iPhone की जिद नहीं, कुछ और चाहता था कुणाल चंदगुडे... महाराष्ट्र पहाड़ी हादसे में नया खुलासा, एक झटके में कैसे उजड़ा परिवार?
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में खुवाडिया पहाड़ी पर हुए हादसे में मां-बाप और बेटे की मौत हो गई. अब जानकारी सामने आ रही है कि 19 वर्षीय बेटा मां-बाप से आईफोन की जिद नहीं बल्कि कुछ और चाहता था.
Khuwadia Hill incident
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में 22 अगस्त को खुवाडिया पहाड़ी पर हुई दर्दनाक हादसा देखने को मिला, जिसमें पहाड़ी से गिरकर मां-बाप और बेटे की मौत हो गई. दरअसल उस वक्त जानकारी सामने आई थी कि 19 वर्षीय कुणाल आईफोन की जिद कर रहा था, जिसके चलते वो पहाड़ी के किनारे पर खड़ा था और उसके मां-बाप मुरलीधर और संगीता उसको वहां मना रहे थे.
इस दौरान पहाड़ी पर गांव वाले भई मौजूद थे वे भी कुणाल को मना रहे थे लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी वो नहीं माना. बेटे को बचाने के चक्कर में मां-बाप भी पहाड़ी से गिर गए और तीनों की मौत हो गई, लेकिन अब जानकारी सामने आ रही है कि कुणाल आईफोन की जिद नहीं बल्कि कुछ और चाहता था.
क्या चाहता था कुणाल?
कुणाल के रिश्तेदारों के अनुसार, चंदगुडे परिवार में माता-पिता के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे. परिवार के लोगों का कहना है कि कुणाल चाहता था कि उसके माता-पिता अपने विवाद खत्म कर फिर से साथ रहें. संगीता के मायके पक्ष के रिश्तेदारों ने बताया कि दंपति के बीच संपत्ति समेत कई मुद्दों को लेकर तनाव था. हालांकि, परिवार को करीब से जानने वाले लोगों ने उनके रोजमर्रा के जीवन में किसी बड़ी असामान्य स्थिति की जानकारी होने से इनकार किया.
कब हुई थी मुरलीधर और संगीता की शादी?
मुरलीधर की बहन शोभा राजेंद्र मस्के ने दंपति के वैवाहिक जीवन को लेकर जानकारी दी. उनके मुताबिक, मुरलीधर और संगीता ने करीब 22 साल पहले प्रेम विवाह किया था. शोभा ने दावा किया कि मुरलीधर के माता-पिता इस विवाह के खिलाफ थे और शादी में शामिल भी नहीं हुए थे. उनके अनुसार, विवाह के बाद भी मुरलीधर और उनके परिवार के बीच संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके. उन्होंने मुरलीधर और संगीता के बीच सालों से चले आ रहे मतभेदों का भी जिक्र किया.
कब किराए के घर में आया था परिवार?
चंदगुडे परिवार जिस मकान में रह रहा था, उसके केयरटेकर आदित्य देशपांडे ने बताया कि परिवार करीब चार महीने पहले वहां किराए पर रहने आया था. उन्होंने परिवार को अच्छे व्यवहार वाला बताया. उनके मुताबिक, कुणाल आमतौर पर शांत रहता था और अपने आप में ही रहता था. परिवार के रोजमर्रा के व्यवहार में उन्हें ऐसी कोई बात नजर नहीं आई थी, जिससे इस तरह की घटना का अंदेशा हो.
मुरलीधर के सहकर्मियों ने भी उन्हें शांत और अनुशासित व्यक्ति बताया. चौधरी ट्रांसपोर्ट के मैनेजर पवन ओटाम्बे के अनुसार, मुरलीधर करीब 10 सालों से कंपनी में ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे. पवन ओटाम्बे ने बताया कि इस दौरान मुरलीधर के खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं मिली थी.
कैसे हुआ हादसा?
पुलिस के मुताबिक, कुणाल सोमवार सुबह करीब 8 बजे घर से निकला था. बताया जा रहा है कि उसे अपनी कक्षाओं के लिए जाना था. जब वह सुबह 9:10 बजे तक संस्थान नहीं पहुंचा, तो वहां से उसकी मां संगीता से संपर्क किया गया. इसके बाद कुणाल की लोकेशन खुवाडिया पहाड़ी की तरफ मिली. सुबह करीब 10 बजे से 10:30 बजे के बीच उसके पहाड़ी पर होने की जानकारी सामने आई. इसके बाद ग्रामीणों ने लगभग 10:45 बजे पुलिस को सूचना दी.
पुलिस और दमकल विभाग के घटनाक्रम के अनुसार, जब बचाव अभियान शुरू हुआ, तब कुणाल पहाड़ी की चोटी पर था. परिवार के सदस्यों, पुलिसकर्मियों और दमकल कर्मियों ने उसे सुरक्षित नीचे आने के लिए समझाने का प्रयास किया. बचाव अभियान के दौरान मुरलीधर अपने बेटे के पास पहुंचे और उसका हाथ पकड़कर उसे सुरक्षित लाने की कोशिश की. इसी दौरान दोनों का संतुलन बिगड़ गया और वे पहाड़ी से नीचे गिर गए. कुछ ही देर बाद संगीता ने भी अपने पति और बेटे को गिरते देखा और पहाड़ी से नीचे छलांग लगा दी. इस तरह परिवार के तीनों सदस्यों की जान चली गई.