Ashok Kharat Case में खुल रही एक के बाद एक नेताओं की कुंडली! विपक्ष के हमले के बीच एक्शन में आए फडणवीस
Ashok Kharat Case: महाराष्ट्र में अशोक खरात उर्फ ‘कैप्टन’ का मामला अब बड़ा सेक्स स्कैंडल बन चुका है, जिसमें 200 से ज्यादा वीडियो और सियासी कनेक्शन के आरोप सामने आए हैं. रूपाली चाकंकर के इस्तीफे के बाद राजनीतिक घमासान तेज है और SIT हर एंगल से जांच में जुटी है.
अशोक खरात का 100 करोड़ का साम्राज्य
महाराष्ट्र में खुद को ज्योतिषी और तांत्रिक बताने वाले अशोक खरात उर्फ 'कैप्टन' का मामला अब सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति, प्रशासन और समाज को हिलाने वाला बड़ा स्कैंडल बन चुका है. महिलाओं के यौन शोषण से शुरू हुआ यह मामला अब सत्ता के गलियारों तक पहुंच गया है, जहां आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. वहीं इस मामले में महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकंकर ने इस्तीफा दे दिया जिसके बाद हर दिन नए-नए दावे और इस केस में जुडे हुए नेताओं के इस्तीफे को लेकर मांग की जा रही है.
इस केस ने तब और तूल पकड़ लिया जब महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष रूपाली चाकंकर की तस्वीरें अशोक खरात के साथ वायरल हुईं. बढ़ते दबाव और विवाद के बीच उन्हें इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन इसके बाद जो खुलासे सामने आए, उन्होंने इस पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है. आइए इस खबर में किसने क्या कहां तो वहीं सवाल कौन-कौन से खड़े हो रहे हैं एक नजर डालते हैं...
क्या अशोक खरात सिर्फ एक ढोंगी बाबा था या बड़ा सेक्स रैकेट चला रहा था?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ अंधविश्वास या धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है. आरोप है कि अशोक खरात ने 'आध्यात्मिक गुरु' का चोला पहनकर महिलाओं को अपने जाल में फंसाया और फिर उनका शारीरिक शोषण किया. पुलिस को उसके पास से कई वीडियो मिले हैं, जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यह एक संगठित नेटवर्क हो सकता है. जांच में सामने आया है कि कई महिलाओं को इलाज और ‘ऊर्जा शुद्धिकरण’ के नाम पर धोखा दिया गया.
रूपाली चाकंकर पर क्यों उठे सवाल और क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
विवाद तब और गहरा गया जब रूपाली चाकंकर की अशोक खरात के साथ तस्वीरें वायरल हुईं. एक तस्वीर में वह उनके लिए छाता पकड़े नजर आईं, तो दूसरी में उनके चरण पूजती दिखीं. इन तस्वीरों के सामने आने के बाद विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि महिला आयोग का पद होते हुए भी उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश की. बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच चाकंकर को आखिरकार अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.
क्या रूपाली थोम्ब्रे पाटिल के आरोपों ने केस को और विस्फोटक बना दिया?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता रूपाली थोम्ब्रे पाटिल ने इस मामले को नया मोड़ देते हुए चौंकाने वाले आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि 'मैं पार्टी में होने के कारण आरोप नहीं लगा रहा हूं. मैं ये सभी आरोप एक वकील के तौर पर लगा रहा हूँ. क्योंकि चकांकर इस जालसाज अशोक खरात के सेक्स रैकेट की मुख्य साजिश कर्ता है.' उन्होंने यह भी दावा किया कि कई महिलाएं शिकायत लेकर उनके पास आई थीं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला. उनके मुताबिक, यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मिलीभगत का है.
पुलिस जांच में क्या-क्या सनसनीखेज खुलासे हुए हैं?
जांच के दौरान पुलिस को एक पेन ड्राइव मिली, जिसमें 58 आपत्तिजनक वीडियो पाए गए. तो वहीं इसके बाद 200 से अधिक अश्लील वीडियो का दावा सामने आया है. इसके अलावा कई और डिजिटल सबूत भी सामने आए हैं. पुलिस और SIT की टीमें अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. जानकारी के मुताबिक आगे बता दे कि दावा किया जा रहा है कि 24 मार्च को अशोक खरात की सुनवाई होनी है. इसके साथ ही इस मामले में दावा किया है कि नीरज जाधव का भी नाम आया है जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
क्या सियासी कनेक्शन इस केस को और बड़ा बना रहे हैं?
अशोक खरात की कई नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आने के बाद मामला पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है. विपक्ष लगातार इसे ‘हाई-प्रोफाइल सेक्स स्कैंडल’ बता रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है. वहीं सरकार का कहना है कि दोषी चाहे कोई भी हो, कार्रवाई जरूर होगी. मुख्यमंत्री स्तर पर भी इस मामले की निगरानी की बात कही जा रही है.
क्या यह मामला महिलाओं की सुरक्षा और सिस्टम की नाकामी का बड़ा उदाहरण है?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कैसे अंधविश्वास और सत्ता के संरक्षण में ऐसे अपराध लंबे समय तक चलते रहते हैं. जांच एजेंसियों का कहना है कि कई महिलाएं सामाजिक दबाव के कारण सामने नहीं आतीं, लेकिन अब उन्हें आगे लाने की कोशिश की जा रही है ताकि उन्हें न्याय मिल सके.
अशोक खरात मामले पर क्या बोले महाराष्ट्र के CM?
अशोक खरात के मामले में पर महाराष्ट्र मुख्यमंत्री ने कहा कि, हवा में बातें करने से कुछ हासिल नहीं होगा. अशोक खरात का मामला बेहद गंभीर है और इसका खुलासा हमने पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर किया है. अक्सर शर्म और सामाजिक दबाव के कारण पीड़ित महिलाएं सामने नहीं आ पातीं, लेकिन हम उन्हें भरोसा देकर आगे आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. इस पूरे मामले की निगरानी उच्च स्तर पर की जा रही है और नासिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी व SIT मिलकर जांच में जुटे हैं. हम किसी भी दोषी को बख्शने वाले नहीं हैं.
इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश पूरी तरह बेकार है. मेरे पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि विपक्ष के कौन-कौन लोग खरात से जुड़े थे, हालांकि वे सभी साक्ष्य फिलहाल पुलिस के पास हैं और जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं. अगर जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है. लेकिन सिर्फ मुलाकात के आधार पर कार्रवाई करना भी सही नहीं होगा. यह आप और मीडिया दोनों अच्छी तरह समझते हैं. सबसे अहम बात यह है कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा मामला है.'
अशोक खरात मामले पर विपक्ष की मांग क्या?
खरात के साथ कई मंत्रियों की सामने आई तस्वीरों को आधार बनाते हुए शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो आठ से नौ मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किया जाना चाहिए. वहीं कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सिर्फ इस्तीफा देना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने मांग की कि खरात से जुड़े मंत्रियों और अन्य राजनीतिक व्यक्तियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए.
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि खरात ने बड़े पैमाने पर संपत्ति अर्जित की और सत्ता पक्ष के नेताओं से करीबी संबंध बनाए, जिससे मामले को दबाने की आशंका और गहरी हो गई है. इस बीच सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने इस पूरे प्रकरण को महाराष्ट्र के लिए एक “कलंक” करार दिया और कहा कि इसमें कड़ी कार्रवाई होना जरूरी है. उन्होंने माना कि खरात की कई प्रभावशाली लोगों के साथ तस्वीरें सामने आई हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि केवल तस्वीरों के आधार पर सीधे संबंध साबित नहीं होते. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच जारी है और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.
महिला आयोग की अध्यक्ष को लेकर किन-किन नामों की चर्चा?
इस घटनाक्रम के बाद अब राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस महत्वपूर्ण पद के लिए नए चेहरों की तलाश शुरू हो चुकी है. विधायक रोहित पवार ने सुझाव दिया है कि इस पद पर किसी राजनीतिक व्यक्ति के बजाय अनुभवी और निष्पक्ष लोगों को मौका दिया जाना चाहिए. उन्होंने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी मीरा बोरवणकर, वरिष्ठ अधिवक्ता वर्षा देशपांडे, ‘मासूम’ संगठन से जुड़ी मनीषा गुप्ते और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मेधा गाडगिल जैसे नामों को आगे बढ़ाने की वकालत की है.