी के तहत तैयार किया गया है. इस पनडुब्बी के शामिल होने से भारतीय सेना की ताकत और क्षमता में और इजाफा होगा.

क्या है न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब?

दुनिया में कुछ ही देशों के पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन उससे भी कम देश ऐसे हैं जिनके पास न्यूक्लियर ट्रायड की क्षमता है. न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब है कि कोई देश जमीन से दागी जाने वाली मिसाइल, पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइल और रणनीतिक बमवर्षक विमानों के जरिए परमाणु हमला करने में सक्षम हो. इस स्तर तक पहुंचने के लिए कई दशकों की तकनीकी मेहनत, बड़े आर्थिक संसाधन और स्पष्ट रणनीति की जरूरत होती है. आज भी वैश्विक सैन्य संतुलन काफी हद तक इन न्यूक्लियर ट्रायड पर निर्भर करता है.

क्यों जरूरी है न्यूक्लियर ट्रायड होना?

न्यूक्लियर ट्रायड को सबसे सुरक्षित और मजबूत प्रतिरोध प्रणाली माना जाता है. अगर किसी हमले में इसका एक हिस्सा नष्ट भी हो जाए, तो बाकी दो हिस्से जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहते हैं. जमीन आधारित मिसाइल तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहती हैं, पनडुब्बियां गुप्त तरीके से काम करती हैं और वायु सेना के साधन लचीलापन प्रदान करते हैं. यही वजह है कि जिन देशों के पास यह क्षमता है, वे लगातार तीनों हिस्सों को आधुनिक बनाने में लगे रहते हैं.

क्या है आईएनएस अरिदमन की खासियत?

आईएनएस अरिदमन में अपने पहले के जहाजों INS Arihant और INS Arighaat के मुकाबले कई सुधार किए गए हैं. इसका ढांचा बड़ा है, जिससे यह ज्यादा समय तक समुद्र में रह सकती है और लंबी दूरी तक गुप्त तरीके से संचालन कर सकती है.

यह पनडुब्बी लंबी दूरी तक मार करने वाली K-4 मिसाइलों की अधिक संख्या ले जाने में सक्षम है, जिससे भारत की हमलावर क्षमता और बढ़ती है. एक चौथी पनडुब्बी भी निर्माणाधीन है, जो भारत के न्यूक्लियर ट्रायड को और मजबूत करेगी. आईएनएस अरिदमन को कई महीनों के समुद्री परीक्षण के बाद नौसेना में शामिल किया गया है. जानकारी के अनुसार, केरल के एक नौसैनिक अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे.

कौनसा देश बना था सबसे पहले न्यूक्लियर ट्रायड?

अमेरिका कोल्ड वॉर के दौरान न्यूक्लियर ट्रायड हासिल करने वाला पहला देश बना था. उसके पास जमीन आधारित मिनुटमैन-3 मिसाइलें, समुद्र में ओहायो श्रेणी की पनडुब्बियां और हवा में बी-52एच और बी-2 जैसे रणनीतिक बमवर्षक विमान हैं. अमेरिका फिलहाल अपने तीनों हिस्सों को आधुनिक बनाने पर काम कर रहा है.

अमेरिका और भारत के अलावा कौनसे देश न्यूक्लियर ट्रायड?

रूस भी 1960 के दशक से न्यूक्लियर ट्रायड बनाए हुए हैं. चीन ने 2020 में यह क्षमता हासिल की. भारत ने आईएनएस अरिहंत, आईएनएस अरिघात और अब आईएनएस अरिदमन जैसी पनडुब्बियों के जरिए अपना न्यूक्लियर ट्रायड पूरा किया है. पाकिस्तान ने 2017 में यह क्षमता हासिल करने का दावा किया था.

किसके पास कौनसे समुंद्री हथियार?

समुद्री हथियारों की बात करें तो अमेरिका के पास ट्राइडेंट-2 डी5 मिसाइलें हैं, रूस के पास आरएसएम-56 बुलावा और आर-29 आरएमयू सिनेवा जैसी मिसाइलें हैं. भारत के पास धनुष और सागरिका जैसी मिसाइलें हैं, जबकि चीन के पास जेएल-2 और जेएल-3 मिसाइलें हैं. पाकिस्तान के पास बाबर-3 मिसाइल प्रणाली मौजूद है.

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