अंतरिक्ष में भी ‘नॉर्मल लाइफ’! स्मूदी पीते, फोटो क्लिक करते और टॉयलेट ठीक करते नजर आए एस्ट्रोनॉट्स-

चांद की ओर बढ़ रहे मिशन में अंतरिक्ष यात्री भी आम लोगों जैसी जिंदगी जीते नजर आए- वे स्मूदी पीते हैं, मोबाइल से फोटो खींचते हैं और तकनीकी दिक्कतों से जूझते हैं. यहां तक कि टॉयलेट खराब होने पर उसे खुद ठीक भी करते हैं, जिससे स्पेस मिशन का एक बेहद ‘रियल’ और मानवीय पहलू सामने आता है.

( Image Source:  @Kordoneuropa-X )

अंतरिक्ष मिशन सुनते ही दिमाग में हाई-टेक मशीनें, सटीक गणनाएं और खतरों से भरी एक रोमांचक दुनिया उभरती है. लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि चांद की ओर बढ़ रहे अंतरिक्ष यात्री भी कई मायनों में बिल्कुल आम इंसानों जैसे ही हैं. वे स्मूदी पीते हैं, मोबाइल से फोटो खींचते हैं, ईमेल क्रैश होने पर परेशान होते हैं और यहां तक कि खराब टॉयलेट भी ठीक करते हैं यानी यूं कहें तो मानो धरती पर किसी तरह की उनकी कोई दिनचर्या हो रही हो लेकिन हम बात कर रहे हैं अंतरिक्ष की.

चांद की दिशा में बढ़ रही यह ऐतिहासिक यात्रा जितनी अनोखी है, उतनी ही 'रियल लाइफ' से जुड़ी भी है. चारों अंतरिक्ष यात्री बेहद सीमित जगह- लगभग दो मिनीवैन के बराबर स्पेस में रहकर 10 दिन की इस यात्रा को पूरा कर रहे हैं. मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच ने इसे 'कैंपिंग ट्रिप' जैसा अनुभव शेयर किया. जहां टीमवर्क और साथ रहने का अनुभव सबसे स्पेशल है.

क्या अंतरिक्ष मिशन किसी 'कैंपिंग ट्रिप' जैसा होता है?

इस मिशन से जुड़ी अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच का मानना है कि यह यात्रा किसी एडवेंचर कैंपिंग से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि 'यह एकजुटता का प्रतीक है और कुछ अलग व खास होने का एहसास भी देता है यानी यह अनुभव साथ रहने और कुछ अलग करने की भावना से भरा हुआ है. अंतरिक्ष में खाने-पीने का भी खास इंतजाम है- 58 टॉर्टिला, 43 कप कॉफी, बारबेक्यू बीफ ब्रिस्केट और पांच तरह के हॉट सॉस उनके मेन्यू में शामिल हैं यानी स्पेस में भी 'फूड लक्जरी' कम नहीं है.

अंतरिक्ष में टॉयलेट खराब हो जाए तो क्या होता है?

इस मिशन की सबसे दिलचस्प घटना रही टॉयलेट में आई खराबी खास बात यह है कि डीप स्पेस मिशन में पहली बार एक असली टॉयलेट का इस्तेमाल हो रहा है. इससे पहले अपोलो मिशनों में वेस्ट बैग का इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि टॉयलेट में आई समस्या को खुद क्रिस्टीना कोच ने ठीक किया. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि 'मुझे खुद को 'स्पेस प्लंबर' कहने में गर्व होता है' यानी अब वो खुद को ‘स्पेस प्लंबर’ कहने में गर्व महसूस करती हैं. उन्होंने आगे कहा कि 'मैं यह कहना पसंद करूंगा कि यह शायद इस मिशन में मौजूद सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है और राहत की बात ये रही कि आखिरकार सब कुछ सही तरीके से काम करने लगा.

क्या अंतरिक्ष में भी 'प्राइवेसी' मिलती है?

स्पेसक्राफ्ट में टॉयलेट एक छोटा सा केबिन है, जहां शोर भी काफी होता है और इस्तेमाल के दौरान कानों में प्रोटेक्शन पहनना पड़ता है. लेकिन यही वो जगह है जहां अंतरिक्ष यात्री कुछ पल अकेले रह सकते हैं. कनाडा के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैंसन के मुताबिक, “यह वह एक जगह है, जहाँ हम मिशन के दौरान कुछ पलों के लिए सच में अकेला महसूस कर सकते हैं.”

ईमेल भी स्पेस में क्रैश होता है?

अंतरिक्ष में भी टेक्नोलॉजी धोखा दे सकती है. मिशन कमांडर रीड वाइजमैन ने बताया कि उन्हें Microsoft Outlook में दिक्कत आ रही थी. उन्होंने कहा कि 'मैं यह भी देख रहा हूँ कि मेरे पास दो Microsoft Outlook अकाउंट हैं और उनमें से कोई भी काम नहीं कर रहा है. हालांकि ह्यूस्टन के मिशन कंट्रोल ने इस समस्या को जल्द ही ठीक कर दिया. यानी IT एक्सपर्ट्स की जरूरत धरती ही नहीं, अंतरिक्ष में भी पड़ती है.

अंतरिक्ष में नींद कैसे आती है?

माइक्रोग्रैविटी में सोना भी एक अलग अनुभव है. अंतरिक्ष यात्री दीवार से बंधे स्लीपिंग बैग में सोते हैं ताकि वे तैरते न रहें. रीड वाइजमैन ने बताया कि 'क्रिस्टीना वाहन के बीचों-बीच सिर नीचे करके सो रही हैं, ठीक वैसे जैसे कोई चमगादड़ हमारे डॉकिंग टनल से लटका हुआ हो.” उन्होंने यह भी कहा कि 'यह जितना आप सोचते हैं, उससे कहीं ज्यादा आरामदायक है.'

फिटनेस का क्या होता है स्पेस में?

अंतरिक्ष में हड्डियों और मांसपेशियों पर दबाव कम हो जाता है, जिससे उनकी ताकत घट सकती है. इसलिए हर दिन 30 मिनट एक्सरसाइज अनिवार्य है. इसके लिए ‘फ्लाईव्हील एक्सरसाइज डिवाइस’ का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे रोइंग, स्क्वाट्स और डेडलिफ्ट जैसी एक्सरसाइज की जाती हैं.

क्या अंतरिक्ष यात्री मोबाइल इस्तेमाल कर सकते हैं?

अब अंतरिक्ष यात्री स्मार्टफोन भी इस्तेमाल कर सकते हैं. NASA ने हाल ही में यह सुविधा दी है ताकि वे अपने परिवार के लिए खास पल कैद कर सकें और दुनिया के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा कर सकें. सारी गंभीरता और जिम्मेदारी के बावजूद अंतरिक्ष यात्रियों के अंदर का बच्चा जिंदा रहता है. जेरेमी हैंसन ने कहा कि यह मुझे एक छोटे बच्चे जैसा महसूस कराता है.' वहीं विक्टर ग्लोवर ने लॉन्च के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि 'लेकिन आपके अंदर का बच्चा बाहर निकलकर खुलकर मस्ती करना चाहता है, जोर-जोर से चिल्लाना और खुशी जाहिर करना चाहता है.'

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