योगेंद्र यादव से लेकर कुमार विश्वास और राघव चड्ढा तक, केजरीवाल से क्यों अलग हुए AAP के ये 'नवरत्न'
बीते दो दिनों से Aam Aadmi Party (AAP) में अंदरूनी कलह की चर्चाएं तेज हो गई हैं. अलग-अलग तरह के दावे सामने आ रहे हैं, खासकर Raghav Chadha को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं. कहा जा रहा है कि पार्टी से बाहर होने वाले नेताओं की सूची में अब राघव चड्ढा का नाम भी जुड़ सकता है और वे कथित तौर पर ‘10वें नंबर’ पर हो सकते हैं.
आम आदमी पार्टी (AAP) में सियासी तूफान फिर उठ खड़ा हुआ है और इस बार निशाने पर हैं पार्टी के सबसे चर्चित चेहरों में से एक राघव चड्ढा. राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से उनकी छुट्टी ने सिर्फ एक पद नहीं छीना, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही खामोश दरारों को भी उजागर कर दिया है. पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को उनकी जगह लाने का फैसला अब एक साधारण संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि AAP के अंदर गहराते सत्ता-संतुलन के संघर्ष का इशारा माना जा रहा है.
बीते कुछ महीनों से चड्ढा की चुप्पी, उनकी दूरी और अब अचानक लिया गया यह बड़ा फैसला. इन सबने मिलकर सियासी गलियारों में सवालों की आग भड़का दी है. क्या यह सिर्फ पद बदलने की कहानी है या AAP के भीतर एक और बड़े ‘एक्जिट’ की भूमिका लिखी जा रही है? और इसी बीच राघव चड्ढा का 4 अप्रैल का बयान-'घायल हूं इसलिए घातक हूं'. इस पूरे सियासी ड्रामे को और भी तेज, और भी दिलचस्प बना रहा है तो वहीं चर्चा की जा रही है आप से हटाए जाने वाले 10वें पर Raghav Chadha होंगे. आइए इस खबर में आप के उन नवरत्न के बारे में जानते हैं जिन्होंने आप से बना ली दूरी और इसकी वजह भी जानते हैं...
AAP ने डिप्टी लीडर पद से Raghav Chadha को क्यों हटाया?
AAP ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाने की जानकारी दी. उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया. पार्टी नेताओं का कहना है कि सीमित समय में बड़े मुद्दों को उठाना जरूरी है और इसी आधार पर यह फैसला लिया गया. हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं.
क्या राघव चड्ढा की ‘चुप्पी’ बनी वजह?
पार्टी के अंदर यह चर्चा रही कि राघव चड्ढा संसद और अन्य अहम राजनीतिक मुद्दों पर अपेक्षित आक्रामकता नहीं दिखा रहे थे. दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी उन पर निशाना साधते हुए कहा कि वह संसद में “soft PR” को प्राथमिकता दे रहे थे, जबकि पार्टी को केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर होना चाहिए. AAP के इतिहास में कई बड़े चेहरे पार्टी से अलग हो चुके हैं या उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया है. इसके पीछे अक्सर मतभेद, अनुशासनहीनता या नेतृत्व शैली को लेकर असहमति रही है. आइए उन सब पर एक नजर डालते हैं...
1. Shazia Ilmi कौन हैं? AAP से दूरी की वजह क्या रही
Shazia Ilmi एक जानी-मानी पत्रकार से राजनीति में आईं नेता हैं, जिन्होंने कभी Aam Aadmi Party (AAP) का अहम चेहरा बनकर पहचान बनाई. 2013 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और दिल्ली चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाई. तेज-तर्रार टीवी डिबेट्स और साफ बोलने के अंदाज़ के कारण वे जल्द ही पार्टी की प्रमुख प्रवक्ता बन गईं. हालांकि, कुछ समय बाद उनका AAP से मोहभंग हो गया और उन्होंने पार्टी छोड़ दी. इल्मी ने आरोप लगाया कि पार्टी में अंदरूनी लोकतंत्र की कमी है और फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हैं. उन्होंने Arvind Kejriwal की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा कि आलोचना को जगह नहीं दी जाती. बाद में शाजिया इल्मी Bharatiya Janata Party (BJP) में शामिल हो गईं. उन्होंने कहा कि BJP में उन्हें स्पष्ट नेतृत्व और राष्ट्रहित की राजनीति दिखाई देती है. कुल मिलाकर, AAP से उनकी दूरी वैचारिक और संगठनात्मक असहमति का परिणाम थी.
2. कौन हैं योगेंद्र यादव और AAP से उनकी दूरी क्यों बनी?
योगेंद्र यादव एक जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वे आम आदमी पार्टी (AAP) के शुरुआती दौर के प्रमुख चेहरों में शामिल थे और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में गिने जाते हैं. राजनीति में आने से पहले वे चुनावी विश्लेषण और सामाजिक मुद्दों पर अपनी मजबूत पकड़ के लिए पहचाने जाते थे. बाद में उन्होंने स्वराज इंडिया नाम की अपनी राजनीतिक पार्टी भी बनाई.
योगेंद्र यादव और AAP के बीच दूरी 2015 में खुलकर सामने आई. इसके पीछे कई बड़े कारण बताए जाते हैं. योगेंद्र यादव का आरोप था कि पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया केंद्रीकृत होती जा रही है और आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हो रहा है. उनका सीधा टकराव पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal से हुआ. उन्होंने केजरीवाल के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए. पार्टी ने योगेंद्र यादव पर आरोप लगाया कि वे पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिसके बाद मार्च 2015 में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. उस समय AAP के भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई थी, जिससे पार्टी की छवि पर भी असर पड़ा.
3. कौन हैं Prashant Bhushan और AAP से दूरी क्यों बनी?
प्रशांत भूषण देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों और जनहित याचिकाओं के लिए खास पहचान रखते हैं. वे 2012 में Aam Aadmi Party के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और पार्टी के शुरुआती वैचारिक स्तंभ माने जाते थे. AAP से उनकी दूरी 2015 में सामने आई, जब पार्टी के भीतर गंभीर मतभेद उभरने लगे. भूषण ने आरोप लगाया कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो रहा है और फैसले कुछ लोगों तक सीमित होते जा रहे हैं. उनका टकराव सीधे Arvind Kejriwal से हुआ, जिनकी कार्यशैली पर उन्होंने सवाल उठाए. पार्टी ने उन पर 'एंटी-पार्टी गतिविधियों' का आरोप लगाया और मार्च 2015 में उन्हें निष्कासित कर दिया. इसके बाद उन्होंने वैकल्पिक राजनीति और पारदर्शिता की बात जारी रखी, लेकिन AAP से उनका रिश्ता पूरी तरह खत्म हो गया.
4. कौन हैं Ashutosh और AAP से दूरी क्यों बनी?
आशुतोष एक वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं, जिन्होंने टीवी मीडिया में लंबा करियर बनाया और बाद में सक्रिय राजनीति में कदम रखते हुए Aam Aadmi Party से जुड़े. वे Arvind Kejriwal के करीबी माने जाते थे और पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल थे. हालांकि, अगस्त 2018 में आशुतोष ने अचानक पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने सार्वजनिक रूप से “व्यक्तिगत कारणों” का हवाला दिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि वे पार्टी में अपनी भूमिका और महत्व को लेकर असंतुष्ट थे. खासतौर पर उन्हें राज्यसभा न भेजे जाने की बात को उनकी नाराजगी की बड़ी वजह माना गया. इस्तीफे के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और फिर से मीडिया और लेखन की दुनिया में लौट गए. AAP से उनका अलगाव पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष की एक और मिसाल बनकर सामने आया.
5. Kapil Mishra की AAP से क्यों बनी दूरी?
कपिल मिश्रा दिल्ली की राजनीति का एक चर्चित चेहरा हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत Aam Aadmi Party से की थी. वे Arvind Kejriwal सरकार में मंत्री भी रहे और पार्टी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे. लेकिन 2017 में उनका AAP से टकराव खुलकर सामने आया, जब कपिल मिश्रा ने केजरीवाल और तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने खुद कथित लेन-देन देखा है. इसके बाद पार्टी ने उन्हें “अनुशासनहीनता” और “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में निलंबित कर दिया. इस विवाद के बाद कपिल मिश्रा ने AAP से पूरी तरह दूरी बना ली और बाद में दूसरी राजनीतिक राह चुन ली. उनका मामला AAP के भीतर सबसे बड़े और सार्वजनिक टकरावों में से एक माना जाता है.
6. AAP की स्थापना में भुमिका निभाने वाले कुमार विश्वास क्यों हुए अलग?
कुमार विश्वास देश के लोकप्रिय कवि और वक्ता हैं, जिन्होंने Aam Aadmi Party की स्थापना के समय Arvind Kejriwal के साथ अहम भूमिका निभाई थी. वे पार्टी के शुरुआती चेहरों में से एक थे और जनता के बीच AAP को लोकप्रिय बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा. हालांकि, समय के साथ कुमार विश्वास और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ने लगे. उन्होंने कई बार खुले तौर पर पार्टी की कार्यशैली और नेतृत्व पर सवाल उठाए. खासतौर पर उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हो रहा है और कुछ लोगों के हाथ में फैसले सिमटते जा रहे हैं. इन मतभेदों के चलते वे धीरे-धीरे पार्टी से दूर होते गए और सक्रिय राजनीति से भी किनारा कर लिया. उनका AAP से अलगाव पार्टी के भीतर वैचारिक टकराव की बड़ी मिसाल माना जाता है.
7. कौन हैं Alka Lamba और AAP से दूरी क्यों बनी?
अलका लांबा दिल्ली की जानी-मानी नेता हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कई दलों के साथ काम किया. वे Aam Aadmi Party से जुड़ने के बाद चांदनी चौक से विधायक बनीं और पार्टी का प्रमुख महिला चेहरा मानी जाती थीं. लेकिन समय के साथ उनका पार्टी नेतृत्व से टकराव बढ़ता गया. अलका लांबा ने खुलकर Arvind Kejriwal की कार्यशैली पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी “आम आदमी पार्टी” से बदलकर “खास आदमी पार्टी” बन गई है. उन्होंने कहा कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है और नेताओं की बात नहीं सुनी जाती. आखिरकार 2019 में उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गईं. उनका जाना भी AAP के भीतर बढ़ते असंतोष की एक अहम कड़ी माना गया.
8. Anand Kumar ने AAP से दूरी क्यों बनाई?
आनंद कुमार, जो एक फेमस समाजशास्त्री और Aam Aadmi Party के शुरुआती चेहरों में शामिल थे, उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला गंभीर वैचारिक मतभेदों के चलते लिया. दरअसल, 2015 के आसपास पार्टी के अंदर नेतृत्व शैली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ. आनंद कुमार का मानना था कि पार्टी, जो “आम आदमी” और पारदर्शिता के एजेंडे पर बनी थी, वह धीरे-धीरे केंद्रीकृत नेतृत्व और सीमित निर्णय प्रक्रिया की ओर बढ़ रही है. उन्होंने खुलकर कहा कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हो रहा है और अहम फैसले कुछ ही लोगों तक सिमटते जा रहे हैं. वह Yogendra Yadav और Prashant Bhushan के साथ खड़े नजर आए, जो इसी मुद्दे पर सवाल उठा रहे थे. इसी कारण पार्टी नेतृत्व ने उन पर “एंटी-पार्टी गतिविधियों” का आरोप लगाया और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया.
9. Ajit Jha AAP से क्यों हुए अलग?
वरिष्ठ पत्रकार से नेता बने अजीत झा Aam Aadmi Party के शुरुआती दौर में जुड़े थे, लेकिन 2015 में पार्टी के भीतर उभरे विवादों के बाद उनसे दूरी बन गई. झा, Yogendra Yadav और Prashant Bhushan के करीब माने जाते थे और उन्होंने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र, पारदर्शिता और फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे.
क्या AAP में बढ़ रही है अंदरूनी कलह?
राघव चड्ढा को हटाने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या आम आदमी पार्टी में अंदरूनी मतभेद गहराते जा रहे हैं. 2012 में गठन के बाद से ही पार्टी कई बार बड़े नेताओं के जाने और विवादों का सामना कर चुकी है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में पार्टी इस स्थिति को कैसे संभालती है.
क्या राघव चड्ढा भी छोड़ सकते हैं AAP?
अभी तक राघव चड्ढा की ओर से पार्टी छोड़ने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जरूर तेज हो गई है. उनके हालिया बयान और पार्टी की कार्रवाई ने इन अटकलों को और हवा दे दी है.