जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से गांव तक पहुंचा विवाद, कौन है CJP कार्यकर्ता शेख अब्दुल, जिनके पिता की पीट-पीटकर कर दी गई हत्या- 10 पॉइंट्स
दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में शामिल हुए बंगाल के CJP कार्यकर्ता शेख अब्दुल के पिता की उनके ही घर में पीट-पीटकर कुछ लोगों ने हत्या कर दी. अब्दुल के परिवार ने भाजपा के कार्यकर्ताओं पर इसका आरोप लगाया है.
CJP worker Sheikh Abdul Hafiz
(Image Source: ANI, X/ @TheSiasatDaily )पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में CJP कार्यकर्ता शेख अब्दुल हफीज के पिता मोहम्मद माफिक की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है. हफीज का आरोप है कि दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन में उनकी भागीदारी और गांव के सरकारी स्कूल की बदहाली को लेकर चलाए गए अभियान के बाद उनके परिवार को निशाना बनाया गया. आरोप है कि घर पर हुए हमले में उनके पिता गंभीर रूप से घायल हुए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
मामले के बाद इंदास इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है. पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें स्थानीय BJP बूथ अध्यक्ष अष्टम माझी और एक पूर्व BJP बूथ अध्यक्ष के शामिल होने की बात सामने आई है। हालांकि, जिला पुलिस अधीक्षक ने घटना को राजनीतिक रंग दिए जाने से इनकार किया है और कहा है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है.
10 पॉइंट्स में जानें पूरा मामला
1. मामला बांकुड़ा के इंदास थाना क्षेत्र का है, जहां CJP कार्यकर्ता शेख अब्दुल हफीज के पिता मोहम्मद माफिक की मौत हो गई. हफीज का आरोप है कि उनके परिवार पर हमला किया गया था. गंभीर रूप से घायल माफिक को पहले इंदास ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. हालत बिगड़ने के बाद 15 अगस्त को उन्हें बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
2. हफीज के मुताबिक, वह 19 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे. अगले दिन यानी 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी. इसी दौरान हफीज की तबीयत खराब हो गई और उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में एक दिन रहने के बाद उन्होंने फिर आंदोलन से जुड़े कार्यों में हिस्सा लिया.
3. दिल्ली में रहने के दौरान हफीज आंदोलन से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करते थे. उनका दावा है कि गांव लौटने के बाद स्थानीय BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके CJP आंदोलन में शामिल होने पर नाराजगी जताई. हफीज का कहना है कि उन्हें धमकियां भी मिलने लगी थीं. इसके बाद उन्होंने आंदोलन से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट करना बंद कर दिया.
4.आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद हफीज 27 जुलाई को अपने गांव लौट आए. हालांकि, गांव लौटने के बाद भी उन्होंने सामाजिक गतिविधियां जारी रखीं. उनका अगला अभियान अपने गांव के सरकारी स्कूल की खराब स्थिति और बुनियादी सुविधाओं को लेकर था.
5. 13 अगस्त को हफीज CJP के ‘Fix the School’ कार्यक्रम के तहत करिशुंडा पश्चिमपाड़ा प्राथमिक स्कूल पहुंचे. खास बात यह है कि हफीज खुद इसी स्कूल के पुराने छात्र हैं. अभियान का उद्देश्य स्कूल में पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सामने लाना था. हफीज ने स्कूल से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर भी साझा की.
6. हफीज का आरोप है कि स्कूल की स्थिति को लेकर अभियान चलाने और उसकी जानकारी साझा करने के बाद उसी रात कुछ लोग उनके घर पहुंचे. उनके मुताबिक, हमलावरों के पास लाठी, रॉड और कुल्हाड़ी जैसे हथियार थे. आरोप है कि घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की गई.
7. हफीज के अनुसार, वह किसी तरह खुद को बचाकर घर के भीतर चले गए. इसी दौरान उनके पिता मोहम्मद माफिक उन्हें बचाने के लिए सामने आए. आरोप है कि हमलावरों ने माफिक के साथ भी बुरी तरह मारपीट की. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
8. माफिक की मौत के बाद उनकी पत्नी हसीना बेगम इंदास थाने पहुंचीं. उन्होंने 10 से 15 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और पांच लोगों के नाम भी शिकायत में बताए. पुलिस ने मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में स्थानीय BJP बूथ अध्यक्ष अष्टम माझी और एक पूर्व BJP बूथ अध्यक्ष के नाम भी सामने आए हैं.
9. मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू होने के बीच जिला पुलिस अधीक्षक ने घटना को राजनीतिक रंग दिए जाने से इनकार किया है. पुलिस का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है. ऐसे में हमले के पीछे वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
10. मोहम्मद माफिक की मौत के बाद CJP ने घटना की कड़ी निंदा की है. संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि लोग अपने स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए आगे आ रहे हैं और ऐसे समय में सहयोग के बजाय हिंसा की घटना बेहद गंभीर है.