Digital Arrest को लेकर सरकार अलर्ट, आईडी ब्लॉक करने से लेकर फेक अकाउंट डिटेक्शन तक WhatsApp को दिए ये आदेश
डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सरकार ने WhatsApp को सख्त सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं. इसमें फेक अकाउंट पहचानने, डिवाइस आईडी ब्लॉक करने और यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए तकनीकी कदम उठाने को कहा गया है.
डिजिटल अरेस्ट स्कैम के बढ़ते मामलों ने सरकार को भी अलर्ट कर दिया. ऐसे स्कैम्स में मिनटों में करोड़ों रुपए का ट्रांसफर होता है, और म्यूल या थर्ड पार्टी के अकाउंट इस्तेमाल किए जाते हैं, जो ट्रैक करना मुश्किल होते हैं. इंडियन एक्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अब इस स्कैम को रोकने के लिए गृह मंत्रालय ने WhatsApp को सख्त सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं.
इनमें डिवाइस आईडी ब्लॉक करने, फेक अकाउंट डिटेक्शन और यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाने वाले नए फीचर्स को लागू करने की मांग शामिल है. यह कदम उन ऑनलाइन धोखाधड़ी और लॉ एनफोर्समेंट ऑफिसर के तौर पर खुद को पेश करने वाले अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है.
IDC की तीसरी बैठक में क्या-क्या हुआ?
इस महीने IDC की तीसरी बैठक हुई, जहां WhatsApp के रिप्रेजेंटेटिव ने अपने प्लेटफॉर्म के डिटेक्शन सिस्टम, सुरक्षा उपाय और लॉ एनफोर्समेंट के साथ सहयोग के बारे में डिटेल शेयर की. एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि 'बैठक में हुई चर्चाओं के बाद प्लेटफॉर्म ने कई वादे किए हैं, जिनका मकसद यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाना और जांच एजेंसियों के काम में मदद करना है.'
डिजिटल अरेस्ट को रोकने के लिए ये दिए गए ये आदेश
IDC ने WhatsApp से कुछ मुख्य तकनीकी और सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा है:
- डिवाइस आईडी ब्लॉकिंग: डिजिटल अरेस्ट स्कैम में शामिल डिवाइस आईडी की पहचान और उन्हें ब्लॉक करने की संभावना का आकलन करने को कहा गया है, ताकि बार-बार अपराध करने वाले नए अकाउंट बना न सकें.
- Skype जैसे सुरक्षा फीचर्स: प्लेटफॉर्म को Skype जैसे सेफ्टी सर्विस को अपनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें कॉलर की जानकारी, संदिग्ध खातों के लिए अलर्ट साइन और स्कैम नेटवर्क की बेहतर पहचान शामिल है.
- डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा रिटेंशन: IT Rules, 2021 के अनुसार, डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा कम से कम 180 दिन तक रखना जरूरी है, ताकि जांच एजेंसियां अपराधों की छानबीन कर सकें.
- हानिकारक APK और कंटेंट की पहचान: तकनीकी उपायों को मजबूत करके हानिकारक APK और इसी तरह के कंटेंट को ब्लॉक करना.
- AI और मशीन लर्निंग का विस्तार: प्लेटफॉर्म ने भरोसा दिलाया है कि वह AI और मशीन लर्निंग सिस्टम का विस्तार कर रहा है ताकि नकल, सरकारी लोगो के दुरुपयोग और AI/सिंथेटिक सामग्री की पहचान की जा सके.
- लोगो और सरकारी प्रतीक का सुरक्षा: Delhi Police, Mumbai Police, CBI और ATS जैसे सरकारी लोगो के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए WhatsApp ने मीडिया मैचिंग और लोगो डिटेक्शन सिस्टम लागू किया है. ये सिस्टम प्रोफाइल फोटो की तुलना कर नकली अकाउंट को हटाने में मदद करेंगे.
कब तक करना होगा काम पूरा?
WhatsApp को IDC द्वारा 30 दिनों में Skype जैसे सुरक्षा उपायों और तकनीकी सुधारों की प्रस्तावित योजना प्रस्तुत करने को कहा गया है. इसके अलावा, डिजिटल अरेस्ट में शामिल डिवाइस आईडी को ब्लॉक करने के लिए 45 दिनों के भीतर अलग प्रस्ताव देने का निर्देश भी दिया गया है.
SIM बाइंडिंग सर्विस कब तक होगी लागू?
WhatsApp ने DoT के निर्देशों का पालन करते हुए SIM बाइंडिंग लागू करने का वादा किया है. इसके तहत अब प्लेटफॉर्म केवल उसी एक्टिव SIM के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे अनजान या मल्टी-डिवाइस उपयोग रोका जा सके. WhatsApp ने IDC को बताया कि यह सुविधा अगले चार से छह महीने में शुरू कर दी जाएगी और मार्च 2026 के अंत तक Action Taken Report (ATR) पेश की जाएगी.