H-1B वीजा पर अमेरिका के कदम से ग्रीन कार्ड की राह हुई मुश्किल? भारत ने फैसले पर जताई कड़ी आपत्ति, जेडी वेंस को भी जमकर सुनाया
अमेरिका में कुछ कंपनियों के लिए PERM आवेदनों के निलंबन पर भारत ने चिंता जताई है और कहा है कि भारतीय प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है. भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की भारतीय पेशेवरों पर की गई टिप्पणियों को भी अनुचित बताया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
(Image Source: ANI )अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के भविष्य और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को लेकर भारत ने अपनी चिंता जाहिर की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय प्रतिभाओं की आवाजाही से भारत और अमेरिका, दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होता है. भारतीय पेशेवर अमेरिकी कंपनियों में नवाचार, शोध और उत्पादकता बढ़ाने में योगदान देते हैं. उनकी विशेषज्ञता से कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होती है और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलता है. यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी श्रम विभाग ने कुछ कंपनियों के लिए स्थायी श्रम प्रमाणन यानी PERM कार्यक्रम के तहत आवेदनों को निलंबित किया है।
जायसवाल ने स्पष्ट किया कि PERM आवेदनों पर रोक लगने का मतलब यह नहीं है कि भारतीयों के H-1B वीजा अपने आप अमान्य हो जाएंगे या वीजाधारकों के आश्रितों की स्थिति प्रभावित होगी. हालांकि, इस कदम से प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है.
भारत ने अमेरिकी फैसले पर आपत्ति जताते हुए क्या कहा?
- भारत ने अमेरिकी फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों के साझा हित में है. विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की भारतीय पेशेवरों के बारे में की गई टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई और कहा कि ऐसी टिप्पणियां अमेरिका की अर्थव्यवस्था तथा नवाचार में भारतीयों के योगदान की अनदेखी करती हैं.
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रतिभाओं की आवाजाही भारत और अमेरिका, दोनों के लिए लाभकारी है. इससे भारतीय पेशेवरों को अवसर मिलते हैं, वहीं अमेरिकी कंपनियों को उच्च कौशल वाले कर्मचारियों तक पहुंच मिलती है. ऐसे पेशेवर शोध, नवाचार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में योगदान देते हैं.
- जायसवाल के मुताबिक, कुशल पेशेवरों की मौजूदगी से अमेरिकी कंपनियों को आर्थिक लाभ मिलता है और शेयरधारकों के लिए भी संपत्ति का सृजन होता है. उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए पारस्परिक लाभ वाला क्षेत्र बताया. भारत की अपेक्षा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्ष भारतीय प्रतिभाओं के योगदान को समझेंगे.
- उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से घोषित कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में मददगार नहीं हैं. भारत इस मामले में हो रहे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है.
PERM आवेदनों पर रोक का H-1B वीजा पर क्या असर होगा?
अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कुछ कंपनियों के लिए PERM कार्यक्रम के तहत आवेदन निलंबित किए जाने को लेकर भारतीय पेशेवरों के बीच चिंता पैदा हो सकती है. PERM प्रक्रिया अमेरिका में कई नियोक्ता-प्रायोजित रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड मामलों में अहम चरण होती है. इसके जरिए नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए अमेरिकी श्रम बाजार से जुड़ी निर्धारित आवश्यकताओं का पालन किया गया है.
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि PERM आवेदनों पर रोक अपने आप H-1B वीजा की वैधता को प्रभावित नहीं करती. H-1B वीजाधारकों के आश्रितों की स्थिति पर भी इस फैसले का स्वतः असर नहीं पड़ता. यानी केवल PERM आवेदन निलंबित होने से किसी व्यक्ति का H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं हो जाता.
लेकिन जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित कंपनियों के PERM आवेदनों पर निर्भर है, उनके स्थायी निवास हासिल करने के रास्ते में देरी या दूसरी प्रक्रियागत बाधाएं आ सकती हैं. इसका वास्तविक असर संबंधित कंपनी, आवेदन की स्थिति और लागू अमेरिकी नियमों पर निर्भर करेगा.
ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया क्यों है अहम?
- H-1B वीजा अमेरिका में कुछ विशेष पेशों के योग्य विदेशी कर्मचारियों को काम करने की अनुमति देता है. दूसरी ओर, ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी निवास का दर्जा देता है. दोनों की कानूनी स्थिति अलग है और H-1B वीजा रखने वाला हर व्यक्ति स्वतः ग्रीन कार्ड का पात्र नहीं बन जाता.
- रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने की कई श्रेणियों में नियोक्ता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. ऐसे मामलों में PERM श्रम प्रमाणन प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है.
- यदि किसी प्रभावित कंपनी के लिए इस प्रक्रिया के तहत आवेदन रोक दिए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों की स्थायी निवास की योजना पर असर पड़ सकता है.
- इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को H-1B वीजा पर सीधे प्रतिबंध के रूप में देखना सही नहीं होगा. विदेश मंत्रालय का बयान भी इसी अंतर को स्पष्ट करता है- वीजा की वैधता और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया अलग-अलग विषय हैं.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति की टिप्पणी पर भारत ने क्यों जताई आपत्ति?
PERM कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे के साथ भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की भारतीय पेशेवरों को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी. रणधीर जायसवाल ने ऐसी टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए कहा कि वे अमेरिका की अर्थव्यवस्था और नवाचार व्यवस्था में भारतीय पेशेवरों के योगदान की अनदेखी करती हैं.
जायसवाल ने कहा कि अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं. वे वहां की अर्थव्यवस्था, शोध और नवाचार तंत्र में योगदान देते हैं. भारत का कहना है कि भारतीय प्रतिभाओं की भूमिका को नकारात्मक रूप में पेश करने के बजाय उनके वास्तविक योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए.
भारत-अमेरिका संबंधों में प्रतिभाओं की आवाजाही का मुद्दा कितना अहम?
भारत और अमेरिका के बीच शिक्षा, तकनीक, शोध और कारोबार के क्षेत्र में पेशेवरों की आवाजाही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. भारतीय विशेषज्ञ अमेरिकी कंपनियों और संस्थानों में काम करते हैं, जबकि इस प्रक्रिया से उन्हें वैश्विक अनुभव और करियर के अवसर भी मिलते हैं. विदेश मंत्रालय का तर्क है कि कुशल कर्मचारियों की आवाजाही से केवल भारतीय पेशेवरों को लाभ नहीं होता, बल्कि अमेरिकी कंपनियों को भी विशेषज्ञता और नवाचार का फायदा मिलता है. इसलिए इस क्षेत्र में उठाए गए कदमों का असर दोनों देशों के साझा आर्थिक हितों पर पड़ सकता है.
फिलहाल भारत ने कहा है कि वह अमेरिकी फैसले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहा है. आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि PERM आवेदनों पर निलंबन किन कंपनियों और मामलों पर लागू होता है तथा प्रभावित कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के लिए क्या विकल्प उपलब्ध रहते हैं.