प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 सितंबर 2026 को विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी. अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन को बड़ा जनसमर्थन दिलाने में सिंघल की भूमिका लंबे समय से चर्चा में रही है. अशोक सिंघल केवल राम मंदिर आंदोलन से ही नहीं, बल्कि संगठन निर्माण, धार्मिक-सामाजिक अभियानों और वैदिक शिक्षा को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों के लिए भी जाने जाते थे. उनकी जयंती के मौके पर उनके जीवन और उनसे जुड़े उन 10 पहलुओं की चर्चा हो रही है, जिन्होंने उन्हें हिंदू संगठनों और राम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास में एक प्रमुख चेहरा बनाया.

पीएम मोदी ने उनकी जयंती के मौके पर 9 अक्टूबर 1981 का एक ऐतिहासिक पत्र सार्वजनिक किया है, जो अशोक सिंघल ने नरेंद्र मोदी के लिए लिखा था. जिसमें उन्होंने युवा कार्यकर्ता के रूप में नरेंद्र मोदी को संगठन से जुड़े कुछ कार्य व जिम्मेदारियां सौंपी थीं. जिसको अब पीएम मोदी याद करते हुए अपने लिए एक महत्वपूर्ण और यादगार पल बताया है.

अशोक सिंघल के जीवन से जुड़ी 10 अहम बातें

1. अशोक सिंघल को अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है. विश्व हिंदू परिषद के विभिन्न कार्यक्रमों और धर्म संसदों में उन्होंने आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई. राम मंदिर आंदोलन को सामाजिक और धार्मिक समर्थन दिलाने में उनकी संगठनात्मक भूमिका महत्वपूर्ण रही. इसी वजह से राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है.

2. बेहद कम उम्र में ही अशोक सिंघल आरएसएस से जुड़ गए थे. उन्होंने प्रचारक के तौर पर कई जिम्मेदारियां संभालीं और आगे चलकर दिल्ली प्रांत के प्रांत प्रचारक भी रहे. संगठन में लंबे अनुभव के बाद वह विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे और लंबे समय तक इसके अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली.

3. राम-जानकी यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच युवाओं को संगठित करने का प्रयास भी उनके जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना जाता है. इसी दौर में तैयार हुई युवाओं की टोली आगे चलकर बजरंग दल के गठन से जुड़ी.

4. विश्व हिंदू परिषद में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने के बाद 1983-84 के दौरान अशोक सिंघल ने राष्ट्रीय एकात्मता यात्रा से जुड़े अभियान में भूमिका निभाई. इस यात्रा में गंगा जल, भारत माता और गौ-माता जैसे प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया था.

5. साल 1994 के नासिक कुंभ से जुड़ा एक मुद्दा भी अशोक सिंघल के जीवन से जोड़ा जाता है. बताया जाता है कि संतों और विद्वानों के साथ विचार-विमर्श के बाद महिलाओं द्वारा वेद मंत्रों के पाठ का आयोजन कराया गया.

6. अशोक सिंघल ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नाम में मौजूद ‘हिंदू’ शब्द को हटाने के प्रयासों का विरोध किया था. इसके साथ ही महामना मदन मोहन मालवीय के विचारों और योगदान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मालवीय मिशन की स्थापना से भी उनका नाम जुड़ा है.

7. रामसेतु की रक्षा से जुड़े अभियान में भी अशोक सिंघल सक्रिय रहे. उन्होंने इस मुद्दे को लेकर देशभर में जागरूकता अभियान चलाने की कोशिश की. इसके अलावा 1984 में पंजाब में आतंकवाद और तनाव के दौर में उन्होंने संतों के साथ राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा निकालने में भूमिका निभाई.

8. संगठनात्मक और सामाजिक गतिविधियों के अलावा अशोक सिंघल की रुचि आध्यात्मिक साहित्य और संगीत में भी थी. बताया जाता है कि उनकी आवाज काफी मधुर थी और उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कई संगठनात्मक गीतों को अपनी आवाज दी.

9. अशोक सिंघल के जीवन से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं में वैदिक शिक्षा और भारतीय संस्कारों को बढ़ावा देना भी शामिल था. उनका जोर इस बात पर था कि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे.

10. अशोक सिंघल ने अपना जीवन संगठन और सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों को समर्पित किया. उन्होंने आरएसएस के लिए काम करने का संकल्प कम उम्र में लिया और जिसके चलते उन्होंने शादी नहीं की थी.