नेचुरल या आर्टिफिशियल बारिश! मार्च में क्यों बरस रहे है बादल? अप्रैल तक ऐसा रहेगा मौसम; जानें एक्सपर्ट्स की राय
दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ठंड जैसी स्थिति बन गई है. IMD के अनुसार इसका कारण देर से सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ और मावठ है, न कि कोई कृत्रिम प्रयोग.
उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है. आसमान में बादल छाए हुए हैं, हल्की-फुल्की बूंदें गिर रही हैं और कभी-कभी तेज आंधी भी आ रही है. इससे लोगों को गर्मी से बहुत राहत मिली है. दिन में जो तेज धूप और गर्मी थी, वो अब काफी कम हो गई है. लोग फिर से गर्म कपड़े, स्वेटर और जैकेट निकालकर पहनने लगे हैं. सुबह-शाम की ठंडक भी बढ़ गई है, जिससे मौसम में सर्दियों जैसा अहसास हो रहा है.
मौसम विभाग (IMD) ने इस बेमौसम बारिश का पूरा कारण समझाया है. उनका कहना है कि यह सब 'मावठ' (या मावठा) के कारण हो रहा है। मावठ उत्तर भारत में सर्दियों के समय होने वाली एक खास तरह की बारिश है, जो ज्यादातर दिसंबर, जनवरी और कभी-कभी फरवरी में आती है. लेकिन इस साल मौसम का पैटर्न पूरी तरह बदल गया है. जो बारिश सामान्य रूप से जनवरी में होनी चाहिए थी, वो इस बार मार्च में आ गई है. यानी मावठ इस साल काफी देर से सक्रिय हुई है लगभग दो महीने लेट.
क्या कहना है एक्सपर्ट का?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह देरी से आई मावठ का असर है. मावठ का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) होता है. ये विक्षोभ भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर जैसी जगहों से शुरू होकर ईरान, पाकिस्तान होते हुए उत्तर-पश्चिम भारत में पहुंचते हैं. इनके साथ वातावरण में नमी बहुत बढ़ जाती है, जिससे बादल बनते हैं और बारिश होती है. कई बार इसके साथ ओले भी गिरते हैं और तेज हवाएं चलती हैं. अभी यह सिलसिला खत्म नहीं हुआ है. मौसम विभाग के संकेत हैं कि आने वाले दिनों में और भी कई बार बारिश के दौर (स्पेल) आ सकते हैं. अप्रैल के महीने में भी कुछ दिनों तक ऐसा ही मौसम बना रह सकता है- तेज हवाएं, आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश और तापमान में गिरावट. इससे बीच-बीच में ठंडक बनी रहेगी और गर्मी की शुरुआत थोड़ी देर से हो सकती है.
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मावठ फसलों के लिए कैसे फायदेमंद होती है?
मावठ खासतौर पर उत्तर भारत, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे इलाकों में सर्दियों की फसलों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है. यह गेहूं, चना, सरसों, जौ जैसी रबी फसलों को जरूरी नमी देती है. किसान इसे 'अमृत की बूंदें' या 'सुनहरी बूंदें' कहते हैं, क्योंकि इससे फसलें अच्छी बढ़ती हैं और पैदावार बढ़ती है. लेकिन जब यह बारिश देर से यानी मार्च में आती है, तो फसलों को नुकसान भी हो सकता है. जैसे कि गेहूं की फसल पकने के करीब होती है, ऐसे में ज्यादा बारिश या ओले से दाने गिर सकते हैं या फसल खराब हो सकती है. कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. आरएस चौहान जैसे विशेषज्ञ भी कहते हैं कि सामान्य समय पर मावठ फायदेमंद है, लेकिन देर से आने या ज्यादा होने पर नुकसानदायक भी साबित हो सकती है.
तापमान में बड़ा बदलाव
बारिश से पहले दिल्ली-एनसीआर में दिन का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. लोग गर्मी से परेशान थे लेकिन लगातार बारिश और बादलों के कारण अगले ही दिन तापमान गिरकर 23 डिग्री सेल्सियस तक आ गया. यानी महज एक-दो दिनों में 15 डिग्री का बहुत बड़ा अंतर. इससे सर्दी की वापसी जैसा लग रहा है. लोग फिर से ठंड महसूस कर रहे हैं और गर्म कपड़े निकाल लिए हैं.
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सोशल मीडिया पर बिल गेट्स वाला झूठा दावा
इन दिनों सोशल मीडिया पर कई रील्स और पोस्ट वायरल हो रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि यह बारिश बिल गेट्स के किसी कृत्रिम मौसम नियंत्रण प्रोजेक्ट की वजह से हो रही है. कुछ लोग कह रहे हैं कि बिल गेट्स सूरज की गर्मी रोकने के लिए कुछ प्रयोग कर रहे हैं, जिससे मौसम बिगड़ गया है. लेकिन यह पूरी तरह गलत और भ्रामक जानकारी है. एक्सपर्ट्स ने स्पष्ट किया है कि बिल गेट्स ने सोलर जियोइंजीनियरिंग (Solar Geoengineering) से जुड़े कुछ रिसर्च प्रोजेक्ट को फंड किया था, जैसे SCoPEx, जो सूरज की रोशनी को थोड़ा ब्लॉक करके ग्लोबल वार्मिंग कम करने की थ्योरी पर आधारित था. लेकिन यह प्रोजेक्ट कभी बड़े स्तर पर शुरू ही नहीं हुआ और 2024 में ही बंद हो गया. इसका मौसम पर कोई असर नहीं है. असली कारण सिर्फ प्राकृतिक पश्चिमी विक्षोभ और मावठ है, न कि कोई इंसानी प्रयोग.