आलीशान बंगले से लेकर पिता तक, CJP के सौरभ दास पर मचा बवाल, लाखों के किराए और फंडिंग पर हो रहे सवाल
दिल्ली के GK-1 में CJP प्रवक्ता सौरव दास के कथित आलीशान घर, लाखों के किराए और फंडिंग को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज है. जानिए पूरा विवाद.
दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-1 (GK-1) में स्थित एक आलीशान मकान को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है. इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं Cockroach Janta Party (CJP) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता सौरव दास हैं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि सौरव दास दक्षिण दिल्ली के एक बेहद महंगे मकान में रहते हैं और उसका किराया लाखों रुपये है. जिसके बाद उन्हें और CJP को कौन फंडिग कर रहा है ये सवाल उठ फिर चर्चा में आ गया है.
इन दावों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठाया जा रहा है कि यदि सौरव दास के पास कोई नियमित नौकरी या बड़ा व्यवसाय नहीं है, तो इतने महंगे घर का खर्च आखिर कैसे उठाया जा रहा है? हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही सौरव दास की आय के स्रोत को लेकर किसी सरकारी एजेंसी ने कोई निष्कर्ष सार्वजनिक किया है.
क्या है वायरल दावा?
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और वीडियो में दावा किया जा रहा है कि सौरव दास ग्रेटर कैलाश-1 के बी-ब्लॉक स्थित एक आलीशान मकान के ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं. कुछ पोस्ट में यह भी कहा गया कि इस मकान का सालाना किराया लगभग 12 लाख रुपये है. वहीं कुछ अन्य पोस्ट में अलग-अलग रकम का भी दावा किया गया है. इन दावों के साथ यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि एक छात्र आंदोलन से जुड़े नेता या सामाजिक कार्यकर्ता के लिए इतने महंगे इलाके में रहना कैसे संभव है. फिलहाल इन दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है.
मकान मालिक को लेकर भी हो रहे दावे
सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि जिस मकान में सौरव दास रहते हैं, उसके मालिक आनंद नामक व्यक्ति हैं, जो ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं. इन दावों के अनुसार मकान का किराया लाखों रुपये है. हालांकि इन दावों की भी किसी आधिकारिक रिकॉर्ड या संबंधित पक्ष द्वारा पुष्टि नहीं की गई है.
@singh_kikki नाम के एक यूजर ने सोशल मीडिया पर बताया कि सौरभ दास डर के कारण अपना जीके 1 अपार्टमेंट छोड़कर भाग गया. उसका कूक भी उसके बाप की तरह नेपाली था. इतना ही नहीं कई पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि सौरभ के पिता भारतीय नहीं नेपाली थे. अब ऐसे में एक सवाल ये भी उठ गया है कि सौरभ दास के परिवार में कौन-कौन हैं और उनके घर में कमाई का मेन जारिया किसका है?
राजनीतिक विश्लेषक अभिजीत अय्यर-मित्रा द्वारा एक पॉडकास्ट में किए गए दावों के अनुसार, यह आरोप लगाया गया है कि सौरभ दास के जैविक (असली) पिता नेपाली नागरिक थे. हालांकि, इन दावों की किसी आधिकारिक या स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है. जैविक पिता का नेपाल कनेक्शन: एक चर्चा के दौरान यह दावा सामने आया कि सौरभ दास के असली पिता नेपाल से थे और उन्होंने 'दास उपनाम' अपने गोद लेने वाले पिता से अपनाया है.
फिर शुरू हुआ 'फंडिंग' पर सवाल
जैसे-जैसे यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वैसे-वैसे आंदोलन की फंडिंग को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं. कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि यदि कोई व्यक्ति नियमित आय का दावा नहीं करता, तो उसके महंगे रहन-सहन और खर्च का स्रोत क्या है? हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने सौरव दास के खिलाफ आय या फंडिंग को लेकर कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की है. इसलिए फिलहाल सोशल मीडिया पर चल रहे इन दावों को सत्यापित तथ्य नहीं माना जा सकता.
घर के बाहर पहुंचे लोग, सुरक्षा पर जताई चिंता
इस पूरे विवाद के बीच सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट कर अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने लिखा कि सुबह उनके घर पर 15 से 20 लोग पहुंच गए, जबकि कुछ लोग रात से ही घर के बाहर मौजूद थे. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के बाद घर में रहने वाले सभी लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है. सौरव दास ने बताया कि वह उस समय महाराष्ट्र में CJP की दो दिवसीय बैठक में शामिल होने गए हुए थे.
'यूट्यूबर्स घर में घुस आए', सौरव दास का आरोप
सौरव दास ने आरोप लगाया कि कुछ यूट्यूबर्स और मीडिया चैनलों ने उनके घर के भीतर घुसकर वीडियो बनाए और अंदर के दृश्य सार्वजनिक कर दिए. उन्होंने लिखा कि यह केवल उनकी निजता का उल्लंघन नहीं है बल्कि उनके परिवार की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन वीडियो के कारण कोई असामाजिक तत्व उनके घर पर हमला करता है, तो इसकी जिम्मेदारी उन यूट्यूबर्स और उनके साथ जुड़े लोगों की होगी.
क्या शुरू हो गई है जांच?
फिलहाल सौरव दास की आय, मकान के किराए या फंडिंग को लेकर किसी सरकारी एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है. सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे और आरोप जरूर लगाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. ऐसे में यह मामला फिलहाल सोशल मीडिया बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बना हुआ है. यदि भविष्य में किसी जांच एजेंसी या संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तभी पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.