आओ, जूता-फेंक जूता-फेंक खेलें, किरण बेदी से मनस्वी वशिष्ठ तक...दिल्ली पुलिस Vs वकीलों के क्लेश की STORY- पूर्व DCP से जानिए
| दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच टकराव क्यों बढ़ा? ACP मनस्वी वशिष्ठ के सस्पेंशन, शाहदरा विवाद और पुलिस अनुशासन पर पूर्व DCP एलएन राव ने क्या कहा? आइए 15 Point में पूरी कहानी जानते हैं...
दिल्ली में एक बार फिर खाकी वर्दी और काले कोट के बीच टकराव ने पुलिस महकमे को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प के बाद शुरू हुआ विवाद अब दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया. पहले वकीलों की मांग पर ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला किया गया और फिर इसके विरोध में करीब 150 पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच गए. हैरानी की बात यह रही कि प्रदर्शन की अगुवाई खुद ACP मनस्वी वशिष्ठ कर रहे थे.
अब उन्हें निलंबित कर दिया गया है. लेकिन सवाल सिर्फ एक ACP के सस्पेंशन का नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस के भीतर पनप रहे असंतोष और पुलिस-वकील टकराव का भी है. आखिर हर बार खाकी और काले कोट की इस लड़ाई में कानून ही क्यों कटघरे में खड़ा हो जाता है? क्या 1988 और 2019 के तीस हजारी विवाद से भी दिल्ली पुलिस और वकीलों ने कोई सबक नहीं लिया?
दिल्ली पुलिस बनाम वकील विवाद पर पूर्व DCP एलएन राव ने क्या बताया
1. वकील-पुलिस की लड़ाई आज की नहीं, किरण बेदी के दौर से चला आ रहा है विवाद – तीस हजारी कोर्ट में हुए टकराव के बाद भी कई बार दोनों पक्ष आमने-सामने आ चुके हैं.
2. एक छोटी सी बात ने कैसे खड़ा कर दिया इतना बड़ा विवाद? – गांधीनगर मामले की शुरुआत मारपीट और चोट लगने की शिकायत से हुई थी, लेकिन गिरफ्तारी के तरीके को लेकर विवाद बढ़ गया.
3. गैर-जमानती मामले में भी पुलिस के पास जमानत देने का अधिकार – एलएन राव के मुताबिक, कुछ परिस्थितियों में पुलिस गैर-जमानती अपराध में भी आरोपी को जमानत दे सकती है. इसी प्रक्रिया को लेकर वकीलों ने सवाल उठाए.
4. बुजुर्ग आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस और वकीलों में टकराव – मामले में आरोपी वरिष्ठ नागरिक थे. पुलिस ने उन्हें शारीरिक रूप से गिरफ्तार करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत छोड़ा, जिस पर वकीलों ने आपत्ति जताई.
5. वकीलों के बीच भी दो गुट, हर कोई झगड़े में शामिल नहीं होता – एलएन राव ने कहा कि स्थापित और पेशेवर वकील आमतौर पर ऐसे विवादों से दूर रहते हैं. कुछ लोग ही इस तरह के टकराव में शामिल होते हैं.
6. 14 साल की वकालत में एलएन राव कभी किसी केस के लिए थाने नहीं गए – पूर्व DCP का कहना है कि वकीलों को अपना काम अदालत में करना चाहिए, पुलिस थानों में जाकर अधिकारियों से उलझना नहीं चाहिए.
7. 1987 में अपने ही पुलिस महकमे के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए थे एलएन राव – उनके एक मुखबिर को SHO ने कथित तौर पर झूठे NDPS केस में फंसा दिया था. राव ने थाने में भिड़ने के बजाय अदालत का रास्ता चुना.
8. मुखबिरों के दम पर सुलझाए बड़े केस, आतंकियों और गैंगस्टरों तक से हुई मुठभेड़ – एलएन राव ने अपनी पुलिस सेवा की सफलता का बड़ा श्रेय मुखबिरों को दिया. उन्होंने बताया कि इसी दौरान उनके शरीर में गोली भी लगी थी.
9. पुलिस की नौकरी में 37 साल, लेकिन वकीलों से कभी व्यक्तिगत टकराव नहीं हुआ – राव के मुताबिक, कोर्ट में लगातार पेश होने और वकीलों के साथ काम करने के बावजूद उन्होंने कभी झगड़े की नौबत नहीं आने दी.
10. वकील और पुलिस दोनों एक ही न्यायिक व्यवस्था के अहम हिस्से – पुलिस की जांच के बिना केस आगे नहीं बढ़ सकता और वकीलों के बिना मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो सकती. दोनों की जिम्मेदारी व्यवस्था को मजबूत करना है.
11. पुलिसकर्मी का AK-47 से पूरी मैगजीन खाली करने वाला बयान गलत – एलएन राव ने ACP मनश्री वशिष्ठ के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान ऐसी धमकी देने वाले पुलिसकर्मी की आलोचना की. उन्होंने इसे खुली चुनौती और अनुशासन के खिलाफ बताया.
12. वकीलों की शिकायत के लिए Vigilance Department और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद – राव ने कहा कि पुलिस के खिलाफ शिकायत करने के लिए निर्धारित व्यवस्था है. मारपीट या थाने में जाकर दबाव बनाने के बजाय इसी मंच का इस्तेमाल होना चाहिए.
13. पुलिस के खिलाफ वकील और वकीलों के खिलाफ पुलिस कर सकती है शिकायत – वकीलों के मामले में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और पुलिसकर्मियों के मामले में विभागीय व्यवस्था के तहत कार्रवाई का प्रावधान है.
14. ACP का ट्रांसफर हमेशा सजा नहीं, प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा भी हो सकता है – एलएन राव ने कहा कि विवाद शांत कराने के लिए अधिकारियों का तबादला किया जा सकता है. बाद में परिस्थितियां सामान्य होने पर दोबारा पोस्टिंग भी मिल सकती है.
15. पुलिस में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं, कार्रवाई जरूरी थी – एलएन राव ने ACP और इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को सही ठहराया. उनका कहना है कि पुलिस अनुशासित बल है और ऐसे प्रदर्शन पर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरी फोर्स में गलत संदेश जाएगा.